चुम्बक किसे कहते है? प्रकार, गुण, चुंबकीय तरंग, क्षेत्र

स्वागत है आपका, आज हम चुम्बक (Magnet) के विषय में अध्ययन करेंगे। यहां पर पे हम चुंबक किसे कहते है? चुम्बक के प्रकार, चुंबक के गुण, चुंबकीय तरंग, चुंबकीय क्षेत्र, चुंबकीय बल, चुम्बक के उपयोग इत्यादि के विषय में विस्तार पूर्वक जानेंगे।

चुंबक किसे कहते है?

यह एक ऐसा पदार्थ है, जो लोहा, कोबाल्ट, निकिल या उनके यौगिकों को आकर्षित करता है, चुम्बक कहलाता है।

– स्वतंत्रता पूर्वक किसी धागे से लटकाने पर ये उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित होती है।
– चुम्बक सदैव द्विध्रुव के रूप में अस्तित्व रखती है तथा एकल ध्रुव का अस्तित्व संभव नहीं है।

चुंबक के प्रकार:-

1. प्राकृतिक चुम्बक:-

इसकी खोज एशिया प्रान्त के मैग्नीशिया शहर में हुई थी।
मैग्नीशिया में ऐसे पत्थर की खोज हुई जो Ni, Co तथा Fe को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिसका नाम चुम्बक (Magnet) रखा गया। उदाहरण- Fe3O4
प्राकृतिक चुम्बक का उपयोग दैनिक जीवन में नहीं होता है।

2. कृत्रिम चुंबक:-

(1) स्थायी चुंबक:-

इस चुम्बक में लम्बे समय तक चुम्बकीय गुण पाए जाते हैं।
इसके चुम्बकीय गुणों को आसानी से नष्ट नहीं किया जा सकता है।
इसका उपयोग दैनिक जीवन में नहीं होता है।

(2) अस्थायी चुम्बक:-

इस प्रकार की चुम्बक, चुम्बकीय गुण तब ही प्रदर्शित करती है जब तक उस पर कोई बाह्य बल कार्य करता है। जैसे ही इस बाह्य बल को हटा दिया जाए तो चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाते हैं।
यह एलनिको (Al+Ni+Co) नामक मिश्रधातु का बना होता है।
चुम्बक द्वारा लौह, इस्पात आदि धातुओं की अपनी ओर आकर्षित करने के गुण को चुम्बकत्व कहा जाता है।

चुम्बक के चुम्बकीय गुणों को नष्ट करने के सही तरीके:-

अत्यधिक ताप देकर चुम्बकीय गुणों को नष्ट किया जा सकता है।
चुम्बक को पीटकर भी चुम्बकीय गुणों को नष्ट किया जा सकता है।
लम्बे समय तक चुम्बक को खुला छोड़ने पर भी चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाते हैं।

क्यूरीताप:-
वह तापमान जिस पर चुम्बक अपने चुम्बकीय गुणों को खो देता है, उस तापमान को क्यूरी ताप कहा जाता है।

चुंबक के ध्रुव:-

चुम्बक में दो ध्रुव पाए जाते हैं-
1. उत्तरी ध्रुव या धनात्मक ध्रुव
2. दक्षिणी ध्रुव या ऋणात्मक ध्रुव
चुम्बक के समान ध्रुवों के मध्य प्रतिकर्षण होता है तथा विपरीत ध्रुवों के मध्य आकर्षण होता है।
चुम्बक के ध्रुवों को पृथक् नहीं किया जा सकता है।

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चुम्बकीय पदार्थ:-

– किसी तत्त्व या पदार्थ में चुम्बकीय गुण उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन के चक्रण या घूर्णन गति के कारण होता है।
– चुम्बकीय पदार्थों को तीन पदार्थों में विभाजित किया गया। (फैराडे के अनुसार)
1. अनुचुम्बकीय
2. लौह-चुम्बकीय
3. प्रति चुम्बकीय

