कंप्यूटर की पीढ़ियां | Generation of Computer in Hindi (Pidiya)

इस लेख में हम कंप्यूटर की पीढ़ियां (Generation of Computer in Hindi) के बारे में अध्ययन करेंगे। Computer की Pidiya कंप्यूटर के विकास के चरणों के रूप में भी ली जा सकती है।
Computer Generation को जब हम पढ़ते है या जानने की समझने की कोशिश करते है तो हमारे
मन में एक प्रश्न उठता है की Computer ki Pidiya kya hai . तो आइए चलिए जानते हैं कंप्यूटर की पीढ़ी के बारे में :-


अनुक्रम दिखाएँ

कंप्यूटर की पीढ़ियां क्या हैं ? What are Generation of Computer in Hindi (Pidiya)

कंप्यूटर का विकास वैज्ञानिकों के निरन्तर चल रहे प्रयासों का परिणाम है। वैज्ञानिकों का उद्देश्य कंप्यूटर को अधिक उपयोगी, सुविधाजनक, सस्ता, कोटा, तीव्र गति से कार्य करने वाला एवं अधिक विश्वसनीय बनाना रहा है। इसी उद्देश्य के मद्देनजर कंप्यूटर में निरन्तर सुधार होता जा रहा है।

द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के बाद कंप्यूटर का विकास तेजी से हुआ तथा इनके आकार-प्रकार में भी कई परिवर्तन हुए। आधुनिक कंप्यूटर के विकास के इतिहास को तकनीकी विकास के आधार पर कई भागों में विभाजित किया जाता जिन्हें कंप्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations) कहा जाता है। अभी तक कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियाँ अस्तित्व में आ चुकी हैं। प्रत्येक पीढ़ी के कंप्यूटरों की विशेषताएँ और उनका संक्षिप्त परिचय निम्न प्रकार है

(1) प्रथम पीढ़ी (First Generation of Computer In Hindi)
(2) द्वितीय पीढ़ी (Second Generation of Computer In Hindi)
(3) तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer In Hindi)
(4) चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation of Computer In Hindi)
(5) पांचवी पीढ़ी (Fifth Generation of Computer In Hindi)

कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी (First Generation of Computer In Hindi) 1942-55

कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी (First Generation of Computer In Hindi) के कंप्यूटर्स में निर्वात् नलिकाएं या निर्वात वाल्व (Vacuum Tubes or Vacuum Valves) उपयोग में लाए जाते थे।
जैसे- पिक्चर ट्यूब वाले टेलिविजिन में काँच के चेम्बर (कक्ष) में ट्यूब (Cathode Ray Tube या CRT) होती है उसी प्रकार काँच के निर्वातित (वायुरहित) कक्ष में उचित इलेक्ट्रोड्स लगाकर डायोड, ट्रायोड, टेट्रोड आदि बनाये जाते हैं।

एक ही कंप्यूटर में इस प्रकार के कई वाल्वों (Vacuum Tubes) की आवश्यकता होती थी। इन नलिकाओं या वाल्वों के बड़े आकार, काँच का नाजुक देखर, अति उच्च लागत, उच्च प्रारंभिक वोल्टता जो इनके प्रचालन (Operation या Functioning) के लिए आवश्यक थी, के कारण इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स आकार में विशाल, नाजुक, बहुत अधिक महंगे व अधिक ऊर्जा (विद्युत) शक्ति का उपयोग करने वाली मशीनें थी।

सबसे पहला डिजीटल कंप्यूटर संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रेस्पर एकर्ट एवं जॉन मुचली द्वारा 1946 में बनाया गया था।

इसे ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) के नाम से जाना जाता है। इसमें लगभग 18,000 निर्वात नलिकाएँ (Vaccum Tubes) लगी थी। इसका भार 30 टन था और 20 फीट x 40 फीट के क्षेत्रफल की जगह घेर रखी थी। जोड़ने (Addition) की संक्रिया में इसे लगभग 200 माइक्रोसेकण्ड (या 0.2 मिलि सैकण्ड) लगते थे।

यह विश्व का पहला वृहद् स्तर का जनरल पर्पज कंप्यूटर था। 1950 के दशक तक वैज्ञानिकों, सैनिकों एवं इंजिनियर्स के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर एक बहुपयोगी यंत्र हो चुका था। उस समय व्यावसायिक क्षेत्र में कंप्यूटर का प्रयोग प्रारंभ नहीं हुआ था।

