घूर्णन गति किसे कहते हैं? परिभाषा, उदाहरण, rotational motion in hindi (physics)

इस लेख में हम घूर्णन गति (Rotational hindi) के बारे में जानेंगे। यहां पर घूर्णन गति से संबंधित विभिन्न टॉपिक और सवालों का समावेश किया गया है। जैसे :- घूर्णन गति किसे कहते हैं, घूर्णन क्या है, घूर्णन गति की परिभाषा, उदाहरण, महत्वपूर्ण प्रश्न ,घूर्णन गति कक्षा 11, घूर्णन त्रिज्या, घूर्णन गति के समीकरण एवं इनकी व्युत्पत्ति। Rotational motion in hindi class 11 Physics.

प्रस्तावना :-

जब कोई वस्तु घूर्णन गति में हो तब सभी कण तथा द्रव्यमान केंद्र एकसमान गति नहीं करते है। न्यूटन के नियम जो कि यांत्रिकी के मार्गदर्शक नियम है, बिंदु कणों पर प्रयुक्त होते है और यदि किसी दृढ़ वस्तु या कण के निकाय पर प्रयुक्त हो तो द्रव्यमान केंद्र की गति की भविष्यवाणी करते है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम जांच की द्रव्यमान केंद्र तथा अन्य कण किस प्रकार गति करते है। जब वस्तु घूर्णन गति में हो, उसका घूर्णन गति की गतिकी में हम दृढ़ पिंड वस्तु के द्रव्यमान केंद्र तथा विभिन्न कन्नो की स्थिति, वेग, त्वरण, तथा समय के मध्य संबंधों, घूर्णन गति किसे कहते हैं बारे में जानेंगे।

दृढ़ पिंड :- वह पिंड या कण का निकाय जिस पर बाहरी साधारण बल या बल आघूर्ण लगाने पर कण के मध्य दूरी अपरिवर्तित रहती है, आदर्श दृढ़ पिंड कहलाता है।

घूर्णन का अर्थ :- यदि कोई पिंड अपने ही अक्ष पर किसी अन्य पिंड के सापेक्ष या परित गति करता है।

घूर्णन गति किसे कहते हैं? क्या है।(Rotational motion in hindi)

किसी भी वस्तु की गति उसके स्थिति में परिवर्तन या उसके विन्यास में परिवर्तन या दोनों में परिवर्तन से समझी जाती है। यदि किसी वस्तु का विन्यास परिवर्तित होता है तो इस प्रकार की गति को घूर्णन गति कहते है।

घूर्णन गति की परिभाषा (Definition of Rotational motion) :-

” ऐसी गति जिसमे कोई दृढ़ पिंड या कण किसी स्थिर अक्ष के परित घूर्णन करता है, घूर्णन गति कहलाती है।

जैसे :- छत के पंखे की गति, कुम्हार के चाक की गति, पृथ्वी की घूर्णन गति।

घूर्णन गति किसे कहते हैं? परिभाषा, उदाहरण, rotational motion in hindi (physics)
Rotational motion diagram


घूर्णन गति के प्रकार (types of rotational motion)

घूर्णन गति को समाहित करने वाली गतिया निम्नलिखित है

(1) स्थिर अक्ष के परित घूर्णन (2) स्थानांतरीय अक्ष के परित घूर्णन (3) घुर्णिय अक्ष के परित घूर्णन

(1) स्थिर अक्ष के परित घूर्णन :-

छत के पंखे का घूर्णन, कुम्हार के पहिए का घूमना, दरवाजों का खुलना व बन्द होना, दीवार की घड़ी की सुइयों का घूमना इत्यादि इस वर्ग में आते है। जब छत का पंखा घूमता है, वह उधर्वाधर छड़ जिससे यह लटकाया जाता है। स्थिर अवस्था में रहता है तथा पंखों के सभी कण वृतीय पथ में घूमते है। किसी पंख के कण P के वृतीय पथ को बिंदुकृत वृत द्वारा दर्शाया गया है। सभी कणों द्वारा अनुसरित वृतीय पथों के केंद्र छड़ की केंद्रीय रेखा पर होते है। यह केन्द्रीय रेखा घूर्णन अक्ष कहलाती है तथा इसे बिंदूकृत रेखा द्वारा दर्शाया जाता है। सभी कण जो इस घूर्णन के अक्ष पर है वे विरामावस्था में है इसलिए अक्ष विरामावस्था में है और पंखा स्थिर अक्ष के परित घूर्णन में है।

