समास किसे कहते हैं? समास की परिभाषा, समास के भेद/प्रकार, Samas in hindi grammar

इस अध्याय में हम पढ़ेंगे :-

  • समास
  • समास किसे कहते हैं
  • समास की परिभाषा
  • समास के प्रकार
  • समास के कितने भेद हैं
  • समास विग्रह
  • समास का चार्ट
  • समास के उदाहरण

समास शब्द का अर्थ (Samas in Hindi)

समास शब्द का अर्थ :- संक्षिप्त या छोटा करना

समास किसे कहते हैं?

समास शब्द की रचना ‘ सम + आस ‘ से मिलकर हुई है। सम् शब्द का अर्थ ‘ पास ‘ तथा ‘ आस ‘ का अर्थ ‘ आना या बैठना ‘ होता है। अर्थात एक या एक से अधिक पदो के बीच के विभक्ति – चिन्ह योजको या शब्द – शब्दांशौ को हटाकर पास – पास बैठाने को ‘ समास ‘ कहते है।

समास की परिभाषा

परिभाषा- दो या दो से अधिक शब्दों के मेल को समास कहते है।

समास से सम्बंधित अन्य शब्दों के अर्थ

समास में प्राय: दो पद होते है- 1. पूर्व पद 2. उत्तर पद 

सामासिक पद

दोनों पदों को मिलाने से बनने वाला पद सामासिक पद कहलाता है।

समास विग्रह

समास विग्रह- दोनों पदों को अलग करने की प्रक्रिया समास विग्रह कहलाती है। 
उदाहरण – बैलगाड़ी (समास) बैल से चलने वाली गाड़ी (समास-विग्रह)

समास के भेद अथवा प्रकार

सामान्यता एक प्रश्न उत्पन्न होता है की समास के कितने भेद होते हैं?

समास के छ: भेद होते है:-
 

अव्ययीभाव समासतत्पुरुष समासकर्मधारय समासद्विगु समासद्वन्द्व समासबहुव्रीहि समास
(प्रथम पद अव्यय हो, एक ही शब्द आये बार-बार) (जिसमें परिवर्तन नही आता हो) (उपसर्ग हो)जैसे – अत्यधिक (अधिक से अधिक) (दूसरा पद प्रधान व (कारक चिन्हों  का लोप)जैसे- राजपुरुष (राजा का पुरुष) तत्पुरुष समास के 6 भेद होते है1.कर्म तत्पुरुष2.करण तत्पुरुष3.संप्रदान तत्पुरुष4.अपादान तत्पुरुष5. संबंध तत्पुरुष6.  अधिकरण तत्पुरुष कर्मधारय समास (उत्तर पद प्रधान हो) (पदो में विशेषण हो) विशेषण=विशेष्य संबंध)जैसे – नीलाकाश(नीला है जो आकाश)(प्रथम पद संख्या का इत अर्थात् संख्यावाची हो)जैसे – त्रिफला(तीन फलों का समूह)दोनों पद प्रधान हो (छिपा ‘और’ का मझधार)(विलोम/पुरक)जैसे- राधा-कृष्ण (राधा और कृष्ण)(दोनों पर गौण, तीसरा अर्थ निकले) राक्षस, भगवान के अवतार के नाम के पर्यायवाचीजैसे- त्रिनेत्र(तीन है नेत्र जिसके-शिव) 
 नञ तत्पपुरुष    


समास के भेद याद करने का सरल तरीका –

ट्रीक – “अब के तो दे दे”
अ = अव्ययी भाव समास    ब = बहुब्रीहि समास
के = कर्मधारय समास        तो = तत्पुरुष समास
दे = द्विगु समास            दे = द्वन्द्व समास

(1) अव्ययीभाव समास 

जिस समास में पूर्व पद प्रधान हो तथा साथ में अव्यय हो अव्ययीभाव समास कहलाता है। जैसे:-

अव्ययीभाव समास की विशेषता :-

  • इस समास का पूर्व पद प्रधान होता हैं।
  • इस समास का पूर्व पद कोई उपसर्ग नहीं होता हैं।
  • अव्ययीभाव समास का पूर्व पद कोई अविकारी शब्द होता हैं।
  • इस समास में पदों की पुनरावृति होती हैं या प्रत्यय के रूप में ‘अनुसार, पूर्वक, उपरांत’ जुड़े रहते हैं।


 

आजीवनजीवन पर्यंत / जीवन भर
प्रतिदिनहर दिन / दिन – दिन, प्रत्येक दिन
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
प्रतिपलहर पल
भरपेटपेट भरकर / पेट भर के
आजन्मजन्म पर्यन्त / जन्म से लेकर
बेखटकेबिना खटके / बिना खटके के
निर्भयबिना भय का
कृपापूर्वककृपा से पूर्ण / कृपा के साथ
श्रद्धापूर्वकश्रद्धा से पूर्ण
निःसंकोचसंकोच से रहित
अनुकूलकूल के अनुसार
नियमानुसारनियम के अनुसार
रातभररात्रि पर्यंत
दिनभरदिन पर्यंत
दिनोदिनदिन ही दिन में
रातोंरातरात ही रात में
कानोंकानकान ही कान में
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
आपादमस्तकपाद से मस्तक तक
प्रत्युपकारउपकार के प्रति
प्रतिबिंबबिंब के बदले बिंब
अत्यधिकअधिक से अधिक
निर्विकारविकार रहित
दर्शनार्थदर्शन हेतु
बीचोबीचबीच के भी बीच में
क्षणक्षणप्रत्येक क्षण
धीमे-धीमेधीमे के पश्चात् धीमे
धुंधला-धुंधलाधुंधले के पश्चात्
दौड़मदौड़दौड़ने के पश्चात् दौड़ना
कहाकहीकहने के पश्चात् कहना
सुनासुनीसुनने के पश्चात् सुनना
मंद-मंदबहुत मंद
यथास्थानजो स्थान निर्धारित है
यथास्थितिजैसे स्थिति है
प्रतिवर्षप्रत्येक वर्ष/वर्ष – वर्ष
निस्संदेहसंदेह रहित
निडरडर रहित
प्रत्यक्षआँखो के सामने