1946 में ही प्रसिद्ध गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन ने एकर्ट, मुचली, गोल्डरीन एवं वर्क के साथ मिलकर एक नया कंप्यूटर बनाना प्रारंभ किया जिसमें क्रियाओं (Processes ) के लिए निर्देशों के समूह ‘प्रोग्राम’ को संग्रहित किया जा सकता था और इसके बाद नई क्रिया के लिए नया प्रोग्राम संग्रहित किया जा सकता था। इस प्रकार संग्रहित प्रोग्राम के सिद्धान्त का जन्म हुआ। किया। वॉन न्यूमैन ने 1950 में एडवेक (EDVAC) कंप्यूटर तैयार किया। सबसे पहला संग्रहित प्रोग्राम कंप्यूटर सन् 1949 में मॉरिस विल्कीस (इंग्लैण्ड) ने एडसेक (EDSAC) के रूप में तैयार

BINAC (Binary Automatic Computer), UNIVAC (Universal Autoinatic Computer) EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer), EDSAC (Electronic Delay Stroage आदि इस पीढ़ी के बड़े आकार के व कीमती वैक्यूम ट्यूब कंप्यूटर थे।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रयुक्त अवयव (Elements used in First Generation’s Computers)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा-वैक्यूम ट्यूब (Main Electronic Element Vacuum Tubes):-

वैक्यूब ट्यूब बड़ी होती है इसलिए प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों का आकार बड़ा होता था।

इनपुट, आउटपुट इकाई पंचकार्डः-

कंप्यूटर सिस्टम में प्राथमिक इनपुट तथा आउटपुट के लिए पंचकार्डों का उपयोग होता था। पंचकार्डों की कार्यकारी गति धीमी थी।

प्राथमिक संग्रहण या मेग्नेटिक ड्रम आन्तरिक मेमोरी (Megnetic Drum Internal Memory):-

प्रथम पीढ़ी के कई कंप्यूटरों में आन्तरिक स्मृति (Internal Memory) के रूप में मेग्नेटिक ड्रम काम में लिये जाते थे।

सीमित अनुप्रयोग (Limited Applications):-

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर वाणिज्यिक कार्य, जैसे- वेतनपत्र (Payroll) ) के कार्य ही करते थे। इन कार्यों को मानवीय शक्ति

प्रथम पीढ़ी में सॉफ्टवेयर (Softwares in First Generation):

किसी समस्या के हल को प्राप्त करने के लिए मनुष्य अपने बौद्धिक तर्क को कंप्यूटर में एक सांकेतिक भाषा में संगृहित करता है इसे प्रोग्रामिंग कहते हैं।
समस्या को हल करने के लिए अनेक पद (steps) होते हैं इन्हें निर्देश (commmands) कहते हैं।
इन्हीं निर्देशों के समूह को प्रोग्राम कहते हैं। कंप्यूटर से समझने योग्य भाषा जिसमें प्रोग्राम लिखा जाता है
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा कहलाती है। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों में दो कंप्यूटर-भाषाएँ प्रचलित थीं।
पहली मशीनी भाषा तथा दूसरी असेम्बली भाषा।

मशीनी भाषा में लिखे जाने वाले निर्देशों में सैकड़ों 1 और 0 के संकेतों का प्रयोग होने के कारण
इस भाषा में प्रोग्रामिंग करना कठिन था। सन् 1955-59 में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग
की अन्य भाषा विकसित हुई जिसका नाम FLOWMATIC (Assembly Language) था,
इस भाग को अमेरिकी महिला प्रोग्रामर डॉ. ग्रेस हॉपर ने विकसित किया था।


कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी (Second Generation of Computer In Hindi) 1955-64

इस खंड में हम कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी (Second Generation of Computer In Hindi) के बारे में अध्ययन
करेंगे।
इस पीढ़ी का काल खंड सन 1955-64 है।

