मानव पाचन तंत्र, नामांकित चित्र, परिभाषा, कार्य

नमस्कार पाठको आज हम इस लेख में मानव पाचन तंत्र (human digestive system) के विषय में पढ़ेंगे।
इस लेख में मानव पाचन तंत्र से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी जैसी पाचन किसे कहते हैं? मानव पाचन तंत्र की परिभाषा एवं मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र इत्यादि विषयो को इस लेख में कवर किया गया हैं। छात्रों की सहूलियत के लिए मानव पाचन तंत्र भागों और कार्यों का सचित्र वर्णन किया गया हैं।

मानव पाचन तंत्र के कार्यो एवं क्रियाविधि को समझने के लिए निचे दिए गए चार्ट को ध्यान पूर्वक अवलोकन करे।

मानव पाचन तंत्र, नामांकित चित्र, परिभाषा, कार्य

मानव पाचन तंत्र की परिभाषा ?

पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

पाचन किसे कहते हैं ?

पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

भोजन का पाचन कैसे होता हैं ?

भोजन का पाचन 2 प्रकार से होता हैं, जो निम्न है-

यांत्रिक पाचन/Mechanical digestion- इसमें भोज्य पदार्थों को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, भोजन को चबाना, पिसना इसी में शामिल है। (मुख गुहा एवं आमाशय में)

रासायनिक पाचन/Chemical digestion- इसमें जटिल भोज्य पदार्थों को पाचक रसों एवं एन्जाइम्स की सहायता से सरल भोज्य पदार्थों में परिवर्तित किया जाता है।

मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र

निचे दिए गए मानव पाचन तंत्र का चित्र है जिसकी सहयता से आप आसानी से manav pachan tantra के बारे में जान सकते हैं।

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मानव पाचन तंत्र का चित्र

मनुष्य की आहारनाल अर्थात मानव के पाचन तंत्र में मुख गुहा से गुदा/Anus तक कई संरचनाऐं पाई जाती हैं, जो कि क्रमानुसार इस प्रकार है-

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Manav Pachan Tantra Ke Bhag

मानव पाचन तंत्र के मुख्य भागों के नाम के साथ साथ उनकी सम्पूर्ण जानकारी भी दी गयी हैं।

1 . मुख गुहा/Oral Cavity-

  •  पाचन तंत्र में आहारनाल के प्रारंभिक भाग के रूप में मुख गुहा में 2 प्रमुख संरचनाऐं दाँत/Teeth एवं जिह्वा (Tongue) पाए जाते हैं।

(i ) दाँत –

द्विबारदंती/Diphyodont (दो बार दाँत आते हैं)

विषमदंती/Heterodont (4 अलग-अलग प्रकार के दाँत)

कोष्ठदंती/Thecodont (अस्थि में बने सॉकेट/कोष्ठ में पाए जाते हैं)

मानव दाँत:-

ये दो प्रकार के होते हैं,जो निम्न है-

1. प्राथमिक दाँत (दूध के दाँत)

2. स्थायी दाँत

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प्राथमिक दाँत/Milk teeth

(Primary teeth)

  • ये दाँत 6 वें माह से आना प्रारंभ तथा 12-14 वर्ष की उम्र तक बच्चे के मुख में पाए जाते हैं।
  • इनकी संख्या 20 होती है।
  • प्राथमिक दंत सूत्र 

I           C         Pm      m

2          1          0          2

2          1          0          2

स्थायी दाँत/Permanent Teeth

  • 5-6 वर्ष की आयु से लगभग 27 वर्ष की आयु तक पूर्ण रूप से आ जाते हैं।
  • इनकी संख्या 32 होती है।

I     C         Pm      m

2    1          2          3

2    1          2          3

(ii ) जिह्वा/Tongue:-

  • ये पेशियों से निर्मित संरचना है, जो मुख गुहा में भोजन के स्वाद का पता लगाने में, भोजन की गति में, निगलने में, बोलने तथा भोजन में लार को मिलाने के कार्य जिह्वा के द्वारा किए जाते हैं।

