ऊष्मा किसे कहते हैं? गुप्त ऊष्मा, परिभाषा, प्रकार, सूत्र, मात्रक

नमस्कार आज हम भौतिक विज्ञानं के महत्वपूर्ण अध्याय में से एक ऊष्मा (Heat) के विषय में अध्ययन करेंगे तथा साथ ही जानेंगे की ऊष्मा किसे कहते हैं?, गुप्त ऊष्मा क्या हैं? ऊष्मा की परिभाषा, ऊष्मा के प्रकार, ऊष्मा का सूत्र एवं मात्रक इत्यादि के विषय में खुल के अध्ययन करेंगे।

ऊष्मा किसे कहते हैं?

यह एक प्रकार की ऊर्जा ही है जो वस्तु के ठण्डे या गर्म होने के बारे में बताती है।

  • यदि किसी वस्तु को ऊष्मा दी जाती है तो सामान्यतया इसके तापमान में वृद्धि होती है तथा वस्तु से ऊष्मा निकाल दी जाए तो इसके तापमान में कमी आती है, केवल अवस्था परिवर्तन को छोड़कर।
  • वस्तु का गर्म या ठण्डा होना ऊष्मा की मात्रा को बताता है परंतु वस्तु कितनी गर्म है या कितनी ठण्डी है यह केवल तापमान से ही पता चलता है।
  • ऊष्मा का प्रवाह हमेशा अधिक तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर तब तक होता रहता है जब तक कि दोनों के तापमान समान न हो जाए अर्थात् ऐसी अवस्था ‘तापीय साम्यावस्था’ कहलाती है।

ताप की अवधारणा:-

  • कोई वस्तु कितनी गर्म है अथवा कितनी ठण्डी है यह वस्तु के तापमान से ज्ञात होता है।
  • ताप एक अदिश राशि है।
  • इसकी विमा होती है।
  • इसका मात्रक केल्विन, डिग्री सेल्सियस, फॉरेन्हाइट, रयूमर होता है।
पैमानाइस पैमाने पर जल का हिमांकइस पैमाने पर जल का क्वथनांकअंतर
डिग्री सेल्सियस0oC100oC100
केल्विन273.15 K373.15 K100
फारेनहाइट32oF212oF180
रियूमर0oR80oR80
रेन्काईन491.67oRa671.62oRa180
ऊष्मा किसे कहते हैं? गुप्त ऊष्मा, परिभाषा, प्रकार, सूत्र, मात्रक

(0K) तापमान को परम शून्य ताप कहते हैं जो कि प्रायोगिक रूप से संभव नहीं है।

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ऊष्मा निम्न कारकों पर निर्भर करती है:-

1. द्रव्यमान:-
– किसी पदार्थ को दी गई ऊर्जा, पदार्थ के द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
– यदि पदार्थ का द्रव्यमान अधिक होता है तो उसे अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
– यदि पदार्थ का द्रव्यमान कम होता है तो उसे कम ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
जैसे- 1 किग्रा. जल को गर्म करने के लिए दी गई ऊष्मा, 12 किग्रा. जल को दी गई ऊष्मा से अधिक होती है।

2. तापान्तर:-
– किसी पदार्थ के तापमान को बढ़ाना अथवा घटाना, ऊष्मा पर निर्भर करता है।
– यदि किसी पदार्थ का तापमान बढ़ाना है तो उसे अधिक ऊष्मा प्रदान करनी पड़ेगी तथा किसी पदार्थ का तापमान घटाना है तो उसे कम ऊष्मा देनी पड़ेगी।