अर्धचालकों के ज्ञान के विकास के साथ, 1947 में बैल लेबोरेटरी (USA) के विलियम शॉकली ने ‘ट्रांजिस्टर (अर्धचालक युक्ति, PNP या NPN) का विकास किया।
(सामान्यतया घरों में इस्तेमाल होने वाले रेडियो व मिनी रडियो को भी हम आम बोलचाल में ट्रांजिस्टर बोलते हैं, परन्तु यहाँ जिस अर्धचालक युक्ति ‘ट्रांजिस्टर’ की बात कर रहे हैं वो बाजरे के दाने के आकार के लगभग बराबर, ठोस तथा अर्धचालकों (P या N) की तीन सतहों P-N-P या N-P-N से बने होते हैं।)

वैक्यूट ट्यून्स (Vacuum Tubes) की तुलना में ट्राजिस्टर, छोटे (बहुत कम आकार के), भरोसभन्द, कम नाजुक तथा बहुत थोड़ी-सी विद्युत शक्ति से ही काम करने वाले होने के कारण अधिक उपयोगी सिद्ध हुए।
ट्रांजिस्टर का कार्य वैक्यूम ट्यूब के समान था लेकिन इसकी कार्य करने की क्षमता एवं गति अधिक थी तथा यह आकार में छोटा व अधिक विश्वसनीय था। ट्रांजिस्टर लगातार विद्युत के संवहन से कम गरम होता था और विद्युत की खपत भी कम होती थी।

इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स में इनपुट एवं आउटपुट के उपकरण अधिक सुविधाजनक थे। इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स में IBM-1401, IBM 1602, IBM 7094, CDC 3600 UNIVAC 110) आदि प्रमुख थे।

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रयुक्त अवयव (Elements used in Second Generation’s Computers):-

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा- ट्रांजिस्टर (Main electronic element Transistor):-

ट्रांजिस्टर के प्रयोग से कंप्यूटर का अनुविन्यास और आकार छोटा हो गया, जिससे कंप्यूटर की लागत भी कम हो गई। संग्रहण माध्यम टेप और डिस्क (Tap and Disk Storage): संग्रहण-माध्यम के रूप में पंचकार्ड के अलावा चुम्बकीय टेप और डिस्कों का प्रयोग द्वितीय पीढ़ी में प्रारंभ हुआ।

प्राथमिक-मेग्नेटिक कोर (Magnetic-Core Memory):

प्रथम पीढ़ी में प्रयुक्त मेग्नेटिक ड्रम मेमोरी के स्थान पर अब मेग्नेटिक कोर मेमोरी का प्रयोग हुआ।

द्वितीय पीढ़ी में सॉफ्टवेयर (Softwares in Second Generation):

प्रथम पीढ़ी में विकसित मशीनी और असेम्बली भाषा की जटिलता से बचने के लिए सरल कंप्यूटर-भाषा अर्थात् उच्चस्तरीय भाषा (High Level Computer language) का विकास द्वितीय पीढ़ी में हुआ।
उदाहरणार्थ- फोरट्रान (FORTRAN- Formula Translation), कोबोल (COBOL- Common Business Oriented Language) आदि भाषाएँ विकसित हुई।

वेक्युम ट्यूब्स की जगह ट्रांजिस्टरों के उपयोग कंप्यूटर आकार में छोटे तथा सस्ते हो गए। बेहतर तकनीकी से इनकी गति तथा कार्यक्षमता भी बढ़ गई।

विशेष- सभी कंप्यूटर जो ट्रांजिस्टरों से बने थे, द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर माने जाते हैं। •

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर के नवीन उपयोग (use in Second Generation’s Computers)

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर के विकास के बाद इसका प्रयोग अधिक होने लगा। सन् 1962 में अमेरिकन कंपनी आई.बी.एम. एवं अमेरिकन एयरलाइन्स ने कंप्यूटरीकृत वायुयान यात्री आरक्षण प्रणाली प्रारंभ की। इससे कंप्यूटर का उपयोग अधिक लोकप्रिय होने लगा।

इसके अलावा अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रहों को स्थापित करने में भी कंप्यूटर का इस्तेमाल प्रारंभ हुआ। टेलस्टार संचार उपग्रह को पहली बार कंप्यूटरीकृत प्रणाली से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया।

इसके साथ ही प्रबन्धन से संबंधित जटिल प्रक्रियाओं को कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से सरलता से किये जाने हेतु एम आई एस का विकास हुआ।