(2) तत्पुरुष समास

जिस समास में उत्तर पद अर्थात् दूसरा पद प्रधान हो तत्पुरुष समास कहलाता है। इसकी पहचान यह है कि समास विग्रह करने पर विभक्ति चिह्न नजर आते हैं। कर्त्ताता और सम्बोधन को छोड़कर अन्य कारक चिह्नों के आधार पर इन्हें कर्म तत्पुरुष, करण तत्पुरुष आदि कहा जाता है। जैसे- 

कर्म तत्पुरुष (‘को’) का लोप

जितेंद्रिय इंद्रियो को जीतने वाला
विद्याधरविद्या को धारण करने वाला
जेबकतराजेब को काटने वाला
विकासोन्मुखविकास को उन्मुख
मनोहरमन को हरने वाला
सिद्धिप्राप्तसिद्धि को प्राप्त
शरणागतशरण को गया हुआ
वयप्राप्तवय को प्राप्त
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
कष्टापन्नकष्ट को आपन्न (प्राप्त)
गृहागतगृह को आगत
विरोध जनकविरोध को जन्म देना वाला
मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वाला
यश प्राप्तयश को प्राप्त
तर्कसंगततर्क को संगत
ख्याति प्राप्तख्याति को प्राप्त

करण तत्पुरुष (से, के द्वारा)के लोप से बनने वाले

हस्तलिखित हस्त द्वारा लिखित
बिहारीरचितबिहारी द्वारा रचित
मनमानामन से माना
शोकातुरशोक से आतुर
करुणापूर्णकरुणा से पूर्ण
शोकाकुलशोक से आकुल
जलसिक्तजल से सिक्त
पददलितपद से दलित
देश निकालादेश से निकाला
अकालपीड़िताअकाल से पीड़िता 
हृदयहीनहृदय से हीन
प्रेमसिक्त           प्रेम से सिक्त
रणविमुखरण से विमुख
कृष्णार्पणकृष्ण के लिए अर्पण
वज्राहतवज्र से आहत
भुखमराभूख से मरा
श्रमजीवीश्रम से जीने वाला
शोकाकुलशोक से आकुल
मेघाच्छन्नमेघ से आछन्न
पददलितपद से दलित
महिमामंडितमहिमा से मंडित
वाग्युद्धवाक् से युद्ध
आचारकुशलआचार से कुशल
नीतियुक्तनीति से युक्त
मुँहमाँगामुँह से माँगा
रेखांकितरेखा के द्वारा अंकित
जग-हँसाईजग के द्वारा हँसी
लोक सत्यलोक द्वारा सत्य
क्रियान्वितिक्रिया के द्वारा अन्विति
मोहांधमोह से अंधा

संप्रदान तत्पुरुष (के लिए) के लोप से बनने वाला

परीक्षाभवन परीक्षा के लिए भवन
स्नानघरस्नान के लिए घर
छात्रावासछात्रों के लिए आवास
मार्गव्ययमार्ग के लिए व्यय
युद्धक्षेत्रयुद्ध के लिए क्षेत्र
भूतबलिभूतों के लिए बलि
भण्डारघरभण्डार के लिए घर
हवनकुण्डहवन के लिए कुण्ड
पुत्रशोकपुत्र के लिए शोक
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
देवालयदेव के लिए आलय
बालामृतबालकों के लिए अमृत
पाकशालापाक के लिए शाला
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
रंगमंच  रंग के लिए मंच
देवार्पण देव के लिए अर्पण
विधानसभाविधान के लिए सभा
सभामंडपसभा के लिए मंडप
रसोई घररसोई के लिए घर
घुड़सालघोड़ो के लिए साल (भवन)
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
गुरुदक्षिणा गुरु के लिए दक्षिणा

अपादान तत्पुरुष (से) अलग होने के अर्थ में

बंधन मुक्तबंधन से मुक्त
पदच्युतपद से च्युत
पथभ्रष्ट पथ से भ्रष्ट
धर्मविमुखधर्म से विमुख
स्थानच्युतस्थान से च्युत
ईश्वरविमुखईश्वर से विमुख
शक्तिहीनशक्ति से हीन
लक्ष्यभ्रष्टलक्ष्य से भ्रष्ट
सेवानिवृतसेवा से निवृत
लाभरहितलाभ से रहित
कर्त्तव्यविमुखकर्त्तव्य से विमुख
लोकविरूद्धलोक से विरूद्ध
नेत्रहीननेत्र से हीन
स्थानभ्रष्टस्थान से भ्रष्ट
भयभीतभय से भीत
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
देश निकालादेश से निकाला हुआ

संबंध तत्पुरुष  (का,के, की) के लोप से बनने वाला

गंगाजलगंगा का जल
अन्नदानअन्न का दान 
राजभवनराजा का भवन
विद्यासागरविद्या का सागर
गुरुसेवागुरु की सेवा
राजदरबारराजा का दरबार
मृगछौनामृग का छौना
चरित्रचित्रणचरित्र का चित्रण
चन्द्रोदयचन्द्र का उदय
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति
गृहस्वामीगृह का स्वामी
कूपजलकूप का जल
लखपतिलाखों का पति
राजकन्याराजा की कन्या
पितृभक्तपिता का भक्त
राजकुमारराजा का कुमार
सेनापतिसेना का पति
गोदान   गो का दान
प्रेमोपासकप्रेम का उपासक
रामोपासकराम का उपासक
अनारदानाअनार का दाना
विभाध्यक्षविभाग का अध्यक्ष
राजपुरूषराजा का पुरूष
घुड़दौड़ घोड़ों की दौड़
पर्णशालापर्णों की शाला
सूर्योदयसूर्य का उदय
जगन्नाथजगत् का नाथ
चंद्रोदयचंद्र का उदय
मतदातामत का दाता
मंत्रिपरिषद्मंत्रियों की परिषद
सत्रावसानसत्र का अवसान
अछूतोद्धारअछूतों का उद्धार
मनः स्थितिमन की स्थिति
प्राणाहुतिप्राणों की आहुती
मनोविकारमन का विकार
रामायणराम का अयन
पुस्तकालयपुस्तक का आलय
चर्मरोगचर्म का रोग
रंगभेदरंग का भेद
रूपांतररूप का अंतर
पथपरिवहनपथ का परिवहन
मंत्रिपरिषद्मत्रियों की परिषद्

