मनोविज्ञान किसे कहते हैं ? मनोविज्ञान की शाखाएं

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इस लेख में हम मनोविज्ञान के बारे में अध्ययन करेंगे ।

मनोविज्ञान किसे कहते हैं ?

मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है, जो मानव के व्यवहार (Behaviour) एवं मानसिक तथा दैहिक प्रक्रियाओं (Mental and Physiological Processes) का अध्ययन करता है। मनोविज्ञान में मानव व्यवहार के साथ-साथ पशु-पक्षियों के व्यवहार का अध्ययन भी सम्मिलित हैं। मनोविज्ञान अध्ययन की वह शाखा है जो मन का अध्ययन करती है अर्थात् ‘मनोविज्ञान’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है- मन का विज्ञान।

सर्वप्रथम यूनानी दार्शनिक सुकरात ( ई. पू. 5 वीं सदी ) ने ईस्वी पूर्व 5 वीं सदी में विचार दिया था की मनुष्य को मनुष्य का अध्ययन करना चाहिए । इनके विचारो का प्रभाव प्लेटो पर आया जिन्होंने अपनी पुस्तक Republic में लिखा “ईश्वर , प्रकृति व मनुष्य आपस में इस प्रकार से बंधे हुए है की इन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता” इन्होंने ही सबसे पहले आत्मा की अवधारणा दी थी ।

प्लेटो ( ई. पू. 5 वीं – 4 वीं सदी ) :- मनुष्य में आत्मा पायी जाती है जिसमे भाव होते है और उन्हीं भावों के कारण मनुष्य किसी परम सत्ता को ईश्वर मानता है । प्लेटो के अनुसार “आत्मा ही परमात्मा” हैं ।

अरस्तू ( ई. पू. 384-322 ) :- इन्होंने आत्मा का अध्ययन किया तथा दर्शन शास्त्र में इसे प्रारंभ किया।आत्मा का अध्ययन ही आगे चलकर आधुनिक मनोविज्ञान बना , इसलिए अरस्तू को मनोविज्ञान / प्राचीन मनोविज्ञान का जनक कहते है ।

Note :- कॉल्सनिक के अनुसार मनोविज्ञान का वास्तविक जनक प्लेटो है। कॉल्सनिक एकमात्र विद्वान थे जो प्लेटो को मनोविज्ञान का वास्तविक जनक मानते हैं ।

ईस्वी पूर्वी 4 वीं सदी से लेकर 16 वीं सदी तक आत्मा के अध्ययन की विषयवस्तु में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं हुआ । फिर पहेली बार 1590 ईस्वी में यूनानी दार्शनिक कडोल्फ गोइक्ले ने “साइकोलोजिया” नामक पुस्तक लिखी , जिसमें आत्मा के अध्ययन के लिए “साइकोलॉजी ( Psychologi )” शब्द का प्रयोग किया । साइकोलॉजी ( Psychology ) शब्द की उत्पति यूनानी भाषा के दो शब्दो से हुई है :-

  1. Psyche (साइकी) शब्द का अर्थ – आत्मा
  2. Logus (लोगस) शब्द का अर्थ – अध्ययन

अंतः psychology शब्द का अर्थ – “आत्मा का अध्ययन या आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना है।”

देकार्ते ( 1596 ई. – 1650 ई. ) :- यूनानी दार्शनिक देकार्ते ने आत्मा के अध्ययन की विषयवस्तु को भौतिकशास्त्र में जोड़ने का प्रयास किया , तब उस काल के दार्शनिक हॉब्स , लॉक , कांट आदि ने इसका विरोध किया और कुछ सवाल खड़े किये – 1. आत्मा क्या है ? 2. आत्मा कैसी है ? 3. आत्मा का स्वरूप कैसा है ? जिससे यह अभिप्राय समाप्त हो गया ।

मन / मस्तिष्क का विज्ञान (17 वीं सदी ) :- – प्रस्तुतकर्ता – पोम्पोनॉजी ( इटली )। – समर्थक – हॉब्स , लॉक , कांट , स्पिनोजा । – सवाल – 1. मन क्या है। 2. मन कितने है। 3. मन व मस्तिष्क में क्या अंतर है। जिससे यह अभिप्राय भी 19 वीं सदी मध्यकाल में समाप्त हो गया ।

चेतना का विज्ञान ( 19 वीं सदी ) :- सबसे कम समय तक प्रचलित में रहने वाली विचाराधारा । – प्रस्तुतकर्ता – विलियम जेम्स , विलियम वुण्ट। – समर्थन – जेम्स सली , विलियम वाईब्स , टिचनर , चेडविक। “चेतना ही जीवन है जीवन ही चेतना है” इस आधार पर मनोविज्ञान की विषयवस्तु को चेतना का विज्ञान की संज्ञा दी गई ।

विलियम वुन्ट :- 1879 ई. में जर्मनी के विद्वान विलियम वुन्ट ने लिपजिंग नामक स्थान पर कार्ल मार्क्स विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला स्थापित की ओर प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक कहलाये।

विलियम जेम्स :- ( अमेरिकी विद्वान ) इन्होनें दर्शनशास्त्र से मनोविज्ञान की विषयवस्तु को अलग करते हुए एक स्वतंत्र पुस्तक “The Principal Of Psychology” की रचना 1890 ई. में की । – इन्हें आधुनिक मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है। – विलियन जेम्स द्वारा अमेरिका में मनोविज्ञान का प्रचार-प्रसार करने के कारण इन्हें अमेरिकी मनोविज्ञान के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