महत्वपूर्ण प्रेक्षण :-

एक दृढ़ वस्तु का उदाहरण ले जिसका आकार कुछ भी हो सकता है और जो एक स्थिर अक्ष PQ के परित जो उस वस्तु के भीतर से गुजरती है, घूम रही है। इसके दो कण A और B वृतीय पथों में गति करते हुवे दर्शाए गए है।

सभी कण जो घूर्णन अक्ष पर नहीं है वृतीय पथों में घूमते है जिनके केंद्र घूर्णन अक्ष पर होते है। यह सभी वृतीय पथ समानांतर तलों में होते है जो घूर्णन अक्ष के लंबवत होते है।

वस्तु के सभी कण समान समयांतराल में समान कोणीय विस्थापन करते है। इसलिए सभी समान कोणीय वेग तथा त्वरण से गति करते है।

किन्हीं दो कणों के बारे में सोचे को घूर्णन अक्ष के लंबवत तल में हो। घूर्णन में दृढ़ वस्तु के ऐसे सभी कण एक दूसरे के सापेक्ष वृतीय पथों में गति करते है। वृतीय पथ की त्रिज्या इन दोनों की दूरी के बराबर होती है। इसके साथ ही कोणीय वेग तथा कोणीय त्वरण वस्तु की घूर्णन गति के बराबर होते है।

(2) स्थानांतरीय अक्ष के परित घूर्णन

स्थानांतरीय अक्ष के परित घूर्णन गति के एक वृहत वर्ग को समाहित करता है। लौटनी गति इस प्रकार की गति का एक उदाहरण है। किसी वाहन के पहिए की लोटनी गति के बारे में सोचे जो कि एक सीधे समतल सड़क पर गति कर रही हो एक ऐसे निर्देश तंत्र के सापेक्ष की जो कि वाहन के साथ गति कर रहा हो। पहिया स्थिर धुरी के परित घूर्णन करता प्रतीत होता होगा। इस निर्देश तंत्र के सापेक्ष पहिए का घूर्णन स्थिर अक्ष के परित घूर्णन है। धरातल से जुड़े हुवे निर्देश तंत्र के सापेक्ष पहिया गतिशील धुरी के परित घूर्णन करता हुआ प्रतीत होगा। इसलिए पहिए की लौटनी गति एक साथ होने वाली दो पृथक गतीयो का अध्यारोपण है। स्थिर धुरी के परित घूर्णन जो वाहन के साथ जुड़ी हुई है तथा धुरी वाहन के साथ स्थानांतरण।

(3) घूर्णीय अक्ष के परित घूर्णन :-

इस प्रकार की गति में वस्तु एक अक्ष के परित घूमती है जो स्वयं किसी दूसरे अक्ष के परित घूमती है। घूर्णीय अक्ष के परित घूर्णन गति हमारे कार्य क्षेत्र के बाहर है। इसलिए इसकी चर्चा हम प्राथमिक स्तर तक ही करेंगे।

एक घूमते हुए लट्टू का उदाहरण ले। लट्टू सममिती की केन्द्रीय अक्ष के परित घूमता है तथा यह अक्ष उध्वाधर अक्ष के परित एक शंकु कि आकृति बनाता है। केंद्रीय अक्ष निरंतर अपना विन्यास बदलती है। इसलिए घुर्णीय गति में है। इस प्रकार का घूर्णन जहां अक्ष स्वयं घुर्णीय गति में हो तथा एक शंकु की आकृति में घूमे अग्रगमन कहलाता है।


