प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं? सूत्र, चित्र, परिभाषा, prakash sanshleshan kise kahate hain

नमस्कार पाठको/ छात्रों, स्वागत है आपका भारतीय शिक्षा जगत के सबसे श्रेष्ठ एंव आधुनिक पोर्टल पर।
आज हम पढ़ने जा रहे है, विज्ञान विषय की जीव विज्ञान शाखा के एक महत्वपूर्ण अध्याय प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के विषय में।
जैसा की आप अपनी स्कूली शिक्षा में कक्षा 7, 8, 9, 10, 11, और 12th में (Prakash Sanshleshan) के बारे में तो पढ़ ही चुके है। इसलिए आपको इस से संबंधित थोड़ा बहुत ज्ञान तो होगा है। इस लेख में आज हम पढ़ने जा रहे है की प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं? प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा क्या है। इस टॉपिक से संबंधित और भी प्रश्न आपके जहन (मन) में होंगे तो जैसे प्रकाश संश्लेषण का चित्र, प्रकाश संश्लेषण का सूत्र, अभिक्रिया, यह कब होता है अथवा इसको प्रभावित करने वाले कारक कौन कौन से है और इसके लाभ अथवा महत्व क्या है। इन सभी प्रश्नों और आपकी अन्य जिज्ञासाओं का समाधान हमारे इस लेख में किया गया है। तो चलिए जानते है की Prakash Sanshleshan kise kahte hain? Chitra, sutra, aur paribhasha इत्यादि।

सर्वप्रथम हम जानेंगे की प्रकाश संश्लेषण क्या हैं, इसकी परिभाषा क्या है अथवा प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं?

प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं?

सामान्य शब्दो में यदि प्रकाश संश्लेषण को परिभाषित किया जाए तो “प्रकाश की उपस्थिति में पदपो में पतियों के द्वारा भोजन निर्माण की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहा जा सकता हैं।”

प्रकाश-संश्लेषण का शाब्दिक अर्थ प्रकाश से संश्लेषित करना अर्थात् किसी पदार्थ का निर्माण करना होता है। यह एक उपचयी प्रक्रिया (anabolic process) है, जिसमें पादप कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जल (H,O) तथा सूर्य के प्रकाश से पर्णहरित (chlorophyll) के द्वारा अपने भोजन का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में पादप प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा :-

पौधों में जल, प्रकाश, पर्णहरित तथा कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट के निर्माण को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं।


प्रकाश संश्लेषण क्या हैं?

पौधे इस प्रक्रिया में कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) का निर्माण अपने भोज्य पदार्थों के रूप में करते हैं। पौधे हरे पादप, नीली-हरी शैवाल, शैवाल इस प्रक्रिया को करते हैं। अतः इन्हें प्रकाश स्वपोषी कहते हैं। प्रकाश-संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन (O) बनाते तथा वातावरण में छोड़ते हैं।

  • यह Photobiochemical क्रिया है। इसमें प्रकाश उर्जा रासायनिक उर्जा में बदलती है।
  • यह Redox अभिक्रिया का उदा० है, क्योकि इसमे oxidation (पानी) तथा Reduction (CO2) दोनो एक साथ होते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण का मुख्य उद्देश्य भोजन का निर्माण करना है। ” युग्लीना को हरा प्रोटोजोआ था पादप जंतु के बीच की योजक कही भी करते हैं, यह प्रकाश संश्लेषी जंतु है।
  • सर्वप्रथम प्रकाश साश्लेषणा को बैक्टीरिया में खोजा गया था लेकिन इनमें जल का Phstolysis नहीं होने से वातावरण में ऑक्सीजन का निष्कासन नहीं हुआ था।
  • पहली बार वायुमण्डल में ऑक्सीजन BGA में photosynthesis से प्राप्त हुई थी।
  • लगभग 90% ऑक्सीजन समुद्री शैवालो में Photosynthesis से उत्पन्न होती है।
  • अमरबेल तथा कवक में PS नहीं होता है।
  • यह क्रिया उमाशोषी हैं, जो Anabolic (उपचयी) होती है।

प्रकाश-संश्लेषण की क्रियाविधि (Mechanism of Photosynthesis)