नोट- मानव शरीर का सबसे कठोरतम पदार्थ इनैमल होता है।

         इनैमल CaCoतथा CaPo4 का बना होता है।

2. ग्रसनी (Phanrynx) –

  • मुख गुहा के अंतिम सिरे पर भोजन पथ एवं श्वसन पथ एक दूसरे को क्रॉस करते हैं, दोनों का ये जंक्शन बिंदु ग्रसनी कहलाता है।
  • इसके ऊपरी भाग पर युवुला पाया जाता है जो कि भोजन को निगलते समय आंतरिक नासा छिद्र (Internal Nares) को बंद करता है।
  • ग्रसनी (Phanrynx) के निचले हिस्से में जहाँ श्वासनली/Trachea पाई जाती है, इसके सिरे पर एपिग्लॉटिस/कण्ठच्छद पाया जाता है, जो कि भोजन को निगलने के दौरान श्वासनली को बंद कर देता है।

3. ग्रसिका (gullet) ग्रासनली/ Oesophgus:-

  • ये ग्रसनी के अंतिम भाग से भोजन को आमाशय (Stomach) में ले जाती है। यहाँ किसी भी प्रकार का पाचन तो नहीं होता लेकिन यहाँ होने वाली क्रमाकुंचनी गतियों (Peristalsis) के कारण भोजन आगे गति करता है।

4. आमाशय (Stomach):-

 ये ‘J’ आकार का थैलेनुमा अंग है। जिसके 4 भाग होते है, जो निम्न है-

  1. फण्डस (शीर्षस्थ भाग)
  2. कार्डिया (हृदय की ओर)
  3. बॉडी (मध्य का सबसे बड़ा भाग)
  4. पाइलोरस (अंतिम संकरा भाग)
  • आमाशय (Stomach) की आंतरिक दीवारें मोटे स्तर से बनी, ताकि ये स्वयं को जठर रस (Gastric Juice)  की उच्च अम्लीयता से सुरक्षित रख पाता है।
  • अंतिम पाइलोरस पर एक वॉल्व पायलोरिक वॉल्व पाया जाता है, जो आमाशय से अर्धपचित भोजन (काईम/Chyme)  को छोटी आँत की तरफ जाने देता है।

5. छोटी आँत/Small intestine:-

  • मानव की आहार नाल का सबसे लंबा भाग (लगभग 7 मीटर) लेकिन इसकी मोटाई कम एवं अत्याधिक कुंडलित होती है।

इसके 3 भाग इस प्रकार हैं-

  1. ड्यूडीनम
  2. जेजुनम
  3. इलियम
  • इलियम के अंतिम भाग पर इलियोसीकल वॉल्व पाया जाता है, जो कि छोटी आँत में पचे हुए भोजन (Chyle/काईल) को बड़ी आँत के सीकम वाले भाग में जाने देता है।

6. बड़ी आँत/Large intestine:-

  • आहारनाल का अंतिम भाग जो मोटाई में अधिक लेकिन लंबाई कम।
  • इसे भी 3 भागों में बांटा गया है-
  1. सीकम
  2. कोलन
  3. रेक्टम
  • बड़ी आँत के प्रारंभिक भाग सीकम के पास एक अवशेषी अंग अपेन्डिक्स पाया जाता है, जो हमारे पूर्वजों में सेल्युलोज के पाचन से संबंधित था।
  • बड़ी आँत का अंतिम भाग रेक्टम/मलाशय आगे गुदा/Anus से जुड़ता है, जहाँ अपचित भोजन को मल/Stool के रूप में शरीर से बाहर त्याग दिया जाता है।

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मानव पाचन तंत्र से संबंधित पाचन ग्रंथियाँ:-

  • मानव पाचन तंत्र अर्थात आहार नाल में भोजन की पाचन क्रिया से संबंधित 2 प्रकार की ग्रंथियाँ पाई जाती हैं-
आंतरिक/internal पाचन ग्रंथियाँबाह्य/External पाचन ग्रंथियाँ
ये आहारनाल की विभिन्न संरचनाओं की दीवारों में ही पाई जाती है।जैसे- आमाशय की दीवारों में – जठर ग्रंथियाँछोअी आँत की दीवारों में – ब्रूनर्स ग्रंथियाँ, श्लेष्म ग्रंथियाँ, लिबरकुहन की दरारें आदि।ये आहारनाल से बाहर स्थित हैं, लेकिन अपने स्त्रवण/Secretion आहारनाल तक पहुँचाती हैं।जैसे- लार ग्रंथियाँ/Salivary glands, यकृत/liver, अग्नाशय (Pancreatic) 

मानव पाचन तंत्र से संबंधित ग्रंथियाँ:-

1. अग्नाशय/Pancreas:-

यह एक मिश्रित ग्रंथि/Mixed gland है।
इनके बहि:स्त्रावी भाग से (Exocirine part) अग्नाशय रस/Pancreas Juice से स्त्रावित होता है। तथा यह विरसंग नलिका से ड्यूडीनम में पहुँच कर पाचन में सहायक हैं।