अधिकरण तत्पुरुष (में,पर) का लोप

वीरश्रेष्ठवीरों में श्रेष्ठ
जलमग्नजल में मग्न
सिंहासनारुढ़सिंहासन पर आरुढ़
शरणागतशरण में आगत
विश्वविख्यातविश्व में विख्यात
क्षत्रियाधमक्षत्रियों में अधम
व्यवहारकुशलव्यवहार में कुशल
नरोत्तम नरों में उत्तम
क्षत्रियाधमक्षत्रियों में अधम
आत्मनिर्भरआत्म पर निर्भर
शास्त्रप्रवीणशास्त्रों में प्रवीण
गृहप्रवेश           गृह में प्रवेश
ग्रामवास           ग्राम में वास
नराधम नरों में अधम
कार्यकुशलकार्य में कुशल
कविश्रेष्ठकवियों में श्रेष्ठ
मुनिश्रेष्ठमुनियों में श्रेष्ठ
हरफनमौलाहर फन में मौला
आत्मनिर्भरआत्म पर निर्भर
तर्ककुशलतर्क में कुशल
लोकप्रियलोक में प्रिय
कर्मनिष्ठकर्म में निष्ठ
वाग्वीरवाक् (बोलने) में वीर
सर्वोत्तमसर्व में उत्तम
मुनिश्रेष्ठ            मुनियों में श्रेष्ठ
कविराजकवियों में राजा
धर्मरतधर्म में रत
कानाफूसीकान में फुसफुसाहट
वनवासवन में वास
ध्यानमग्नध्यान में मग्न

नञ तत्पुरुष
नञ तत्पुरुष समास के अंतर्गत पहला खंड नकारात्मक अर्थात् न, ना, अ अथवा अन् उपसर्ग होता है। इस समास से अभाव या निषेध का अर्थ प्रतीत होता है। 

अयोग्यन योग्य
अनाथन नाथ
अपठितन पठित
नालायकन लायक
अपरिचितन परिचित
असभ्यन सभ्य
अनादिन आदि
असंभवन संभव
अनंतन अंत

(3) कर्मधारय समास 

जिस समास में प्रथम पद या पूर्व पद विशेषण तथा दूसरा पद या उत्तर पद विशेष्य हो उसे कर्मधारय समास कहा जाता है। इस समास में विशेषण विशेष्य या उपमान उपमेय सम्बन्ध पाया जाता है। जैसे-
 

नीलाकाशनीला है जो आकाश
चन्द्रमुखचन्द्रमा के समान मुख
महर्षि   महान है जो ऋषि
महात्मामहान है जो आत्मा
सज्जन सत् है जो जन 
पुरुषरत्नपुरुष के रूप में है रत्न जो
महापुरुषमहान है पुरुष जो
लालकुर्तीलाल है कुर्ती जो
चरण-कमलकमल के समान चरण
भला-मानुषभला है मनुष्य जो
कृष्ण सर्पकृष्ण (काला) है सर्प जो
महाराजमहान है राजा जो
परमानन्दपरम है आनन्द जो
सुयोगअच्छा है योग जो
मुखचंद्र चंद्रमा के समान मुख है जो
क्रोधाग्निअग्नि के समान है क्रोध जो
परमाणुपरम है अणु जो
परमात्मापरम है आत्मा जो
भवसागरभव रूपी सागर
खाद्यान्नखाद्य है जो अन्न
श्वेताम्बरश्वेत है जो अंबर
महाजनमहान है जो जन
महाविद्यालयमहान है जो विद्यालय
स्त्रीरत्नस्त्री रूपी रत्न
कमलनयनकमल के समान नयन
नरसिंहसिंह रूपी नर

(4) द्विगु समास

जिस समस्त पद का प्रथम पद संख्याचाचक हो और पूरा पद संख्या के समाहार या योग का वर्णन करे।
जिस समास में प्रथम पद या पूर्व पद संख्यावाची हो द्विगु समास कहलाता है। जैसे- 

त्रिफलातीन फलों का समूह
पंचवटीपाँच वटों (वृक्षों का समूह)
नवरत्न नव रत्नों का समूह
अठन्नी आठ आनों का समूह
त्रिगुणतीन गुणों का समूह
चौराहा  चार राहों का समाहार
शतांशशत (सौवां) अंश
पंचप्रमाणपाँच प्रमाण
दुधारीदो धार वाली        
अष्टाध्यायीअष्ट अध्यायों का समूह
षट्कोणषट् (छह) कोणों का समूह
अष्टभुजअष्ट (आठ) भुजाओं का समूह
त्रिदोषत्रि (तीन) दोषों का समूह
सप्तर्षिसात ऋषियों का समाहार
चतुर्भुज चार भुजाओं का समूह
दशाब्दीदस अब्दों (वर्षों) का समूह
त्रिवेणी  तीन वेणियों (धाराओं) का समूह
द्विवेदी  दो वेदों का ज्ञाता
दुपहियादो पहियों (चक्के) वाला
चतुर्वर्गचार वर्गों का समूह
दुमंजिलादो मंजिलों का समाहार
चौपायाचार पावों का समूह
सतसईसात सौ पदों का समूह
चतुर्वेदचार वेदों का समाहार
द्विगुदो गौओं का समूह
चौमासाचार मासों का समाहार
त्रिलोकतीन लोकों का समाहार
पंचतंत्रपंच तंत्रो का समाहार
सप्ताहसात दिनों का समाहार
शताब्दीशत शब्दों का समाहार
दुराहादो राहों का समाहार