3. पदार्थ की प्रकृति:-
– किसी पदार्थ को दी गई ऊष्मा, पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है। उदाहरण- जैसे m द्रव्यमान वाले जल को Q ऊष्मा देने पर उसके तापमान में वृद्धि कम होती है, इसी प्रकार m द्रव्यमान वाले दूध को Q ऊष्मा देने पर उसके तापमान में वृद्धि अधिक होगी।
– किसी पदार्थ को दी गई ऊष्मा  ΔQ = m×s×d 
यहाँ m पदार्थ का द्रव्यमान है।
d तापान्तर है।
s यहाँ विशिष्ट ऊष्मा है।
– 1 ग्राम जल का तापमान 1oC बढ़ाने के लिए दी गई ऊष्मा 1 कैलोरी ऊष्मा कहलाती है।

ऊष्मा का मात्रक:-

जूल, कैलोरी तथा अर्ग ऊष्मा के मात्रक होते हैं।
1 कैलोरी = 4.2 जूल
1 जूल = 14.2  कैलोरी
1 जूल = 107 अर्ग
1 BTU (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) = 252 कैलोरी

विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat)

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 जल की विशिष्ट ऊष्मा

जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है।
जल जितनी देर से गर्म होता है पुन: ठण्डा भी उतनी ही देर से होता है।
एक ग्राम जल को गर्म करने के लिए 1 कैलोरी ऊष्मा की आवश्यकता होती है उसी प्रकार एक लीटर जल को गर्म करने के लिए 1000 कैलोरी अथवा 4,200 जूल की आवश्यकता होती है।

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विशिष्ट ऊष्मा तापान्तर के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
जल की विशिष्ट ऊष्मा के कारण ही इसका उपयोग रेडियेटर तथा रबर की गर्म पानी की बोतल में किया जाता है।
बर्फ की विशिष्ट ऊष्मा 0.5 कैलोरी/ग्राम × डिग्री सेन्टीग्रेड होती है।
वाष्प की विशिष्ट ऊष्मा 0.47 कैलोरी/ग्राम × डिग्री सेन्टीग्रेड होती है।

गुप्त ऊष्मा:-

अवस्था परिवर्तन (ठोस से द्रव एवं द्रव से गैस) के समय पदार्थ को दी गई ऊष्मा इसके तापमान में तो परिवर्तन नहीं करती लेकिन यह ऊष्मा अवस्था परिवर्तन में खर्च हो जाती है, इसे ही गुप्त ऊष्मा कहते हैं।

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गलन की गुप्त ऊष्मा
0 डिग्री सेन्टीग्रेड की 1 ग्राम बर्फ की तुलना में 0 डिग्री सेन्टीग्रेड पर स्थित 1 ग्राम जल कम ठण्डा होता है क्योंकि जल में गलन की गुप्त ऊष्मा के रूप में 80 कैलोरी/ग्राम ऊर्जा अधिक होती है इसी अतिरिक्त ऊष्मा के कारण जल कम ठण्डा रहता है।

वाष्पन की गुप्त ऊष्मा
100 डिग्री सेन्टीग्रेड के जल की तुलना में 100 डिग्री सेन्टीग्रेड की वाष्प से जलना ज्यादा हानिकारक होता है क्योंकि वाष्प में गुप्त ऊष्मा के रूप में 536 कैलोरी/ग्राम ऊर्जा ज्यादा पाई जाती है।

गुप्त ऊष्मा:-

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– इसकी विमा L2T-2 होती है।

मिश्रण का तापमान

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ऊष्मीय प्रसार

जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है तो पदार्थ के परमाणु ऊष्मा अवशोषित कर कम्पन्न करने लगते हैं, जिससे दो परमाणुओं के बीच की अंतर-परमाण्विक दूरी बढ़ने लगती है, जिससे पदार्थ के आयतन में भी वृद्धि होती है इसे ही ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion) कहते हैं।
उदाहरण-
– रेल की पटरियाँ बिछाते समय उनके बीच कुछ जगह रखी जाती है।
– बिजली के पोल पर तार बाँधते समय उन्हें कुछ ढीला रखा जाता है।
– काँच के पात्र में अत्यधिक गर्म द्रव को डालने पर काँच टूट जाता है।
– ठोसों में रेखीय प्रसार (Linear Expansion), क्षेत्रीय प्रसार (Area Expansion) तथा आयतन प्रसार (Volume Expansion) तीनों देखे जाते हैं जबकि द्रवों व गैसों में केवल आयतन प्रसार होता है।