अंत: स्त्रावी भाग-

अग्नाशय ग्रंथि के अंत: स्त्रावी भाग से निम्न हॉर्मोन्स स्त्रावित होते हैं।

1. ग्लूकेगॉन (यह अग्नाशय ग्रंथि की α-कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित होता है)

2. इन्सुलिन (यह अग्नाशय ग्रंथि की β-कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित होता है)

3. सोमेटोस्टेटिन (यह अग्नाशय ग्रंथि की -कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित होता है)

4. पैक्रियाटिक पॉलीपेप्टाइड हॉर्मोन्स (यह अग्नाशय ग्रंथि की P-P -कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित होता है)

– इन्सुलिन हमारे रक्त में शर्करा स्तर को घटाता है, जबकि ग्लूकैगॉन रक्त में शर्करा स्तर को बढ़ाता है। अत: एक-दूसरे के विरोधी हॉर्मोन्स हैं।

– सोमेटोस्टेटिन हॉर्मोन्स हमारी शरीरिक वृद्धि का नियंत्रण करता है।

– P-P हॉर्मोन्स/पैंक्रियाटिक पॉलीपेप्टाइड हॉर्मोन्स अग्नाशयी रस/Pancreatic Juice के स्त्रवण को कम होता है।

– इन्सुलिन की कमी से रक्त में शर्करा के स्तर में वृद्धि होती है, जिससे डायबिटीज़ मेलाइटस कहते हैं।

– डायबिटीज़ मेलाइटस के दो भाग होते हैं, जो निम्न है-

Type-I

– IDDM/Insulin-dependent diabietis mellitus

– Juvenile D.M.

– β-Cells नष्ट

– इन्सुलिन की मात्रा कम   

Type-II

– NIDDM/Non-IDDM

– वंशागति/inhentance से।

– ज्यादा वजन, अनियमित दिनचर्या।

– 45 वर्ष या अधिक उम्र होने पर।

Note- गर्भावस्था में कुछ मादाओं में डायबिटीज़ हो जाता है, जो कि गर्भावस्था पूरी होने पर ठीक भी हो जाता है।

2. यकृत/Liver-

– मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि, जो कि गुहा में दाँयी ओर स्थित होता है।

– इसका वजन 1.35-1.5 किग्रा

– महिला में यकृत का वजन नर की तुलना में कम होता है।

– ग्लिसंस कैप्सूल केवल स्तनधारियों के यकृत के चारों ओर पायी जाती है।

– हिपेटोसाईट्स कोशिकाओं से यकृत/Liver का निर्माण होता है।

– इनके अलावा कुफ्फर कोशिकाएँ भी केवल स्तनधारियों के यकृत/Liver में पाई जाती है, जो एंटीजन्स के भक्षण करने का कार्य करती हैं।

यकृत/Liver के कार्य-

– पित्त रस/ Bile Juice का निर्माण यकृत में, यहाँ से स्त्रावित हो कर पित्ताशय/Gall bladder में इसे संग्रहित किया जाता है।

विऐमीनकरण/Deamination– नाइट्रोजन युक्त अमीनो समूह (-NH2) को अमीनो अम्लों से हटाना। ताकि अब इन्हें शरीर में संग्रहित किया जा सके।

– निराविषीकरण/detoxification

– RBC निर्माण

– यकृत में β- कैरोटीन से विटामिन- A का निर्माण।

– यकृत के द्वारा ग्लायकोजेनेसिस, ग्लायकोजेनोलाइसिस एंव लाइपोजेनेसिस (वसा का निर्माण) आदि क्रियाऐं की जाती हैं।

– यकृत से हिपेरिन (प्रतिस्कन्दक/Anticoagulant) का स्त्रवण।

– यकृत में विटामिन-K की सहायता से प्रोथ्रोम्बिन का निर्माण होता है, जो कि चोट लगने पर रक्त के थक्का निर्माण/Clotting में सहायक।

– यकृत में विटामिन्स (A,D,E,K एवं B12), वसा, ग्लाइकोजन का संग्रहण।

– उत्सर्जन में सहायक/(बिलिरुबिन एवं बिलिवर्डीन का निर्माण)

– यकृत/Liver में पाई जाने वाली कुफ्फर कोशिकाओं के द्वारा एंटीजन्स का भक्षण/Phagocytosis किया जाता है।