कंप्यूटरीकृत एम.आई.एस. के उपयोग से प्रबन्धकीय कार्य योजनाओं एवं संचालन को नई दिशा मिली तथा अब प्रबंधन कार्य अधिक सरलता, शीघ्रता एंव अधिक सही ढंग से संपन्न होने लगा, फलस्वरूप व्यवसाय का व्यापक विकास हुआ।


कंप्यूटर की तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer In Hindi)1965-70

इलेक्ट्रोनिक्स तकनीकी के क्षेत्र में विकास के साथ एक छोटी सी अर्धचालक (सिलिकॉन ) की चिप (लगभग 3 मिमी का पतला सा छोटा टुकड़ा जैसे मोबाइल में सिम पर चमकीले परिपथ) बनाना सम्भव हो गया।
जिसमें सैकड़ो ट्रांजिस्टर (के ट्रेक) एक साथ होते हैं । इस नई तकनीकी को एकीकृत परिपथ या इन्टीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit या संक्षेप में IC) कहा जाता है।

तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटरों के आन्तरिक परिपथ में मुख्य इलेक्ट्रॉनिक तार्किक भाग के रूप में IC (Integrated Circuit ) लगाया जाता था, जिसे सन् 1958 में जैक किल्ली द्वारा जर्मेनियम चिप का प्रयोग कर विकसित किया गया।
इस हेतु किल्बी को वर्ष 2000 का फिजिक्स का नोबल पुरस्कार दिया गया।
किल्बी के आविष्कार के कुछ माह बाद ही रॉबर्ट नोयस ने सिलीकॉन चिप से और अधिक उन्नत IC का निर्माण किया। IC को अर्धचालक पदार्थ के धात्विक ऑक्साइड (Metal Oxide Semiconductor) का प्रयोग कर बनाया गया था।

IC के उपयोग से कंप्यूटर की कार्यकुशलता बढ़ने के साथ-साथ ये आकार में पहले से बहुत छोटे एवं सस्ते भी हो गए। कम कीमत होने से इनकी व्यापारिक उपयोगिता बढ़ गई ।
इस तरह कंप्यूटर उद्योग में IC आने से एक क्रांति आ गई । इस पीढ़ी के कंप्यूटरों के साथ ही डाटा को भंडारित करने के बाहरी डिवाइसेज जैसे डिस्क, टेप आदि का भी विकास हुआ।
विशेष- सभी कंप्यूटर जो इन्टीग्रेटेड सर्किट (I.C.) से बने थे, तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर माने जाते हैं।

तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रयुक्त अवयव (Elements used in Third Generation’s Computers):

ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोगः- कंप्यूटर की सभी क्रियाओं को नियन्त्रित करने के लिए नियन्त्रण प्रोग्रामों का समूह ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ बनाया गया। इस ऑपरेटिंग सिस्टम से कंप्यूटर के सभी आन्तरिक कार्य स्वचालित हो गये।

उच्चस्तरीय भाषाओं का विकास (Development of High Level Languages):- तृतीय पीढ़ी में नई उच्चस्तरीय कंप्यूटर भाषाओं का विकास हुआ। महत्त्वपूर्ण उच्चस्तरीय भाषा- BASIC (Beginners All Purpose Symbolic Instruction Code) का विकास हुआ जो सीखने में सरल थी।

प्रथम मिनी कंप्यूटर (Rise of Mini Computer):- कंप्यूटर के आकार को छोटा किया गया और इसे मिनी कंप्यूटर का नाम दिया गया। DEC (Digital Equipment Corporation) नामक कम्पनी ने सबसे पहला मिनी कंप्यूटर PDP-8 बनाया जो एक रेफ्रिजरेटर के आकार का था।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयरों का विकास (Development of Application Softwares):- वर्ड प्रोसेसिंग जैसे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयरों का विकास इस पीढ़ी में हुआ। कंप्यूटर में लिपि (Text) को टंकित या टाइप करके दस्तावेज तैयार करना, वर्ड प्रोसेसिंग कहलाता है। इसकी शुरुआत तब हुई जबकि IBM ने सन् 1964 में एक मशीन- MT/ST (Magnetic Tape Selecting Typewriter) का विकास किया।


कंप्यूटर की चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation of Computer In Hindi) (1975-1995)