1. अनुचुम्बकीय पदार्थ:-

– इन्हें जब बाहरी चुम्बक क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में चुम्बकीत हो जाते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।
– इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक एवं कम होती है।
– ये दुर्बल चुम्बकत्व का गुण दर्शाते हैं।
– ताप बढ़ाने पर इन पदार्थों का चुम्बकत्व घटता है। उदाहरण- Pt, Na, Al, Cr, Mn, Cu, O2

2. लौह चुम्बकीय पदार्थ:-

– ये स्वयं चुम्बकत्व का गुण दर्शाते हैं। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति में प्रबल चुम्बकत्व इनमें उत्पन्न होता है। लौह चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।
– इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक एवं अधिक होती है।
– ये पदार्थ क्यूरी नियम का पालन करते हैं।
– इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप बढ़ाने पर कम तथा ताप घटाने पर अधिक हो जाती है। उदाहरण- Fe, Co, Ni, मैग्नेटाइट।

3. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ:-

– वे पदार्थ, जो बाहरी क्षेत्र में स्वयं को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् व्यवस्थित करते हैं तथा इनमें चुम्बकत्व नहीं पाया जाता है, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।
– इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति कम तथा ऋणात्मक होती है अर्थात् इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर निर्भर नहीं करती है।
– चुम्बकीय कण ताप के बढ़ने अथवा घटने पर अपरिवर्तन रहते हैं।
नोट:- पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण पृथ्वी के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, उसे भू-चुम्बकत्व कहते हैं।
– ऑरस्टेड ने सर्वप्रथम बताया कि धारावाही चालक तार के आस-पास चुम्बकीय क्षेत्र पाया जाता है।
– फैराडे ने बताया कि चुम्बकीय क्षेत्र में रखी कुण्डली में गति होने से इस कुण्डली में धारा प्रवाहित होने लगती है।
– चुम्बकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर या टेस्ला/मीटर2 तथा CGS मात्रक मैक्सवेल होता है।

चुम्बकीय बल रेखाएँ:-

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– किसी चुम्बक के चारों तरफ वह क्षेत्र जहाँ काल्पनिक रेखाएँ चुम्बकीय क्षेत्र को दर्शाती हैं, वे चुम्बकीय बल रेखाएँ कहलाती हैं।
– चुम्बकीय बल रेखाएँ काल्पनिक कहलाती हैं।
– चुम्बकीय बल रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं।
– चुम्बक के अंदर चुम्बकीय बल रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की तरफ गमन करती हैं।
– चुम्बक के बाहर की तरफ चुम्बकीय बल रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की तरफ गमन करती है।
– दो चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती क्योंकि कटाव बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जाती हैं, जो कि संभव नहीं है।
– पृथ्वी के दो ध्रुव होते हैं- उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव।
– पृथ्वी पर चुम्बकीय बल रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की तरफ चलती हैं।
– पृथ्वी का स्वयं का चुम्बकीय क्षेत्र 105T होता है।

चुम्बकीय क्षेत्र:-

– चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र, जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।
– चुम्बकीय क्षेत्र सदिश राशि है।
– चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला तथा C.G.S. मात्रक गॉउस होता है।
F = qVB Sin
q = आवेश
V = वेग
B = चुम्बकीय क्षेत्र
� = V तथा B के मध्य का कोण
F = qVB sin�
– यदि sin� का मान 90o हो तो चुम्बकीय क्षेत्र का मान अधिकतम होगा (Fmax = qVB)

चुम्बकीय फ्लक्स (�):-

– समान चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या चुम्बकीय फ्लक्स कहलाती है।
– चुम्बकीय फ्लक्स = चुम्बकीय क्षेत्र.क्षेत्रफल
� = B.A
 = B.A Cos� 
– यदि � का मान 0 हो तो चुम्बकीय फ्लक्स का मान अधिकतम होगा। max = B.A.
– यदि � का मान 90 हो तो चुम्बकीय फ्लक्स का मान न्यूनतम होगा min = 0

चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक:-

– चुम्बक फ्लक्स का SI या MKS मात्रक वेबर होता है।
– चुम्बकीय फ्लक्स का CGS मात्रक मैक्सवेल होता है।
– चुम्बकीय फ्लक्स प्रेरित धारा (I) के समानुपाती होता है।
� � I
 = LI
 = चुम्बकीय फ्लक्स
L = प्रेरकत्व
I = प्रेरित धारा
– प्रेरकत्व (L) = गतिमान आवेश वाली कुण्डली को किसी अन्य कुण्डली के पास ले जाए तथा धारा में परिवर्तन करने पर दूसरी कुण्डली में स्वत: धारा उत्पन्न हो जाती है, जिसे प्रेरित धारा कहा जाता है।
– बैटरी के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर प्रेरित विभवान्तर कहलाता है तथा इस घटना को प्रेरण कहा जाता है तथा इस क्रिया को प्रेरकत्व कहा जाता है।
– इसका मात्रक हेनरी है।

फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम:-

– इस नियम के अनुसार, अँगूठा प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा को बताता है, तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को तथा मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को बताता है।

दक्षिण पेच का नियम:-

– इस नियम के अनुसार मुड़ी हुई अँगुलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को तथा अँगूठा प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा को बताता है।

फैराडे के नियम:-

फैराडे का प्रथम नियम:-

– जब किसी धारावाही चालक में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है तथा बैटरी के सिरों पर प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होगा।

फैराडे का दूसरा नियम:-

– प्रेरित विद्युत वाहक बल चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक दर के समानुपाती होता है।
e=d�dt
�=LI
e=dLIdt
�=�����

ट्रांसफॉर्मर:-

– ट्रांसफॉर्मर की खोज माइकल फैराडे तथा हेनरी ने की थी।
– ट्रांसफॉर्मर ऐसा उपकरण है जो प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति को परिवर्तित किए बिना उसे बढ़ा अथवा घटा सकता है।
– ट्रांसफॉर्मर का उपयोग दिष्ट धारा उपकरण में किया जाता है। उदाहरण- बैटरी, चार्जर आदि।
– ट्रांसफॉर्मर की सहायता से प्रत्यावर्ती धारा को लम्बी दूरी तक प्रवाहित कर सकते हैं।
– ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य कर सकते हैं।

विद्युत मोटर:-

– विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा किसी चालक में गति उत्पन्न की जा सकती है।
– विद्युत मोटर में तार की एक कुण्डली होती है, जो आयताकार होती है, यह कुण्डली किसी आर्मेचर पर लिपटी रहती है। आर्मेचर चुम्बक के ध्रुवों के बीच धुरी पर घूर्णन करने के लिए स्वतंत्र होती है।
– कुण्डली में धारा प्रवाहित करने पर चुम्बकीय क्षेत्र कुण्डली की विपरीत भुजाओं को ऊपर तथा नीचे की ओर धकेल देती है इससे कुण्डली दक्षिणावर्त घूम जाती है लेकिन दिक् परिवर्तक ध्रुवता में कुण्डली के आधे घूर्णन के बाद परिवर्तन आ जाता है। इस परिवर्तन के कारण अब भुजाओं पर लगने वाला बल उल्टा हो जाता है। इस प्रकार लगातार घूर्णन होते रहने से विद्युत मोटर गतिशील रहती है। विद्युत मोटर इस प्रकार विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।

विद्युत जेनरेटर:-

– डायनेमो या जनरेटर एक ऐसा यंत्र है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है। यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
– जब तारों की एक कुण्डली को स्थायी चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो उसमें प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है, यह बाह्य परिपथ प्रत्यावर्ती धारा में भेजता है।
– प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर के सर्पी वलयों के स्थान पर विभक्त वलय प्रयुक्त किए जाए तो प्रत्यावर्ती धारा जेनरेटर, दिष्ट धारा जनरेटर में बदल जाता है यह बाह्य परिपथ में दिष्ट धारा भेजता है।

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रामप्रसाद RpscGuide में कंटेंट राइटर हैं। रामप्रसाद को पढ़ाई का जुनून है। उन्हें लेखन, करियर, शिक्षा और एक अच्छा कीबोर्ड पसंद है। यदि आपके पास कहानी का कोई विचार है, तो उसे [email protected] पर एक मेल भेजें।

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