– यकृत/Liver के नीचे पित्ताशय/Gall bladder स्थित होता हैा

– पित्ताशय में पित्त रस (Bile Juice) संग्रहित रहता है।

– इस पित्ताशय में आहारनाल से स्त्रावित कॉलीसिस्टोकाइनिन नामक हॉर्मोन्स संकुचन/Contractions प्रेरित करता है, जिससे पित्त-रस का स्त्रवण/Secretion बढ़ता हैं।

मानव पाचन तंत्र में पाचन की क्रियाविधि

हमारे सामने के प्रश्न है की मानव पाचन तंत्र में भोजन का पाचन कैसे होता है अर्थात मानव पाचन तंत्र में भोजन के पाचन की क्रिया विधि क्या है ? चलिए जानते हैं :

मानव में भोजन के पाचन को 5 चरणों में बांट सकते हैं-

  1. भोजन का अन्तर्ग्रहण (Ingestion)
  2. भोजन का पाचन(Digestion)
  3. पचित भोजन का अवशोषण(Absorption )
  4. स्वांगीकरण(Assimilation)
  5. अपचित भोजन का मल-त्याग(Defaection)

1. भोजन का अन्तर्ग्रहण :-

 मुख के द्वारा भोजन को ग्रहित कर आहारनाल के अन्य भागों में ये गति करते हुए पहुँचता है।

2. भोजन का पाचन :- 

भोजन का पाचन 2 प्रकार से होता हैं, जो निम्न है-

यांत्रिक पाचन/Mechanical digestion- इसमें भोज्य पदार्थों को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, भोजन को चबाना, पिसना इसी में शामिल है। (मुख गुहा एवं आमाशय में)

रासायनिक पाचन/Chemical digestion- इसमें जटिल भोज्य पदार्थों को पाचक रसों एवं एन्जाइम्स की सहायता से सरल भोज्य पदार्थों में परिवर्तित किया जाता है।

मुख गुहा में पाचन/(Digestion in Oral Cavity)-

मुख गुहा में दाँत/Teeth एवं जिह्वा (Tongue) की सहायता से भोजन का यांत्रिक पाचन होता है,जिसमें दाँत भोजन को चबा कर तथा जिह्वा इसमें लार मिलाकर पाचन में सहायता करती है।

– मुख गुहा में लार की सहायता से रासायनिक पाचन की क्रिया होती है।

– लार का स्त्रवण प्रतिदिन लगभग 2 लीटर तक।

– लार का PH= 6.35-6.85

– लार के संगठन में 99.9 प्रतिशत जल होता है।

– 0.1 प्रतिशत में एन्जाइम्स, लवण, म्यूसिन, बफर पदार्थ होते हैं।

– लार में पाया जाने वाला टायलिन/सलाईवरी एमाइलेज एन्जाइम्स स्टार्च का पाचन इस प्रकार करता है-

बिना पका हुआ स्टार्च – सलाईवरी एमाइलेज /टायलिन – डेक्सिट्रन

पका हुआ स्टार्च – सलाईवरी एमाइलेज /टायलिन – माल्टोज 

– लार में पाया जाने वाला “लाइसोज़ाइम” एन्जाइम बैक्टीरिया को नष्ट कर देता हैा, ये एन्जाइम आँसुओं एवं पसीने में भी उपस्थित होता है।

– बफर पदार्थ के रूप में लार में बाइकार्बोनेट्स एंव फॉस्फेट्स पाए जाते हैं, जो लार की PH का नियमन (Regulation) करते हैं।

– म्यूसिन भोजन को लसलसा बनाता है, ताकि ये आहारनाल में आसानी से गति कर सके।

– मुख गुहा से भोजन ग्रसनी (Pharynx) से होता हुआ ग्रासनली (Oespohgus) में पहुँचता है, जहाँ पाचन क्रिया नहीं होती है।

आमाशय (Stomach) में पाचन:-

– आमाशय/जठर/Stomach की दीवारों में जठर ग्रंथियाँ/Gastnic Glands पाई जाती हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार की कोशिका जैसे- चीफ/मुख्य कोशिका पेराइटल/ऑक्सिन्टिक कोशिका, Gastric-कोशिका, म्यूकस कोशिका आदि के द्वारा जठर-रस/Gastric-Juice का स्त्रवण होता है।

– जठर रस अत्यधिक अम्लीय (PH 1से 2) पाचक रस है, जिसके संगठन में 98 प्रतिशत जल व 2 प्रतिशत पदार्थ होता हैं।