प्रकाश-संश्लेषण एक उपचयन-अपचयन क्रिया (oxidation-reduction process) है, जिसमें जल का अपचयन 02 मैं तथा CO, का अपचयन शर्करा के निर्माण में होता है। पौधों पर पड़ने वाले प्रकाश के कुछ अंश को प्रकाश-संश्लेषी वर्णक (photosynthetic pigments) अवशोषित कर लेते हैं। ये ग्रेना की झिल्लियों में पाए जाते हैं। पर्णहरिम-a मुख्य रूप से नीले, बैंगनी व लाल प्रकाश तथा पर्णहरिम-6 नीले प्रकाश का अवशोषण करते हैं। यहाँ से प्रकाश ऊर्जा प्रतिक्रिया केन्द्र (reaction center) तक जाती है, जहाँ ऊर्जा को संचित किया गया है।


प्रकाश संश्लेषण का सूत्र :-

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प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रियाएँ (Reactions of Photosynthesis)

(1) प्रकाशिय अभिक्रिया (Light Reaction / Hill Raelfon) :

यह प्रकाश की उपस्थिती में होती है।
यह ग्रेना में होती है।
PS-I , PS-II दौनो भाग लेते है।
NADPS तथा ATP का उत्पादन होता है।
स्वांगीकरण क्षमता का उत्पादन
इस क्रिया में chi-a के अत्यधिक उत्तेजन से इलेक्ट्रान्स निकलकर क्रमागत इलेक्ट्रॉन acceptor से गुजरते हुए ATP का निर्माण करता है।

यह क्रिया दो प्रकार की होती है।

चक्रीय अचक्रीय
इसमें मुख्य क्रिया केंद्र PS-I होता हैं। इसमें PS-I व PS-II दोनों भाग लेते है।
इसम 420 का Photolysis नहीं होता। क्योकि NADP रिडक्टेज एंजाइम अनुपस्थित जल का phototysis होता हैं क्योंकि NADP रिडक्टेज एंजाइम उपस्थित होता हैं।
ऑक्सीजन नहीं निकलती ऑक्सीजन निकलती हैं।
एक बार चलने से 2 ATP बनते हैं। इसके चलने से एक ATP तथा 2 NADPH बनते हैं।
इसमें प्रथम इलेक्ट्रॉन ग्राही Fd होता हैं। इसमें प्रथम इलेक्ट्रॉन ग्राही PQ होता हैं।
इसमें प्लास्टोसायनिन से निकलकर इलेक्ट्रान पुन PS-I प्रवेश कर जाता हैं। इसमें PS-II से निकलकर जाने वाला e क्रमागत PC से होकर PS-I में प्रवेश करता है।

(2) Dark Reaction / अप्रकाशिक /Blaclemaan Reaction :

इस चक्र की खोज Blackmom ने की थी ।
इसमें प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती
यह STROMA भाग में होता है।
केल्विन तथा बेसन ने क्लोरेला तथा सिनरेशमल
शेवाल पर प्रयोग करके ( के अब से लेकर कार्बोहाइड्रेट के निर्माण अन्दर तक कि क्रिया8) को रुक पकिय रूप में व्यवस्थिता किया था ६९ कारण इसे केविन च कहते है C02

5 इव्होने cli Isotope तथा कोमेरोगामी टेकनिक का प्रयोग किया था

इनके अनुसार उस चक्र में बनने वाला प्रथम स्थायी उत्पाद तीन कानि वाला PGA होता है | इस-चक में पहली लार CO2 ग्राही का कार्य पांच कार्बन वाली योगिक RUBP करता है। (Ribulbse 1-5- Bi Phosphode)

इस क्रिया में Rubisco Enzyme प्रयुक्त होता है, Rubisco पृथ्वीतल पर सवाधिक पाया जाने वाला प्रोटीन / Enzyme

यह chloroplast में पायी जाने वाली 167. Postein होती है।

रामप्रसाद RpscGuide में कंटेंट राइटर हैं। रामप्रसाद को पढ़ाई का जुनून है। उन्हें लेखन, करियर, शिक्षा और एक अच्छा कीबोर्ड पसंद है। यदि आपके पास कहानी का कोई विचार है, तो उसे [email protected] पर एक मेल भेजें।

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