ठोसों में ऊष्मीय प्रसार:- 

1. रेखीय प्रसार:-

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रेखीय प्रसार गुणांक:-
– 1 मीटर लंबे तार का तापमान 1 डिग्री सेन्टीग्रेड बढ़ाने पर तार की लम्बाई में होने वाला परिवर्तन तार का रेखीय प्रसार गुणांक कहलाता है।
– इसका मात्रक 10C या 1k होता है।

2. क्षेत्रीय प्रसार:-
– यह द्विवीमीय प्रसार है।
– इकाई क्षेत्रफल या 1 मीटर2 क्षेत्रफल वाली प्लेट का तापमान 1 डिग्री सेन्टीग्रेड बढ़ाने पर प्लेट के क्षेत्रफल में वृद्धि क्षेत्रीय प्रसार गुणांक के बराबर होती है।
– इसका मात्रक 10C या 1k होता है।

ऊष्मा किसे कहते हैं? गुप्त ऊष्मा, परिभाषा, प्रकार, सूत्र, मात्रक

Ao = प्रारंभिक क्षेत्रफल
ΔT = ताप में परिवर्तन
A= T ताप बढ़ाने पर क्षेत्रफल

3. आयतन प्रसार:-
– यह त्रिविमीय प्रसार होता है।
– इकाई आयतन की वस्तु का तापमान 1 डिग्री सेन्टीग्रेड बढ़ाने पर वस्तु के आयतन में हुई वृद्धि वस्तु का आयतन प्रसार गुणांक कहलाती है।
– इसका मात्रक 10C या 1k होता है।

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द्रवों में ऊष्मीय प्रसार:-
– द्रवों में केवल आयतन प्रसार होता है।
– किसी द्रव को पात्र में गर्म करने पर द्रव का स्तर पहले घटता है फिर बढ़ता है।

जल का असामान्य प्रसार:-
– 0 डिग्री सेन्टीग्रेड से 4 डिग्री सेन्टीग्रेड के मध्य जल को गर्म करने पर आयतन में कमी आती है एवं घनत्व में वृद्धि होती है।
– 4 डिग्री सेन्टीग्रेड ताप के बाद जल सामान्य व्यवहार करता है जिसमें आयतन में वृद्धि एवं घनत्व में कमी हो जाती है।
– जल के इस असामान्य प्रसार के कारण ही बर्फ जल में तैरती है।

– ठण्डे प्रदेशों में झीलों की सतह पर बर्फ जम जाने के बावजूद भी अन्दर तरल अवस्था में जल होता है तथा जलीय जीव जीवित रह पाते हैं।
– गैसों में केवल आयतन प्रसार पाया जाता है।
– ठोस, द्रव एवं गैस में से सर्वाधिक प्रसार गैसों में ही होता है तथा गैसों में होने वाले प्रसार को ही वास्तविक प्रसार कहते हैं।

ऊष्मा संचरण:-
– माध्यम में या माध्यम की अनुपस्थिति में ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रवाह, ऊष्मा संचरण कहलाता है।
– यह तीन विधियों से होता है-

1. चालन:-
– इस विधि में माध्यम के कण गति किए बिना ही ऊष्मा का स्थानांतरण करते हैं।
– ठोसों में केवल चालन के द्वारा ही ऊष्मा स्थानांतरण होता है।
– चालन ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में संभव होता हैं।
– मर्करी में ऊष्मा स्थानांतरण चालन के द्वारा होता है।
– चालन के दौरान माध्यम का तापमान भी बढ़ जाता है।
– द्रव एवं गैस में भी चालन संभव हैं यदि इसमें ऊष्मा संचरण ऊपर से नीचे की तरफ हो।