घूर्णन गति की विशेषताएं :-

  1. घूर्णन गति में पिंड के सभी कण अपने अपने वृत्ताकार पथो में एक तल पर गति करते है जिनके केंद्र तल के लंबवत घूर्णन अक्ष पर स्थित होते है।
  2. यह द्विविमीय गति है।
  3. घूर्णन अक्ष पर स्थित सभी कण विरामावस्था में होते है।
  4. जो कण घूर्णन अक्ष के पास होते है वे कम त्रिज्या के वृतीय पथ में तथा जो कण घूर्णन अक्ष से दूर होते है वे अधिक त्रिज्या के वृतीय पथ में गति करते है।
  5. घूर्णन गति में सभी कण अपना वृतीय पथ समान समय में पुरा करते है।
  6. घूर्णन गति में विभिन्न कण निश्चित समय अंतराल में भिन्न भिन्न रेखीय दूरी तय करते है परन्तु प्रत्येक कण का कोणीय विस्थापन समान रहता है।
  7. इसमें पिंड के सभी कणों का कोणीय वेग समान परंतु रेखीय वेग अलग अलग रहता है।
  8. घूर्णन गति में कणों का रेखीय वेग घूर्णन अक्ष से दूरी पर निर्भर करता है।
  9. जो कण घूर्णन अक्ष के पास होगा उसका रेखीय वेग कम जो कण दूर स्थित होगा उसका रेखीय वेग अधिक होगा।


घूर्णन गति के समीकरण (Equations of Rotational motion in hindi)

घूर्णन गति के समीकरण 3 है जो निम्न लिखित है।

  • ω = ω० + αt
  • θ = ω०t + 1/2 αt2
  • ω2 = ω०2 +2αθ


घूर्णन गति से संबंधित विभिन्न परिभाषाएं

(1) घूर्णन अक्ष (rotational axis) :-

वह अक्ष जिसके परित पिंड घूर्णन करता है, घूर्णन अक्ष कहलाती है। घूर्णन अक्ष कहलाती है। घूर्णन अक्ष पिंड के बाहर या अंदर कहीं भी हो सकती है तथा कण का स्वयं का कोई घूर्णन अक्ष नहीं होता है।

(2) द्रव्यमान केंद्र (Centre of Mass)

किसी पिंड अथवा कणों के निकाय में वह बिंदु जिस पर संपूर्ण पिंड या निकाय का द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। पिंड का द्रव्यमान केंद्र कहलाता है।

(3) कोणीय विस्थापन :-

वृताकार पथ पथ पर गति कर रहे किसी कण की वृत के केंद्र के सापेक्ष स्थिति में परिवर्तन को कोणीय विस्थापन कहते है।

(4) कोणीय वेग :-

घूर्णन गति कर रही वस्तु के कोणीय विस्थापन में परिवर्तन की दर को कोणीय वेग कहते है।

(5) कोणीय त्वरण :-

घूर्णन गति कर रही वस्तु के कोणीय वेग में परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण कहते है।

(6) घूर्णन त्रिज्या :-

घूर्णन त्रिज्या घूर्णन अक्ष से वह दूरी है होती है जो जहा पर पिंड का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित मान लेने पर जड़त्व आघूर्ण का वही मान प्राप्त होता है जो कि पिंड के वास्तविक द्रव्यमान वितरण से प्राप्त होता है।


महत्वपूर्ण तथ्य :-

  • कण :- किसी वस्तु का आकार उसके गति के आयाम के सापेक्ष नगण्य हो तो उसे कण कहते है।
  • कण सिर्फ स्थानांतरित गति कर सकता है या फिर बाहर किसी अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति कर सकता है कण का स्वयं का घूर्णन अक्ष नहीं होता है।
  • यदि एक दृढ़ पिंड किसी नत तल पर बिना फिसले लुढ़कता है तो इसमें स्थानांतरित गति हो सकती है परन्तु सभी कण क्षण विशेष पर समान वेग से गति नहीं करते है।
  • यदि एक ऐसा पिंड जो किसी चुल पर टिका हो या किसी न किसी न किसी रूप में स्थिर हो केवल घूर्णन गति कर सकता है।


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