(5) द्वन्द्व समास

जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। समास विग्रह करने पर ‘और’ अव्यय नजर आता है। 
इसमें दोनों पदों को मिलाते समय मध्य-स्थित योजक लुप्त हो जाता हैं।

सेठ-साहूकारसेठ और साहूकार
राधा-कृष्णराधा और कृष्ण
राजा-रानीराजा और रानी
दाल-रोटीदाल और रोटी
काला-सफेदकाला और सफेद
भाई-बहिनभाई और बहन
नीचे-ऊपरनीचे और ऊपर
गौरीशंकरगौरी और शंकर
भलाबुराभला और बुरा
धर्माधर्मधर्म और अधर्म
आना-जानाआना और जाना
बाप-दादाबाप और दादा
लोक-परलोकलोक और परलोक
दाल-भातदाल और भात
धर्माधर्मधर्म और अधर्म
शिव-पार्वतीशिव और पार्वती
देवासुरदेव और असुर
जल-वायुजल और वायु
तन-मनतन और मन
हाथी-घोड़ेहाथी और घोड़े
दिन-रातदिन और रात
लाभालाभलाभ या अलाभ
ठण्डा-गरमठण्डा या गरम
धर्माधर्मधर्म या अधर्म
सुख-दुखसुख या दुख
आय-व्ययआय या व्यय
जीवन-मरणजीवन या मरण
यश-अपयशयश या अपयश
घटते-बढ़तेघटते या बढ़ते
राग-द्वेषराग या द्वेष
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मण
नहाया-धोयानहाया, धोया आदि
बाल-बच्चेबाल, बच्चे आदि
अन्नजलअन्न और जल
माँ-बापमाँ और बाप
हाथ-पाँवहाथ,पाँव आदि
फल-फूलफल, फूल आदि
थोड़ा-बहुतथोड़ा या बहुत
आज-कलआज या कल

 (6) बहुव्रीहि समास

जहाँ पहला पद और दूसरा पद मिलकर किसी तीसरे पद की और संकेत करते हैं वहाँ बहुव्रीहि समास होता हैं।
जिस समास में अन्य पद प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे-
 

चक्रधर             चक्र को धारण किये हुए है जो (विष्णु)
नीलकण्ठ          नीला है कण्ठ जिसका (शिव)
गजानन             गज के समान आनन (मुख) है जिसका (गणेश)
दशमुख             दस है मुख जिसके (रावण)
गिरधर              गिरि (पहाड़) को धारण करने वाला (कृष्ण)
चतुर्भुज             चार भुजाओं वाला है जो (विष्णु)
चतुर्मुख             चार है मुख जिसके (ब्रह्मा)
त्रिनेत्तीन नेत्रों वाला है जो (शंकर)
पंचानन             पांच मुखों वाला है जो (शिव)
षडानन छः है मुख जिसके (कार्तिकेय)
त्रिलोचन           तीन है लोचन जिसके वह(शिव)
पतितपावनपतितों को पावन करने वाले हैं जो (ईश्वर)
पवनपुत्र            पवन का पुत्र है जो (हनुमान)
वीणापाणि         वीणा है हाथ में जिसके (सरस्वती)
शूलपाणि          शूल है पाणि में जिसके (शिव)
चन्द्रशेखर          चन्द्रमा है शिखर पर जिसके (शिव)
दिनकर             दिन को करने वाला है जो(सूर्य)
गिरधर              गिरि को धारण करने वाला है जो (कृष्ण)
पद्मासना           पद्म (कमल) है आसन जिनका (लक्ष्मी)
सूर्यपुत्र              सूर्य का पुत्र है जो (कर्णं)
कुसुमशर           कुसुम के शर (बाण) हैं जिनके (कामदेव)
अनंग                अंग नहीं है जिनका वो (कामदेव)
अष्टाध्यायी         आठ हैं अध्याय जिसके वो (संस्कृत व्याकरण पाणिनी कृत)
वाग्देवी वाक् भाषा की देवी है जो (सरस्वती)
मोदकप्रिय         मोदक (लड्डू) हैं प्रिय जिनको (गणेश)
मुरारी               मुर (राक्षस विशेष) के अरि (शत्रु) हैं जो (कृष्ण)
शचीपति           शची के पति हैं जो (इन्द्र)
मनोज              मन में जन्म लेता है जो (कामदेव)
रेवतीरमण         रेवती के साथ रमण करते हैं जो (बलराम)
दशमुख              दश हैं मुख जिसके (रावण)
वीणापाणि         वीणा है पाणि में जिसके (सरस्वती)
शूलपणि                       शूल है पाणि (हाथ) में जिसके (शिव)
चतुरानन           चार हैं आनन जिसके (ब्रह्मा)
सतखण्डा         सात हैं खण्ड जिसमें
चतुर्भुज             चार है भुजाएँ जिसकी (विष्णु)
वज्रांग   वज्र के समान है अंग जिसका (हनुमान)
महेश्वर              महान है ईश्वर जो (शिव)
वस्त्रकार           वस्त्रों को बनाता है जो (दर्जी)
घासफूस           घास और फूस के समान है जो (महत्वहीन वस्तुएँ)
महावीर            महान है वीर जो (हनुमान)
चंद्रचूड़              चन्द्र है चूड़ (सिर) पर जिसके (शिव)
पुंडरीककमल के समान है जो (विष्णु)
वारिज              वारि (जल) से जन्म लेता है जो (कमल)
वक्रतुंड            तुंड (मुख) है वक्र (टेढ़ा) जिनका (गणेश)
हलधर              हल को धारण करने वाला है जो (बलराम)
शचीपतिशची का पति – इंद्र
देवराजदेवों का राजा – इंद्र
मनोजमन में जन्म लेने वाला – कामदेव
अशुतोषशीघ्र तुष्ट हो जाते हैं- शिव
कपीश्वरवह जो कपियों(वानर) के ईश्वर है- हनुमान