ऊष्मीय चालकता गुणांक (K):-
– यह पदार्थ की ऊष्मीय चालन क्षमता का मापन करता है।
– वे पदार्थ जिनसे ऊष्मा का चालन शीघ्रता से होता है, ऊष्मा के चालक (Thermal Conductor) कहलाते हैं। इसके लिए ऊष्मीय चालकता गुणांक का मान बहुत ज्यादा होता है। उदाहरण- चाँदी, पीतल, धातुएँ, जल आदि।

– वे पदार्थ जिनसे ऊष्मा का प्रवाह बहुत कम होता है, ऊष्मा के कुचालक (Bad Conductor) कहलाते हैं। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाए जाते तथा ऊष्मीय चालकता गुणांक का मान भी कम होता है। उदाहरण- काँच, वायु, बर्फ तथा अधातुएँ। (अच्छे कुचालकों के लिए K का मान शून्य होता है।)
– एस्बेस्टॉस तथा एबोनाइट ऐसे पदार्थ है जिनसे ऊष्मा का प्रवाह बिल्कुल भी नहीं होता है, ये ऊष्मारोधी कहलाते हैं।
– मानव शरीर ऊष्मा का दुर्बल चालक होता है।
ऊष्मीय चालकता के कुछ क्रम:-
Kठोस > Kद्रव > Kगैस
Kचाँदी > Kताँबा > Kएल्युमिनियम
Kधातु > Kअधातु

संवहन (Convection)

– संवहन द्रव एवं गैसों में होता है।
– गर्म द्रव या गैसें हल्के होने के कारण ऊपर की ओर गति करते हैं अर्थात् इस विधि में माध्यम के कण स्वयं गति करते हैं।
– संवहन में माध्यम के कणों की गति के लिए गुरुत्वीय प्रभाव भी सहायक होता है। अंतरिक्ष या मुक्त रूप से गिरती हुई लिफ्ट में संवहन नहीं हो पाता।
– उदाहरण- पवनों की गति, पात्र में जल का गर्म होना, रोशनदान या वेंटिलेटर का कमरे की दीवारों में ऊपर की ओर बनाया जाना।

विकिरण

– विकिरण के द्वारा माध्यम तथा माध्यम की अनुपस्थिति दोनों में ऊष्मीय स्थानांतरण संभव है।
– ऊष्मीय विकिरणों के गुण प्रकाश जैसे ही होते हैं। उदाहरण- सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का स्थानांतरण विकिरण के रूप में, माइक्रोवेव ओवन में भोजन का गर्म होना।
– ये ऊष्मीय विकिरण प्रकाश के समान ही परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, ध्रुवण आदि गुण दर्शाते हैं।
– साधारण काँच के प्रिज्म से वर्ण विक्षेपण नहीं दर्शाते हैं उस स्थिति में रॉकसाल्ट या क्वार्ट्ज का प्रयोग किया जाता है।

अवस्था परिवर्तन

 – ऊष्मा अवशोषित कर या उत्सर्जित करके पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है।
– ठोस पदार्थ के अणुओं में गतिज ऊर्जा न्यूनतम जबकि गैस के अणुओं में गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
– पदार्थ जब ऊष्मा अवशोषित करता है तो इसके अणु गतिशील होने लगते हैं।

गलन एवं हिमन (Melting and Freezing)

– जब पदार्थ की ठोस अवस्था द्रव अवस्था में रूपांतरित होती है तो उसे गलन कहते हैं तथा जिस निश्चित तापमान पर गलन की क्रिया होती है, गलनांक बिन्दु कहलाता है।
– जब पदार्थ की द्रव अवस्था कुछ ऊष्मा उत्सर्जित कर ठोस अवस्था में परिवर्तित होती है इसे हिमन कहते हैं।
– जिस तापमान पर हिमन क्रिया होती है, उसे हिमांक बिन्दु कहते हैं।

