शिक्षा मनोविज्ञान किसे कहते है ? मनोविज्ञान का अर्थ एवं उत्पति

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शिक्षा शब्द का अभिप्राय :- शिक्षा मानव के गुणों को विकसित करने की प्रकिया है। शिक्षा के द्वारा ही मानव की अंतर्निहित योग्यताओं को विकसित करके समाज में रहने योग्य। बनाया जा सकता हैं। शिक्षा + मनोविज्ञान शिक्ष् + अ = शिक्षा = सीखने-सिखाने की क्रिया / परिमार्जन व्यक्ति के व्यवहार में / परिमार्जित या प्रकाशित करने वाली क्रिया

शिक्षा की परिभाषाएं :- अरस्तू :- “शिक्षा का कार्य स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करना है।” प्लेटो :- “शिक्षा व्यक्ति में शारीरिक , मानसिक एवं बौद्धिक परिवर्तन लाती है।” गांधीजी :- “शिक्षा से मेरा अभिप्राय है मनुष्य के शरीर , आत्मा तथा मस्तिष्क का सर्वांगीण एवं सर्वोत्तम विकास से है।” पेस्तालॉजी :- “शिक्षा बालक की आंतरिक अभियोग्यताओं का स्वाभाविक एवं सम रस , प्रगतिशील विकास करती है।” फ्रोबेल :- “शिक्षा बालक की आंतरिक शक्तियों को बाह्य शक्तियों का रूप देती है।” जॉन लॉक :- “जिस प्रकार से फसल के लिए कृषि होती है उसी प्रकार से बालक के लिए शिक्षा होती है।”। स्वामी विवेकानन्द :- “शिक्षा बालक की पूर्णनिहित पूर्णता को अभिव्यक्त करती है।”। कॉलसानिक :- “शिक्षा बालक में शारीरिक व मानसिक विकास करती है।”


शिक्षा मनोविज्ञान :- शैक्षिक वातावरण में मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण का आ जाना ही शिक्षा मनोविज्ञान है।

शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषाएं :-

कॉलसनिक :- “शिक्षा मनोविज्ञान , मनोविज्ञान के प्रयोगों एवं सिद्धांतो का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग है। स्टीफन :- “शिक्षा मनोविज्ञान बालक के क्रमबद्ध शैक्षिक विकास का अध्ययन है।”। स्किनर :- “शिक्षा मनोविज्ञान बालक मनोविज्ञान की वह शाखा है जो शिक्षक व अधिगम से संबंधित है।” क्रो&क्रो :- “शिक्षा मनोविज्ञान व्यक्ति के जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के अनुभवों का वर्णन एवं व्याख्या है।”

शिक्षा मनोविज्ञान की उत्पत्ति :- अमेरिकी विद्वान थॉर्नडाईक , शिक्षा मनोविज्ञान के जनक माने जाते है जिन के मानस पटल पर प्रसिद्ध प्रकृतिवादी विचारक रूसो का प्रभाव है। रूसो की emile (एमाइल) मानक पुस्तक में लिखा था “बालक एक पुस्तक के समान है , शिक्षक को उसे आद्योपान ( शुरू से अन्त ) तक पढ़ना चाहिए” इनके इसी विचार के कारण शिक्षा में मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण लाने का श्रेय जाता है। थॉर्नडाईक के प्रयासों से सर्वप्रथम 1900 ई. में अमेरिका से शिक्षा मनोविज्ञान की शुरुआत हुई। अमेरिकी शिशाशास्त्री जॉन डी. वी. के प्रयासों से शिक्षक प्रशिक्षण शुरू हुए। भारत देश में शिक्षक प्रशिक्षण कार्य 1920 ई. से प्रारम्भ हुआ और शिक्षा मनोविज्ञान प्रचलन में आया। एक बालक के विकास के दृष्टिकोण से वह सम्पूर्ण विषयवस्तु जो मनोवैज्ञानिक तरीके से जानी जाती है शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र है , यथा बालविकास , अधिगम , अभिप्रेरणा , व्यक्तित्व , बुद्धि , व्येक्तिगत विशेषताएं , मानसिक स्वास्थ्य , शिक्षण अधिगम प्रक्रिया , मापन-मूल्यांकन आदि।

शिक्षा मनोविज्ञान की उपादेयता :- शिक्षा मनोविज्ञान की उपादेयता से अभिप्राय होता है की उसे कहा-कहा काम में लिया जा रहा है। 1. बालक को समझने में। 2. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में। 3. उपचारात्मक शिक्षण में। 4. मापन व मूल्यांकन में।

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