समास के उदाहरण

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
परोक्षअक्षि के परे/ आँख के पीछे (पीठ पीछे)अव्ययीभाव
समक्षअक्षि के सामने / आँख के सामनेअव्ययीभाव
प्रत्यक्षअक्षि के आगे / आँखो के सामनेअव्ययीभाव
भरपेटपेट भरकर / पेट भर केअव्ययीभाव
दिन दिनदिन के बाद दिनअव्ययीभाव
गगनचुम्बीगगन को चूमने वालाकर्म तत्पुरुष
गिरहकटगिरह को काटने वाला / गाँठ को खोलने(काटने)कर्म तत्पुरुष
मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वालाकर्म तत्पुरुष
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्तकर्म तत्पुरुष
चिड़ीमारचिड़ियों को मारने वालाकर्म तत्पुरुष
प्रेमसिक्तप्रेम से सिक्तकरण तत्पुरुष
मदान्धमद से अन्धा / मद से अंधकरण तत्पुरुष
मुँहमाँगामुँह से माँगाकरण तत्पुरुष
कामचोरकाम से चोरकरण तत्पुरुष
श्रमजीवीश्रम से जीने वालाकरण तत्पुरुष
पददलितपद से दलितकरण तत्पुरुष
तुलसीकृततुलसी द्वारा कृतकरण तत्पुरुष
दुखसन्तप्तदुःख से सन्तप्तकरण तत्पुरुष
रोगग्रस्तरोग से ग्रस्तकरण तत्पुरुष
जलसिक्तजल से सिक्तकरण तत्पुरुष
रसभरारस से भराकरण तत्पुरुष
मदमातामद से माता / मद से मत हुआकरण तत्पुरुष
शोकाकुलशोक से आकुल (व्याकुल)करण तत्पुरुष
करुणापूर्णकरुणा से पूर्णकरण तत्पुरुष
मेघाच्छन्नमेघ से आच्छन्नकरण तत्पुरुष
शोकग्रस्तशोक से ग्रस्तकरण तत्पुरुष
रोगपीड़ितरोग से पीड़ितकरण तत्पुरुष
शोकार्तशोक से आर्तकरण तत्पुरुष
विधानसभाविधान के लिए सभासम्प्रदान तत्पुरुष
शिवार्पणशिव के लिए अर्पणसम्प्रदान तत्पुरुष
देवालयदेव के लिए आलयसम्प्रदान तत्पुरुष
रसोईघररसोई के लिए घरसम्प्रदान तत्पुरुष
गौशालागौ के लिए शाला / गायों के लिए शालासम्प्रदान तत्पुरुष
सभाभवनसभा के लिए भवनसम्प्रदान तत्पुरुष
राहखर्चराह के लिए खर्चसम्प्रदान तत्पुरुष
लोकहितकारीलोक के लिए हितकारीसम्प्रदान तत्पुरुष
ब्राह्मणदेयब्राह्मण के लिए देयसम्प्रदान तत्पुरुष
मार्गव्ययमार्ग के लिए व्ययसम्प्रदान तत्पुरुष
पुत्रशोकपुत्र के लिए शोकसम्प्रदान तत्पुरुष
स्नानघरस्नान के लिए घरसम्प्रदान तत्पुरुष
देशभक्तिदेश के लिए भक्तिसम्प्रदान तत्पुरुष
डाकमहसूलडाक के लिए महसूलसम्प्रदान तत्पुरुष
साधुदक्षिणासाधु के लिए दक्षिणासम्प्रदान तत्पुरुष
मरणोत्तरमरण से उत्तरअपादान तत्पुरुष
बलहीनबल से हीनअपादान तत्पुरुष
धर्मच्युतधर्म से च्युतअपादान तत्पुरुष
धनहीनधन से हीनअपादान तत्पुरुष
पदच्युतपद से च्युतअपादान तत्पुरुष
पदभ्रष्टपद से भ्रष्टअपादान तत्पुरुष
धर्मविमुखधर्म से विमुखअपादान तत्पुरुष
स्थानभ्रष्टस्थान से भ्रष्टअपादान तत्पुरुष
व्ययमुक्तव्यय से मुक्तअपादान तत्पुरुष
मायारिक्तमाया से रिक्तअपादान तत्पुरुष
प्रेमरिक्तप्रेम से रिक्तअपादान तत्पुरुष
पापमुक्तपाप से मुक्तअपादान तत्पुरुष
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्टअपादान तत्पुरुष
ऋणमुक्तऋण से मुक्तअपादान तत्पुरुष
शक्तिहीनशक्ति से हीनअपादान तत्पुरुष
ईश्वरविमुखईश्वर से विमुखअपादान तत्पुरुष
नेत्रहीननेत्र से हीनअपादान तत्पुरुष
स्थानच्युतस्थान से च्युतअपादान तत्पुरुष
लोकोत्तरलोक से उत्तरअपादान तत्पुरुष
रामोपासकराम का उपासकसम्बन्ध तत्पुरुष
अन्नदानअन्न का दानसम्बन्ध तत्पुरुष
गंगाजलगंगा का जलसम्बन्ध तत्पुरुष
श्रमदानश्रम का दानसम्बन्ध तत्पुरुष
खरारिखर का अरिसम्बन्ध तत्पुरुष
वीरकन्यावीर की कन्यासम्बन्ध तत्पुरुष
रामायणराम का अयनसम्बन्ध तत्पुरुष
त्रिपुरारित्रिपुर का अरिसम्बन्ध तत्पुरुष
देवालयदेव का आलयसम्बन्ध तत्पुरुष
राजभवनराजा का भवनसम्बन्ध तत्पुरुष
आनन्दाश्रमआनन्द का आश्रमसम्बन्ध तत्पुरुष
प्रेमोपासकप्रेम का उपासकसम्बन्ध तत्पुरुष
हिमालयहिम का आलयसम्बन्ध तत्पुरुष
चन्द्रोदयचन्द्र का उदयसम्बन्ध तत्पुरुष
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पतिसम्बन्ध तत्पुरुष
देशसेवादेश की सेवासम्बन्ध तत्पुरुष
पुस्तकालयपुस्तक का आलयसम्बन्ध तत्पुरुष
चरित्रचित्रणचरित्र का चित्रणसम्बन्ध तत्पुरुष
राजपुत्रराजा का पुत्रसम्बन्ध तत्पुरुष
राजगृहराजा का गृहसम्बन्ध तत्पुरुष
मृगछौनामृग का छौनासम्बन्ध तत्पुरुष
अमरसआम का रससम्बन्ध तत्पुरुष
ग्रामोद्धारग्राम का उद्धारसम्बन्ध तत्पुरुष
राजदरबारराजा का दरबारसम्बन्ध तत्पुरुष
सेनानायकसेना का नायकसम्बन्ध तत्पुरुष
सभापतिसभा का पतिसम्बन्ध तत्पुरुष
गुरुसेवागुरु की सेवासम्बन्ध तत्पुरुष
विद्यासागरविद्या का सागरसम्बन्ध तत्पुरुष
आनन्दमग्नआनन्द में मग्नअधिकरण तत्पुरुष
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तमअधिकरण तत्पुरुष
नराधमनरों में अधम (नीच)अधिकरण तत्पुरुष