व्यवहार का अध्ययन :- ( 20 वीं सदी से अब तक ) – प्रस्तुतकर्ता – जे. बी. वॉटसन – समर्थन – वुडवर्थ , थॉर्नडाईक , हल , मन , क्रो&क्रो , बोरिंग , वेल्ड , पावलॉव , स्किनर , हॉलैण्ड आदि। – जे. बी. वॉटसन “व्यवहार एकमात्र मानव की ऐसी विशेषता है जो सदैव सकारात्मक होती है।” – 20 वीं सदी के प्रारम्भ में जे. बी. वॉटसन ने मनोविज्ञान की विषयवस्तु को व्यवहार का धनात्मक विज्ञान कहा इसलिए इन्हें व्यवहारवाद का जनक कहते है। – वॉटसन ने कहा कि – “तुम मुझे एक बालक दो मैं उसे कुछ भी जैसे इंजीनियर , डॉक्टर , वकील , चोर , डाकू बना सकता हूं। – जे. बी. वॉटसन को 20 वीं सदी का चमकता सितारा मनोवैज्ञानिक कहा जाता है।

वुडवर्थ की परिभाषा :- “मनोविज्ञान ने सबसे पहले अपनी आत्मा फिर मन और फिर चेतना का त्याग किया , तथा अब व्यवहार के स्वरूप को अपनाता है।

मनोविज्ञान की परिभाषाएं :-

क्रो & क्रो के अनुसार :-

“मनोविज्ञान मानव व्यवहार और मानव संबंधों का अध्ययन है।”

मॉर्गन के अनुसार :-

“मनोविज्ञान मानव एवं पशु व्यवहार का विज्ञान है।”

वाटसन के अनुसार :-

“मनोविज्ञान व्यवहार का धनात्मक विज्ञान है।”

जिंबार्डो के अनुसार :-

“मनोविज्ञान जीवधारियों के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है।”

विलियम मैक्डूगल के अनुसार :-

“मनोविज्ञान आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है।”

बोरिंग के अनुसार :-

“मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है।”

वुडवर्थ के अनुसार :-

“मनोविज्ञान वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का अध्ययन है।”

वर्तमान समय में मनोविज्ञान व्यवहार का अध्ययन है ।


मनोविज्ञान की शाखाएं :-

  1. बाल मनोविज्ञान :- मनोविज्ञान की वह शाखा जो बालक के प्रारम्भिक विकास एवं व्यवहार से संबंधित अध्ययन करती हैं ।
  2. सामान्य मनोविज्ञान :- सामान्य परिस्थितियों में होने वाले मानव व्यवहार का अध्ययन ।
  3. असामान्य मनोविज्ञान :- जब एक व्यक्ति सामान्य नहीं रहता तथा असामान्य , पागल , मनोरोगी या असामाजिक जैसा व्यवहार करता है उसका अध्ययन करना तथा मनोचिकित्सा से संबंधित मनोविज्ञान ।
  4. समाज मनोविज्ञान :- सामाजिक परिस्थितियों में होने वाले मानव व्यवहार का अध्ययन ।
  5. मानव मनोविज्ञान :- मानवीय दृष्टिकोण से होने वाले मानव व्यवहार का अध्ययन ।
  6. शिक्षा मनोविज्ञान :- मनोविज्ञान की वह शाखा जो बालक के शैक्षिक परिवर्तनों से संबंधित है तथा शिक्षण अधिगम के व्यवहार को दर्शाती है ।
  7. किशोर मनोविज्ञान :- किशोरावस्था (टीनएज) की विशेषताओं एवं व्यवहारों का अध्ययन ।
  8. प्रौढ़ मनोविज्ञान :- किशोरावस्था के बाद एक व्यक्ति प्रौढ़ हो जाता है जहां उसका कार्य व्यवहार , सोच , नजरिया , मानव मूल्य आदि में विशेष प्रकार का व्यवहार देखा जाता है इसका अध्ययन ।
  9. अपराध मनोविज्ञान :- एक अपराधी के व्यवहार को समझना , उस तक पहुंचना एवं उसे सही दिशा देकर अपराध की दुनिया से सामान्य बनाने का प्रयास से संबंधित अध्ययन ।
  10. औद्योगिक मनोविज्ञान :- किसी उद्योग के मालिक से लेकर कर्मचारी के बीच का व्यवहार जो की उस उद्योग की प्रगति के लिए अतिमहत्वपूर्ण होता है , का अध्ययन ।
  11. व्यैक्तिक मनोविज्ञान :- व्यक्ति-व्यक्ति में पायी जाने वाली भिन्नता का अध्ययन ही व्यैक्तिक मनोविज्ञान है ।
  12. पशु मनोविज्ञान :- वह मनोविज्ञान जहां पशुओं के व्यवहार को समझने का प्रयास किया जाता है ।
  13. परा मनोविज्ञान :- किसी घटना , दुघर्टना एवं व्यवहार का पूर्वाआभास होना तथा अन्य प्रकार के पारलौकिक व्यवहारों का अध्ययन ।

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