इस खंड में हम कंप्यूटर की चौथी / चतुर्थ पीढ़ी का अध्ययन करेंगे। Fourth Generation of Computer In Hindi का समय 1975 से 1995 तक रहा। जिसमे विभिन कंप्यूटर के विकाश किये गए चलिए जानते हैं उन्हें :-

प्रारम्भ में एक एकीकृत परिपथ (IC) चिप पर लगभग 10-20 ट्रांजिस्टर ही एकीकृत होते थे। इस तकनीकी को लघु परास एकीकृत परिपथ (Small Scale Integrated Circuit या SSI) के नाम से जाना जाता था।
इसके बाद तकनीकी के विकास के फलस्वरुप यह सम्भव हो पाया कि सिलिकॉन की एक छोटी सी चिर्प पर लगभग 100 ट्रांजिस्टर आ सकते थे।

इस तकनीकी को मध्यम परास एकीकृत परिपथ (Medium Scale Integrated Circuits या MSI) के नाम से जाना गया।
पुनः तकनीकी प्रगति से सिलीकॉन की एक छोटी सी चिप पर हजारों (तीस हजार से अधिक) ट्रांजिस्टरों के
परिपथों को एकीकृत कर एक साथ बनाना सम्भव हो गया।
इस तकनीकी को दीर्घ-परास एकीकृत परिपथ (Large Scale Integrated Circuit या LSI) के नाम से जाना जाता है।
वृहद् स्तर के परिपथ को छोटे से चिप पर तैयार किया जाये तो ऐसे चिप को लार्ज स्केल आई.सी. (LSIC) कहते हैं।
अब एक इंच के चौथाई भाग में लगभग 30000 तक ट्रांजिस्टरों के बराबर का परिपथ बनाना संभव हो गया था।

मार्शल हॉफ ने इंटेल कॉर्पोरेशन में कंप्यूटर के सम्पूर्ण सी.पी.यू. (CPU) का परिपथ एक छोटे-से चिप पर तैयार किया।
सन् 1970 में तैयार किये गये इस चिप का नाम Intel4004′ था। इस छोटे-से चिप को माइक्रोप्रोसेसर कहा गया।

यह सबसे पहला माइक्रोप्रोसेसर था। माइक्रोप्रोसेसर युक्त कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर कहा जाने लगा। LSI के विकास के साथ ही बेहतर कंप्यूटर के निर्माण की होड़ लगी व इनके निर्माण में काफी उन्नति हुई । इन मशीनों को विद्युत की आवश्यकता बहुत कम होती है। आकार में छोटे, उच्च गुणवत्तापूर्ण, कम कीमत वाले, कम शक्ति निवेश वाले उन्नत कंप्यूटर का निर्माण होने लगा।

विशेष- सभी सन् 1975 में माइक्रो इंस्ट्रूमेंटेशन टेलीमेट्री सिस्टम्स (MITS) कम्पनी ने सबसे पहला पर्सनल कंप्यूटर ‘Altair 8800’ तैयार किया। इस माइक्रोकंप्यूटर में 8-बिट का Intel 8080 माइक्रोप्रोसेसर लगा हुआ था। इस पीढ़ी में इंटेल कम्पनी के पेंटियम प्रोसेसरों का प्रयोग हुआ जो आज भी सभी कंप्यूटरों में प्रयुक्त हो रहा है।

मिट्स (MITS) कम्पनी ने 1975 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र बिल गेट्स को अपने माइक्रो कंप्यूटर में बेसिक भाषा को स्थापित (Install) करने का अनुबन्ध दिया। बिल गेट्स का यह प्रयास सफल रहा। इसके बाद बिल गेट्स ने नवंम्बर 1975 में पॉल एलेन के साथ मिलकर अपनी कम्पनी माइक्रोसोफ्ट की स्थापना की जो वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी है। इसके बाद सन् 1981 में 1BM कम्पनी ने माइक्रो कम्प्यूटिंग बाजार में आई.बी.एम. पर्सनल कंप्यूटर (IBM PC) के साथ प्रवेश किया।

चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रयुक्त अवयव (Elements used in Fourth Generation’s Computers):