ग्रामवासग्राम में वासअधिकरण तत्पुरुष
गृहप्रवेशगृह में प्रवेशअधिकरण तत्पुरुष
शास्त्रप्रवीणशास्त्रों में प्रवीणअधिकरण तत्पुरुष
दानवीरदान में वीरअधिकरण तत्पुरुष
आत्मनिर्भरआत्म पर निर्भरअधिकरण तत्पुरुष
कविश्रेष्ठकवियों में श्रेष्ठअधिकरण तत्पुरुष
क्षत्रियाधमक्षत्रियों में अधम(नीच)अधिकरण तत्पुरुष
नरोत्तमनरों में उत्तमअधिकरण तत्पुरुष
शरणागतशरण में आगतअधिकरण तत्पुरुष
ध्यानमग्नध्यान में मग्नअधिकरण तत्पुरुष
मुनिश्रेष्ठमुनियों में श्रेष्ठअधिकरण तत्पुरुष
महात्मामहान आत्मा / महान है जो आत्माकर्मधारय
नवयुवकनव युवक / नव है जो युवककर्मधारय
महावीरमहान वीरकर्मधारय
सद्भावनासत् भावनाकर्मधारय
महात्मामहान आत्मा / महान है जो आत्माकर्मधारय
छुटभैये / छुटभैयाछोटे भैये / छोटा है जो भैयाकर्मधारय
सज्जनसत् जन / सत है जो जनकर्मधारय
नीलोत्पलनील उत्पल/ नीला है जो उत्पल (कमल)कर्मधारय
महापुरुषमहान् पुरुषकर्मधारय
परमेश्वरपरम ईश्वर / परम है जो ईश्वरकर्मधारय
सन्मार्गसत् मार्गकर्मधारय
विद्युद्वेगविद्युत के समान वेगकर्मधारय
लौहपुरुषलौह के समान पुरुषकर्मधारय
घनश्यामघन जैसा श्याम / घन के समान श्यामकर्मधारय
कुसुमकोमलकुसुम के समान कोमलकर्मधारय
नररत्ननर रत्न के समानकर्मधारय
चरणकमलचरण कमल के समान / कमल के समान चरणकर्मधारय
मुखचन्द्रमुख ही है चन्द्र / चन्द्र के समान मुखकर्मधारय
अधरपल्लवअधर पल्लव के समानकर्मधारय
मुखचन्द्रमुख चन्द्र के समान/ चन्द्र के समान मुखकर्मधारय
पुरुषरत्नपुरुषों में रत्न / पुरुष रूपी रत्नकर्मधारय
स्त्रीरत्नरत्न रुपी स्त्री / स्त्री रूपी रत्नकर्मधारय
पुत्ररत्नरत्न रुपी पुत्र / पुत्र रूपी रत्नकर्मधारय
विद्यारत्नविद्या ही है रत्न / विद्या रूपी रत्नकर्मधारय
चतुर्वेदचार वेदों का समाहारद्विगु
त्रिभुवनतीन भुवनों (संसार) का समाहारद्विगु
पंचपात्रपाँच पात्रों का समाहारद्विगु
त्रिकालतीन कालों का समाहारद्विगु
सतसईसात सौ का समाहारद्विगु
चवन्नीचार आनों का समाहार / समूहद्विगु
त्रिफलातीन फलों का समाहारद्विगु
नवग्रहनौ ग्रहों का समाहारद्विगु
षड्‌रसछह रसों का समाहारद्विगु
त्रिगुणतीन गुणों का समाहारद्विगु
त्रिलोकतीन लोकों का समाहारद्विगु
दुधारीदो धार वाली / दो धारों से युक्तद्विगु
दुपहरदूसरा पहरद्विगु
दुसूतीदो सूतों वालाद्विगु
पंचप्रमाणपाँच प्रमाणद्विगु
शतांशशत अंश / शत(सौवां) अंशद्विगु
सहस्राननसहस्त्र(हजार) है आनन(मुख) जिसके (विष्णु) /शेषनागबहुव्रीहि
प्राप्तोदकप्राप्त हैं उदक जिसे / प्राप्त हुआ है जल जिसकोंबहुव्रीहि
सहस्रकरसहस्र हैं कर जिसकेबहुव्रीहि
दिगम्बरदिक् है अम्बर जिसका / दिशाएँ ही है वस्त्र जिनके जैन धर्म का सम्प्रदायबहुव्रीहि
पीताम्बरपीत है अम्बर जिसका / पीले वस्त्रों वाला (कृष्ण)बहुव्रीहि
चतुर्भुजचार हैं भुजाएँ जिसकी /बहुव्रीहि
नेकनामनेक है नाम जिसका / नेक (अच्छे) कार्यो से है नाम जिसका- महापुरुष/ प्रसिद्ध व्यक्तिबहुव्रीहि
चौलड़ीचार हैं लड़ियाँ जिसमेंबहुव्रीहि
सतखण्डासात हैं खण्ड जिसमें / बड़ा महलबहुव्रीहि
मिठबोलामीठी है बोली जिसकी / मृदुभाषीबहुव्रीहि
चतुराननचार हैं आनन जिसके / ब्रह्माबहुव्रीहि
निर्धननिर्गत है धन जिससेबहुव्रीहि
वज्रायुधवज्र है आयुध जिसका / (इन्द्र)बहुव्रीहि
जितेन्द्रियजीती हैं इन्द्रियाँ जिसने / निष्काम/वीतरागबहुव्रीहि
शान्तिप्रियशान्ति है प्रिय जिसेबहुव्रीहि
निर्जननहीं है जन जहाँ / निकल गए जन जहाँ सेबहुव्रीहि
वज्रदेहवज्र है देह जिसकी / वज्र के समान देह(शरीर) है जिनका- हनुमानबहुव्रीहि
सचेतचेत के साथ है जोबहुव्रीहि
लम्बोदरलम्बा है उदर जिनका (गणेश)बहुव्रीहि
सदेहदेह के साथ है जोबहुव्रीहि
शूलपाणिशूल है पाणि में जिसके / (शिव)बहुव्रीहि
गोपालवह, जो गौ का पालन करे / गो का पालन करने वाला (कृष्ण)बहुव्रीहि
सबलबल के साथ है जोबहुव्रीहि
वीणापाणिवीणा है पाणि में जिसके / हाथ (पाणि) में है वीणा जिसके-सरस्वतीबहुव्रीहि
सपरिवारपरिवार के साथ है जोबहुव्रीहि
बेरहमनहीं है रहम जिसमेंबहुव्रीहि
दशमुखदश हैं मुख जिसके (रावण)बहुव्रीहि
धर्माधर्मधर्म और अधर्मद्वन्द्व
थोड़ा-बहुतथोड़ा या बहुतद्वन्द्व
भलाबुरा भला या बुराद्वन्द्व
ठण्डा-गरमठण्डा या गरमद्वन्द्व
गौरीशंकरगौरी और शंकरद्वन्द्व
राधाकृष्णराधा और कृष्णद्वन्द्व
लाभालाभलाभ या अलाभद्वन्द्व
सीतारामसीता और रामद्वन्द्व
भला-बुराभला और बुराद्वन्द्व
लेनदेनलेन और देनद्वन्द्व
पाप-पुण्यपाप या पुण्यद्वन्द्व
धनुर्बाणधनुष और बाणद्वन्द्व
पापपुण्यपाप और पुण्यद्वन्द्व
दालभातदाल और भातद्वन्द्व
शिवपार्वतीशिव और पार्वतीद्वन्द्व
देशविदेशदेश और विदेशद्वन्द्व