– पदार्थों के लिए सामान्यतया हिमांक एवं गलनांक बिन्दु एक समान ही होते हैं जैसे बर्फ का गलनांक बिन्दु 0 डिग्री सेन्टीग्रेड है।
– ऐसे ठोस पदार्थ जो द्रव में बदलने पर आयतन में प्रसार दर्शाते हैं उनका गलनांक दाब बढ़ाने पर बढ़ जाता है। उदाहरण- मोम।
– ऐसे ठोस जो द्रव में बदलने पर आयतन में कमी दर्शाते हैं इनका गलनांक (Melting point) दाब बढ़ाने पर कम हो जाता है जैसे बर्फ अर्थात् बाह्य दाब बढ़ाने पर बर्फ का गलनांक घट जाएगा व बर्फ आसानी से पिघलने लगती है।

क्वथन एवं संघनन (Boiling and Condensation)

– जब पदार्थ की द्रव अवस्था गैस में बदलने लगती है तो इसे क्वथन कहते हैं तथा जिस निश्चित तापमान पर यह क्रिया होती है, उसे क्वथनांक बिन्दु कहते हैं।
– जब पदार्थ की गैसीय अवस्था द्रव अवस्था में परिवर्तित होती है, उसे संघनन कहते हैं तथा जिस तापमान पर गैस पुन: द्रव में बदलती है, उसे द्रवांक या द्रवणांक बिन्दु कहते हैं। उदाहरण- गर्म संतृप्त वायु ठण्डी होने पर संघनन के द्वारा बादल बनती है।
– बाह्य दाब बढ़ाने पर क्वथनांक बढ़ जाता है। उदाहरण- प्रेशर कूकर।

वाष्पीकरण (Vapourisation)

– जब क्वथनांक बिन्दु से कम तापमान पर द्रव गर्म होकर गैस में बदलने लगे तो इसे वाष्पीकरण कहते हैं।
– दो वस्तुओं या किसी वस्तु व वातावरण के तापमानों में अंतर होने पर ऊष्मा का प्रवाह गर्म वस्तु से ठण्डी वस्तु की ओर तब तक होता रहता है जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापमान समान न हो जाए इसे ही तापीय साम्यावस्था कहा जाता है।

किरचॉफ का नियम

वह वस्तु जो ऊष्मा की अच्छी अवशोषक होती है वह ऊष्मा की अच्छी उत्सर्जक भी होती है। उदाहरण- भैंस को गर्मी में ज्यादा गर्मी लगती है एवं सर्दी में ज्यादा ठण्ड लगती है।
रोटी बनाने के लिए तवे काले बनाए जाते हैं।
सूर्य के स्पेक्ट्रम में फ्रॉनहॉफर रेखाएँ।

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महत्वपूर्ण प्रश्न

ऊष्मा क्या है परिभाषा दीजिए?

किसी पदार्थ के गर्म या ठंडे होने के कारण उसमें जो ऊर्जा होती है उसे उसकी ऊष्मीय ऊर्जा कहते हैं। 

ऊष्मा इकाई कौन सी है?

ऊष्मा की SI इकाई जूल है।

ऊष्मा का सूत्र क्या होता है?

गुप्त ऊष्मा का सूत्र L = Q/M

नमस्ते- मेरा नाम कुलदीप सिंह चारण है। मैं ऑटोमोबाइल जगत का शौकीन लेखक हूं। ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में काम करने का शौक रखते हुए, मैंने अपना करियर उन खबरों को कवर करने और लेखों के माध्यम से दुनिया भर के दर्शकों तक अपनी राय पहुंचाने के लिए समर्पित किया है। मैं अपने दर्शकों तक ऑटोमोबाइल की दुनिया से नवीनतम समाचार और विशेष जानकारी लाने के लिए अथक प्रयास करता हूं। और अब से मैं AarambhTV.com में काम कर रहा हूं।

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