कंप्यूटर परिपथ को सेमीकंडक्टर चिप VLSIC में सीमित करना :- इस पीढ़ी में कंप्यूटर के इलेक्ट्रॉनिक परिपथ को कम से कम जगह में तैयार करने का प्रयास किया गया। इसके लिए छोटे से छोटे, गति में तेज और सस्ते आई.सी. (IC) तैयार किये गये। उपकार एल.एस.आई.सी. (LSIC- Large Scale Integrated Cirucit) और वी:एल.एस.आई.सी. (ILS.C- Very Large Scale Integrated Circuit) चिप की अवधारणा विकसित हुई। अब एक ही सिलीकॉन पदार्थ से बनी चिप, जो उँगली के नाखून के आकार के बराबर होती है, पर लाखों परिपथ होते थे।

सेमी कंडक्टर आन्तरिक मेमोरी (Semiconductor Internal Memory) :- चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर्स में पूर्व की पीढ़ी में प्रयुक्त कोर मेमोरी के स्थान पर अब अर्धचालक या सेमीकंडक्टर पदार्थ की मेमोरी का प्रयोग होने लगा।
यह नई मेमोरी गति में तेज, आकार में छोटी और सस्ती थी।

सॉफ्टवेयर में सुधार (Further Improvements in Software):- अब कंप्यूटर के बढ़ते चलन से कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले कार्यों में वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर बनाये जाने लगे।
स्प्रेडशीट, एप्लीकेशन जनित, डाटाबेस का कार्य करने वाले सॉफ्टवेयर तैयार हुए।
इनमें कार्य करना BASIC, FORTRAN, COBOL आदि तृतीय पीढ़ी की कंप्यूटर-भाषाओं में कार्य करने से सरल था।


कंप्यूटर की पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation of Computer in Hindi) (1995-..)

वर्तमान में कंप्यूटर्स की पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation of Computer in Hindi) चल रही है।
इसमें अल्ट्रा लार्ज स्केल IC (ULSIC) का प्रयोग प्रारंभ हुआ।
इनमें वैज्ञानिक और अधिक तर्कशक्ति व सोचने समझने की क्षमता विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।
वे प्रयास कर रहे हैं कि ऐसे कंप्यूटर का निर्माण हो सके जिसमें उच्च तकनीकी क्षमता के साथ-साथ
तर्कशक्ति (Logic तथा Reasoning) व निर्णय लेने की क्षमता भी हो,
जिसमें सोचने-समझने की क्षमता व स्वयं की बुद्धिमानी (Artificial Intelligence) तथा संवेग (Emotions) भी हों।
वास्तव में इस कल्पना को वैज्ञानिक साकार करने में लगे है।

हाल ही में भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी बनी रजनीकान्त की फिल्म ‘रोबोट’ में
ऐसी ही कल्पना को साकार कर दिखाने की कोशिश की गई है।
अब वैज्ञानिक ऐसा प्रयास कर रहे हैं ताकि कंप्यूटर्स को सभी क्षेत्रों में कार्य करने योग्य बनाया,
जा सके एवं कार्यों के संचालन में मानवीय प्रयोग कम से कम हो।

इस पीढ़ी के प्रारम्भ में कंप्यूटरों को परस्पर जोड़कर सूचना के आदान-प्रदान का एक
जाल (Network) बनाने का चलन प्रारम्भ हुआ।
कंप्यूटर के आन्तरिक इलेक्ट्रॉनिक परिपथ में VLSIC (Very Large Scale Integrated in चिप को
उन्नत करके ULSIC (Ultra large Scale Integrated Circuit) बनाये गये,
जिससे माइक्रो कंप्यूटर का आकार दिनो-दिन छोटा होता जा रहा है।
आज घड़ी के आकार का कंप्यूटर भी हम देख सकते हैं।
अभी तक के कंप्यूटरों का मुख्य ध्येय डाटा प्रोसेसिंग रहा है परन्तु अब पाँचवीं पीढ़ी के नये
कंप्यूटरों का जोर ज्ञान प्रोसेसिंग (Knowledge Processing) पर होगा।

पाँचवीं पीढ़ी के गुण (Attributes of Fifth Generation) :-

कंप्यूटरों के विभिन्न आकार (Different sizes or Computers) :- आवश्यकतानुसार कंप्यूटर के आकार अ संरचना को तैयार किया जाता है।
आज विभिन्न मॉडलों- डेस्क टॉप, लैप टॉप, पाम टॉप आदि में कंप्यूटर उपलब्ध हैं