Faq

समास क्या है समास के भेद?

समास शब्द की रचना ‘ सम + आस ‘ से मिलकर हुई है। सम् शब्द का अर्थ ‘ पास ‘ तथा ‘ आस ‘ का अर्थ ‘ आना या बैठना ‘ होता है। अर्थात एक या एक से अधिक पदो के बीच के विभक्ति – चिन्ह योजको या शब्द – शब्दांशौ को हटाकर पास – पास बैठाने को ‘ समास ‘ कहते है।

समास के कितने भेद हैं example?

6

समास कितने प्रकार के होते हैं और उनकी परिभाषा?

samas 6 prakr ke hote hain

समास कैसे बनता है?

समास-प्रक्रिया में जिन दो शब्दों का मेल होता है, उनके अर्थ परस्पर भिन्न होते हैं तथा इन दोनों के योग से जो एक नया शब्द बनाते हैं; उसका अर्थ इन दोनों से अलग होता है।

Q.1
‘जेबकतरा’ शब्द में कौन-सा समास है?
1 कर्मधारय समास
2 अपादान तत्पुरुष समास
3 संप्रदान तत्पुरुष समास
4 कर्म तत्पुरुष समास

Q.2 ‘अल्पबचत’ में कौन-सा समास है?

1 अव्ययीभाव समास
2 कर्मधारय समास
3 तत्पुरुष समास
4 द्वन्द्व समास

Solution
अल्पबचत = अल्प है जिसकी बचत (कर्मधारय समास) कर्मधारय समास:- ‘दूसरा पद प्रधान’ इस समास में विशेषण और विशेष्य अर्थात् उपमान और उपमेय का अर्थ बोध होता है; जैसे:- सन्मार्ग = सत् (अच्छा) है जो मार्ग, बदबू = बद(बुरी) है जो बू आदि।

Q.3
‘तीन माह का समाहार’ समास-विग्रह का समास रूप होगा-

1
तिरंगा

2
तिमाही

3
तिकोना

4
त्रिवेदी

Solution
-तीन माह का समाहार समास-विग्रह का समास रूप = तिमाही (द्विगु समास)
द्विगु समास:- (i) द्विगु समास ने प्राय: पूर्व पद संख्या वाचक होता है तो कभी – कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसे कि बहुव्रीहि समास में देखा जाता है। जैसे:- चौपाया (चार पाँव वाला)
विशेष:- एक से लेकर दस और दस से भाज्य संख्याओं में द्विगु समास आता है।

Q.4
निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?

1
तिरंगा = तीन रंगों का समूह

2
त्रिफला = तीन फलों का मिश्रण

3
षण्मुख = छह मुखों का समूह

4
चौपाया = चार राहों का समूह

Solution
‘चौपाया’ = चार पैरों का समूह (द्विगु समास) चौराहा = चार राहों का समूह द्विगु समास:- (i) द्विगु समास ने प्राय: पूर्व पद संख्या वाचक होता है तो कभी – कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसे कि बहुव्रीहि समास में देखा जाता है।
जैसे:- अठन्नी = आठ आनों का समूह
विशेष:- एक से लेकर दस और दस से भाज्य संख्याओं में द्विगु।

Q.5
निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?