1. कार्बनिक पदार्थ – पेप्सिन, रेनिन, लाइपेज, जिलेटिनेज, यूरियेज

2. अकार्बनिक पदार्थ- HCL, Na, K, Ca, Mg, फॉस्फेट बाइकार्बेनेट्स

प्रोटीन्स पेप्सिन → सरल पेप्टाइड्स

वसा(Lipid) लाइपेज → वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल

दूध में उपस्थित केसीन प्रोटीन → रेनिन   पैराकैसीनेट (दही के समान दिखाई देता है)

– रेनिन केवल बच्चों में पाया जाता है, वयस्कों में इसके स्थान पर HCL का स्त्रवण होने लगता है।

– आमाशय/जठर में अर्धपचित भोजन काईम/Chyme कहलाता है, जो पाइलोरिक वॉल्व से हो कर छोटी ऑत में पहुँचता है।

छोटी आँत में पाचन/Digestion in Small intestine-

– मनुष्य में पाचन क्रिया छोटी आँत में सबसे ज्यादा होती है तथा यहीं पर पाचन क्रिया पूरी हो जाती है।

– छोटी आँत में विभिन्न पाचक रस भोजन का पाचन पूरा कर देते हैं, जो इस प्रकार हैं-

– पित्त रस(Bile Juice)   →  पित्ताशय(Gall bladder) से।

– अग्नाशय रस(Pancreatic Juice)  →  अग्नाशय(Pancreas) से। ​​​​​​​

– आंत्रीय रस (Intestinal Juice)  →  आँत की दीवारों से (Intestine की Walls से)

पित्त रस (Bile Juice) :- निर्माण यकृत में हिपेटोसाइट्स कोशिका से, लेकिन संग्रहण पित्ताशय (Gall-bladder) में।

– यह हल्के पीले रंग का, क्षारीय तरल पदार्थ (PH=8.6) है।

– पित्त रस में कोई पाचक एन्जाइम नहीं पाया जाता लेकिन ये पित्त रस वसा का पायसीकरण (Emulsification) कर वसा को छोटी-छोटी बूँदों में तोड़ देता है, जिससे इसका पाचन आसनी से होता है।

– पित्त रस में जल 97 प्रतिशत और घुलित पदार्थ 3 प्रतिशत।

– घुलित पदार्थ में दो प्रकार के तत्व मौजूद होते हैं, जो निम्न हैं- कार्बनिक और अकार्बनिक

कार्बनिक –

– कार्बनिक में पित्त लवण (Bile Salts) में सोडियम ग्लायकोनेट तथा सोडियम टॉरोकोलेट होता है।

– पित्त वर्णक (Bile pigments) में बिलिरुबिन पाया जाता है।

– वसीय अम्ल में बिलिवर्डिन पाया जाता है।

– लेसिथीन

– म्यूसीन

अकार्बनिक पदार्थ-

– सोडियम (Na)

– पौटेशियम (K)

– कैल्शियम (Ca)

– बाईकार्बोनेट्स

– पित्त लवण पायसीकरण की क्रिया करते हैं।

– पित्त वर्णक मल को रंग प्रदान करते हैं। इन वर्णकों का निर्माण RBC के नष्ट होने पर होता है, पीलिया (Jaundice) में जब RBC अधिक मात्रा में नष्ट होती है तो बिलिरुबिन का जमाव शरीर में अधिक होने लगता हे, जिससे नाखून, त्वचा एवं आँखे पीली दिखाई देती हैं।

– सोडियम बाईकार्बोनेट के कारण पित्त रस क्षारीय प्रकृति दर्शाता है।

अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice)- ये अग्नाशय (Pancreas) के बहि:स्त्रावी भाग से स्त्रावित हो कर विरंसग नलिका के द्वारा छोटी आँत में पहुँचता है।

– इस रस का PH= 8.4 होता है।

– इसे पूर्ण पाचक रस (Complete digestive Juice) भी कहते हैं क्योंकि इसमें लगभग सभी प्रकार के पोषक पदार्थों का पाचन करने वाले एन्जाइम्स उपस्थित होते हैं।

छोटी आँत में पाचन :-
– अग्नाशयी रस –

आंत्रीय रस (Succus Entenicus)-

 ये आँत की दीवारों में उपस्थित ब्रूनर्स ग्रंथियों, लिबरकुहन की दरारों एवं म्यूकस ग्रंथियों के स्त्रवण से निर्मित क्षारीय प्रकृति का पाचक रस है, जिसका PH=8.4 होता है।