इन्टरनेट (Internet):- यह कंप्यूटर का एक अंतर्राष्ट्रीय संजाल है। दुनियाभर के कंप्यूटर नेटवर्क इंटरनेट से जु होते हैं और इस तरह हम कहीं से भी, घर बैठे- अपने स्वास्थ्य, चिकित्सा, विज्ञान, कला एवं संस्कृति आदि लगभग सभी विषयों पर विविध सामग्री इंटरनेट पर प्राप्त कर सकते हैं।

मल्टीमीडिया (Multimedia) :- ध्वनि (Sound), दृश्य (Graphics) या चित्र और पाठ (Text) के सम्मिलित रूप मल्टीमीडिया का इस पीढ़ी में विकास हुआ है।

नये अनुप्रयोग (New Applications):- कंप्यूटर की तकनीक अतिविकसित होने के कारण इसके अनुप्रयोगों । वृद्धि हुई है; जैसे- फिल्म-निर्माण, यातायात-नियन्त्रण, उद्योग, व्यापार एवं शोध, रोबोटिक्स, गेम्स आदि के क्षेत्र में कंप्यूटर का प्रयोग अत्यधिक होने लगा है।

कृत्रिम बुद्धिमानी (Artificial Intelligence):- आज कंप्यूटर मशीनें बोले गए शब्दों और साधारण वाक्यों को समझ लगे हैं। चित्रों और विशेष संकेतों के विश्लेषण कर सकने वाले कंप्यूटरों का भी विकास हो गया है।
कृत्रिम बुद्धिमत (Artificial Intelligence) के विकास ने इस क्षेत्र में काफी प्रगति कर ली है।
सैद्धान्तिक रुप से, AI (Artificial Intelligence) का उद्देश्य ऐसे कंप्यूटर बनाने से है जिनसे मनुष्य उसी तरह काम ले सके जैसा कि वह दूसरे आदमियों से लेता है।
इसी आधार पर अब ऐसे वैद्युत यांत्रिक रोबोट (Electro – Mechanical Robot) बना लिए गए हैं जो अत्यधिक कठिन कार्य कर लेते हैं। जापान में मोटर-कार उद्योग में ऐसे रोबोट काम कर रहे हैं।

अभी तक कंप्यूटर को मानव का मूर्ख सेवक माना जाता रहा है जिसकी अपनी कोई बुद्धिमानी नहीं है।
परन्तु अब इसे कुछ निश्चित परिस्थितियों में स्वयं अपने निर्णय लेने में सक्षम बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इसके विकास में यह सोच है कि अनेक प्रक्रियाओं में कंप्यूटर स्वयं निर्णय ले सकेगा।
जैसे युद्ध क्षेत्रों में, शतरंज जैसे खेलों आदि में होता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि निकट भविष्य AI कल्पना और वास्तविकता के अन्तर को सीमित कर देगा।

कंप्यूटर से सम्बंधित अन्य लेख

✔️⚫ कंप्यूटर क्या है? परिभाषा, प्रकार, उपयोग, What is Computer In Hindi (Kya Hain)
✔️⚫ कंप्यूटर के प्रकार क्या है? Types Of Computer in Hindi (Classification) Prakar

✔️⚫ सॉफ्टवेयर क्या है? होता है? प्रकार, What is Software In Hindi – Kya Hai
✔️⚫
 कंप्यूटर की विशेषता क्या है Characteristics of Computer in Hindi


कंप्यूटर की पीढ़ियां FaQ

Q.1. कंप्यूटर के इतिहास को कितने भागों में बांटा गया है?

उतर :- 5

Q.2. कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी कब से कब तक है?

उतर :- 1942-55

Q.3. कंप्यूटर को कितनी पीढ़ियों में बांटा गया है?

उतर :- पांच

Q.4. वर्तमान में कंप्यूटर का कौन सा जनरेशन चल रहा है?

उतर :- पांचवी पीढ़ी

Q.5. पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर कौन सा है?

उतर :- टेबलेट लैपटॉप

Q.6. कंप्यूटर में कितनी जनरेशन होती है?

उतर :- 5

Q.7. कंप्यूटर तकनीक में पीढ़ी का क्या अर्थ है?

उतर :- कंप्यूटर पीढ़ी का अर्थ है कंप्यूटर विकास के सत्मभ है।