1
तिरंगा = तीन रंगों का समूह

2
त्रिफला = तीन फलों का मिश्रण

3
षण्मुख = छह मुखों का समूह

4
चौपाया = चार राहों का समूह

Solution
‘चौपाया’ = चार पैरों का समूह (द्विगु समास) चौराहा = चार राहों का समूह द्विगु समास:- (i) द्विगु समास ने प्राय: पूर्व पद संख्या वाचक होता है तो कभी – कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसे कि बहुव्रीहि समास में देखा जाता है।
जैसे:- अठन्नी = आठ आनों का समूह
विशेष:- एक से लेकर दस और दस से भाज्य संख्याओं में द्विगु।

Q.6
निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सुमेलित है?

1
नवरस = नौ रसों का समूह

2
सतसई = सात सौ का समूह

3
शताब्दी = 10 वर्षों का समूह

4
अठवारा = आठ बाजारों का समूह

Solution
नवरस = नौ रसों का समूह (द्विगु समास) द्विगु समास:-
(i) द्विगु समास ने प्राय: पूर्व पद संख्या वाचक होता है तो कभी – कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसे कि बहुव्रीहि समास में देखा जाता है।
जैसे:- नवरात्र = नौ विशेष रात्रियों का समूह।

  • सतसई = सात सौ दोहों का समूह
  • शताब्दी = सौ वर्षों का समूह
  • अठवाश = आठवें वार को लगने वाला बाजार दशाब्दी = 10 वर्षों का समूह
    (तीनों शब्द द्विगु समास के उदाहरण हैं।)
    विशेष:- एक से लेकर दस और दस से भाज्य संख्याओं में द्विगु समास होगा।

Q.7
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?

1
न बहुत ठंडा न बहुत गर्म – समशीतोष्ण

2
जिसने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है – सद्यप्रसता

3
सभी देशों/स्थानों से संबंध रखने वाला – समदर्शी

4
आकार से युक्त (मूर्तिमान) – साकार

Solution

  • सभी देशों/स्थानों से सम्बन्ध रखने वाला – सार्वदेशिक
  • समदर्शी – सब को समान भाव से देखने वाला।
  • शेष विकल्प 1, 2 व 4 तीनों सही है।

Q.8
‘मनोज’ शब्द में कौन-सा समास है?

1
कर्मधारय समास

2
बहुव्रीहि समास

3
तत्पुरुष समास

4
द्वंद्व समास

Solution
मनोज = मन में जन्म लेने वाला = कामदेव (बहुव्रीहि समास)/बहुव्रीहि समास – अन्य पद प्रधान बहुव्रीहि समास का कोई भी पद प्रधान नहीं होता बल्कि दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद की प्रधानता का बोध कराते हैं। जैसे – कपीश्वर, रघुपति आदि।

Q.9
अव्ययीभाव समास के बारे में सत्य कथन है-

1
प्रथम पद अव्यय

2
प्रथम पद प्रधान

3
उपसर्ग युक्त व शब्दों की पुनरावृत्ति

4
उपर्युक्त सभी

Solution
अव्ययीभाव समास:-
(i) पहला पद प्रधान होता है।
(ii) पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
(वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक के अनुसार नहीं बदलते, उन्हें अव्यय कहते हैं।)
(iii) यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, वहाँ भी अव्ययी भाव समास होता है।
(iv) संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी अव्ययीभाव समास होते हैं।
अव्ययीभाव के बारे में ये सभी कथन सत्य है।
जैसे – यथाक्रम – क्रम के अनुसार
उपसर्ग = यथा
मूल शब्द = क्रम

Q.10
पद की प्रधानता के आधार पर समास के भेद हैं-

1
5

2
3

3
4

4
6

Solution

  • पद की प्रधानता के आधार पर समास के 4 भेद हैं।
  1. पहला पद प्रधान – अव्ययीभाव समास
  2. दूसरा पद प्रधान – द्विगु, तत्पुरुष, कर्मधारय समास
  3. दोनों पद प्रधान – द्वंद्व समास
  4. अन्य पद प्रधान – बहुव्रीहि समास

Q.11
‘सपरिवार’ का सही समास-विग्रह है-

1
परिवार के साथ

2
परिवार ही परिवार

3
संयुक्त परिवार

4
केवल परिवार

Solution

  • सपरिवार का सही समास-विग्रह है :- परिवार के साथ (अव्ययीभाव समास)
    अव्ययीभाव समास :-
    (i) पहला पद प्रधान होता है।
    (ii) पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
    (वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक के अनुसार नहीं बदलते, उन्हें ‘अव्यय’ कहते हैं।)
    (iii) यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, वहाँ भी अव्ययी समास होता है।
    (iv) संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी अव्ययीभाव समास होते हैं।
    जैसे – यथायोग्य, धड़ाधड़ आदि।

Q.12
‘दिन के बाद दिन’ समास-विग्रह का समास रूप होगा-

1
प्रत्येक दिन

2
दिनों-दिन

3
दिन ही दिन

4
केवल दिन

Q.13
‘आप – बीती’ का समास विग्रह है-

1
अपने आप करना

2
आप पर बीती

3
आपका दु:ख

4
केवल अपना सोचना

Solution

  • आप – बीती- आप पर बीती (अधिकरण तत्पुरुष समास)।
    अधिकरण तत्पुरुष समास- अधिकरण कारक चिह्न- ‘में, पर’ के लोप से बनने वाले समास; जैसे- कविराज= कवियों में राजा।

Q.14
किस विकल्प में कर्मधारय समास नहीं है-

1
महापुरुष

2
अधमरा

3
महात्मा

4
वनवास

Q.15
निम्नलिखित में से द्विगु समास का उदाहरण है-

1
पंचानन

2
त्रिनेत्र

3
पंचामृत

4
षडानन