बड़ी आँत में पाचन क्रिया :-

• मनुष्य में बड़ी आँत में पाचन क्रिया नहीं होती है, लेकिन यहाँ कुछ बैक्टीरिया जैसे – E.Coli विटामिन संश्लेषण 
(B-12, Vit-K)
• चारा चरने वाले जंतु (Ruminents) जैसे- गाय, बकरी, भेड़, भैंस, आदि बड़ी आँत की लंबाई अधिक होती है। अत: सेल्युलोज के पाचन की क्षमता पाई जाती है।
• मनुष्य के पूर्वजों में (कपि वर्ग के जंतु) बड़ी आँत से जुड़ी अपेन्डिक्स की सहायता से सेल्युलोज़ का पाचन किया जाता था। लेकिन वर्तमान में ये संरचना अवशेषी अंग (Vestigeal Organ) के रुप में पाई जाती है।

बड़ी आँत में अवशोषण :-

• यहाँ पर जल एवं खनिज लवणों तथा कुछ दवाओं का अवशोषण।
               ↓
         सर्वाधिक अवशोषण

3. पचित भोजन का स्वांगीकरण (Assimilation):-

• कोशिकाओं द्वारा सरल पोषक पदार्थों का उपयोग कर लेने के बाद भी शेष बचे सरल पोषक पदार्थों को पुन: जटिल भोज्य पदार्थों में परिवर्तित कर शरीर में ग्लायकोजन के रुप में संग्रहित किया जाता है। इसे ही स्वांगीकरण (Assimilation) कहते हैं।

4. भोजन का अवशोषण (Absorption of digested food):-

• पचित (Digested) या सरल भोज्य पदार्थों का आहारनाल के अलग-अलग भागों में अवशोषण होता है तथा ये पोषक पदार्थ रक्त में पहुँचते हैं, जहाँ से इन्हें अलग-अलग अंगों, उत्तकों एवं कोशिकाओं (Cells) तक पहुँचाया जाता है।
• मुख गुहा में – यहाँ जल, ग्लूकोज एवं कुछ विशेष दवाओं जैसे- नाइट्रोग्लिसरीन, सॉर्बिमाइड आदि का ही अवशोषण होता है।
• आमाशय (Stomach) – ग्लूकोज, खनिज-लवण  एवं एल्कोहॉल का अवशोषण। 

छोटी आँत में (Small intestine)- 
• अधिक लंबाई + कम व्यास + रसांकुर/Villi आंतरिक पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि।
• ग्लूकोज एवं अमीनो् अम्ल का अवशोषण रंसाकुर (Villi) से।
• वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल का अवशोषण लसिका कोशिकाओं द्वारा।
• छोटी आँत में अवशोषण क्रिया सर्वाधिक होती है।

5. मल-त्याग(Defaecatopn):-

• आहारनाल में अपचित भोजन को मल के रुप में गुदा(Anus) के द्वारा शरीर से बाहर त्याग दिया जाता है।

मानव पाचन तंत्र से सम्बंधित प्रश्न

मानव पाचन तंत्र की परिभाषा?

पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

मानव पाचन तंत्र में विभिन्न अंगों का सही क्रम क्या होगा?

मुख गुहा (Oral Cavity)दाँत (Teeth)जिह्वा (Tongue)ग्रसनी (Pharynx)ग्रासनलिका (Food pipe/Oesophagus)आमाशय (Stomach)छोटी आँत (Small intestine)ड्यूडीनम (D)जेजुनम (J)इलियम (I)बड़ी आँत (Large intestine)सीकमकोलनरेक्टम

मानव शरीर में पाचन का अधिकतर कार्य कौन से अंग में होता है?

आमाशय

पाचन तंत्र का दूसरा नाम क्या है?

आहार नाल

पाचन तंत्र के अंग कौन कौन से हैं?

मुख गुहा (Oral Cavity)दाँत (Teeth)जिह्वा (Tongue)ग्रसनी (Pharynx)ग्रासनलिका (Food pipe/Oesophagus)आमाशय (Stomach)छोटी आँत (Small intestine)ड्यूडीनम (D)जेजुनम (J)इलियम (I)बड़ी आँत (Large intestine)सीकमकोलनरेक्टम

पाचन किसे कहते हैं ?

पाचन एक प्रकार की अपचय क्रिया है: जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

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