राजस्थान की मृदा और मृदा संरक्षण Soils and Soil Conservation of Rajasthan

नमस्कार आज हम राजस्थान के भूगोल से सम्बंधित महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक राजस्थान की मृदा के बारे में अध्ययन करेंगे।

मृदा क्या है?

पृथ्वी की भू-पर्पटी/क्रस्ट पर पाए जाने वाले असंगठित कणों के आवरण है जिनका निर्माण जैविक-अजैविक संगठकों द्वारा होता है। 

‘मृदा’ भूमि की ऊपरी सतह होती है जो चट्टानों के टूटने फूटने, जलवायु, वनस्पति तथा अन्य जैविक प्रभावों से निर्मित होती है।

मृदा का निर्माण

राजस्थान की मृदा और मृदा संरक्षण Soils and Soil Conservation of Rajasthan
  • मृदा शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘सोलम’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है ’फर्श’।
  • मृदा के वैज्ञानिक अध्ययन को ‘पेडोलॉजी’ कहते हैं तथा मृदा के निर्माण की प्रक्रिया को ‘पेडोजिनेसिस’ कहते हैं।
  • राजस्थान की मृदा में अत्यधिक विविधता पाई जाती है जैसे
  • अरावली की ढालों पर पथरीली व कंकड़ युक्त मृदा है तो मरुस्थलीय प्रदेश में रेतीली बलुई मृदा।
  • दक्षिण पूर्व में मालवा का पठारी भाग होने से काली मृदा है तो चम्बल, बनास व माही नदियों के किनारे उपजाऊ जलोढ़ मृदा पाई जाती है।

राजस्थान की मृदा का वर्गीकरण

राजस्थान की मृदा का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से है।

राजस्थान में मृदा का वर्गीकरण
राजस्थान की मृदा

राजस्थान की मृदा वैज्ञानिक वर्गीकरण- 

राजस्थान की मृदा का पहला वर्गीकरण है वैज्ञानिक वर्गीकरण।

1. एरिडोसॉल– शुष्क मृदा/ मरूस्थल

2. एन्टीसॉल– रेतीली बलुई / अर्द्धशुष्क मरूस्थल

3. इन्सेप्टीसॉल्स– लाल मिट्‌टी /पर्वतीय मिट्‌टी

4. एल्फीसॉल्स– जलोढ़ मिट्‌टी

5. वर्टीसोल्स – काली मिट्‌टी

–  मृदा की उत्पत्ति, रासायनिक संरचना तथा अन्य गुणों के आधार पर अमेरिका (USA) मृदा सर्वेक्षण विभाग ने वर्ष 1975 में मृदा का वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।

–  वैज्ञानिक वर्गीकरण के आधार पर पाँच प्रकार की मृदा पाई जाती है-

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राजस्थान की मृदा

(1)  एरिडीसोल्स (शुष्क मृदा)-  

–  यह मृदा शुष्क जलवायु क्षेत्र अर्थात् मरुस्थलीय क्षेत्र में पाई जाती है जहाँ तापमान तो ज्यादा होता है पर नमी कम होती है। अत: यह शुष्क मृदा होती है। इसमें जैविक तत्त्वों का अभाव पाया जाता है।

–  एरिडीसोल्स पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनूंमें पाई जाती है।

–  इस मृदा में जल धारण क्षमता कम होती है।

(2)  एन्टीसोल्स- (रेतीली बलुई मृदा/ पीली-भूरी मिट्टी)-

–  राजस्थान की मृदा में सर्वाधिक विस्तार एन्टीसोल्स मृदा का है।

–  पश्चिमी राजस्थान के लगभग सभी जिलों में यह रेतीली बलुई मृदा पाई जाती है।

–  इसके दो उपमृदाकण हैं- सामेन्ट्स और फ्लूवेन्ट्स।

–  इस मृदा की जलधारण क्षमता न्यूनतम होती है। यह एक ऐसी मिट्टी है जिसमें विभिन्न प्रकार की जलवायु में स्थित मृदाओं का समावेश मिलता है।

(3)  इन्सेप्टीसोल्स (लाल मिट्टी)-

–  यह मृदा अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेश/अरावली पर्वतीय प्रदेश में पाई जाती है।

–  यह लाल मृदा होती है, जिसके लाल रंग होने का प्रमुख कारण लौह ऑक्साइड की प्रधानता होती है।

–  इसमें ह्यूमस तथा नाइट्रोजन की अधिकता होती है तथा यह मक्का की खेती हेतु उपयोगी होती है।

यह मृदा शुष्क जलवायु में कभी नहीं पाई जाती है।  

(4)  एल्फीसोल्स (जलोढ़ मृदा)- 

–  राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेशों में एल्फीसोल्स मृदा पाई जाती है।

–  यह मृदा राजस्थान की मृदा का सर्वाधिक उपजाऊ मृदा होती है।

–  इसमें कैल्सियम तथा फॉस्फोरस की अधिकता होती है। एल्फीसोल मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण तीव्र होता है।

–  यह मृदा जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, टोंक, सवाईमाधोपुर आदि जिलों में पाई जाती है।  

(5)  वर्टीसोल्स (काली मिट्टी)-

–  इस मृदा में अत्यधिक क्ले उपस्थित होती है।

–  यह मृदा राजस्थान के हाडौ़ती के पठारी क्षेत्र में पाई जाती है। यह काले रंग की मृदा होती है जो कपास हेतु उपयोगी होती है।

–  इसके कण बारीक होने से इसमें सर्वाधिक जल धारण क्षमता होती है।

–  इस मृदा में लोहा तथा एल्युमिनियम की प्रधानता पाई जाती है।

–  राज्य द्वारा सामान्य वर्गीकरण के आधार पर मिट्‌टी के 8 प्रकारों का उल्लेख किया गया है।   

(1)  जलोढ़ मृदा-

–  उपनाम– दोमट/काप/कछारी /बाढ़ वाली मृदा

–  इस मृदा का निर्माण नदियों द्वारा बहाकर लाए गए अवसादों के जमाव से होता है।

–  विस्तार – अलवर, भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर 

–  यह मृदा सर्वाधिक उपजाऊ होती है।

–  उत्पादन – गेंहू, राई, जौ, सरसो आदि।

–  इसमें नाइट्रोजन  ह्यूमस की कमी होती है।

–  इस मृदा में कैल्सियम, पोटाश व फॉस्फोरस पाया जाता है।

–  जलोढ़ मृदा चार प्रकार की होती हैं-  भाबर, तराई, बांगर, खादर

–  राजस्थान में सिर्फ बांगर और खादर ही पाई जाती है-

बांगर – प्राचीन जलोढ़ मिट्टी        

खादर – नवीन जलोढ़ मिट्‌टी

(2)  काली मृदा-

–  उपनाम– लावा मिट्‌टी/कपास मृदा/ रेगुर मृदा/ चेरनोचम मिट्‌टी/ज्वालामुखी मृदा

–  विस्तार– हाड़ौती का पठार (कोटा, बूँदी, बाराँ व झालावाड़) है। 

–  इस मृदा के कण बारीक होने से इसकी जल धारण क्षमता सर्वाधिक होती है इसलिए इसमें कपास की खेती अधिक की जाती है।

–  काली मिट्‌टी में लोहा और एल्युमिनियम पाया जाता है, जिसमें टीटेनोफेरस मैग्नेटाइट यौगिक का निर्माण होता है जो कि इस मृदा के काले रंग का होने का कारण है।

–  इस मिट्‌टी में कैल्शियम और पोटाश की अधिकता होती है।

–  नोट– इस मिट्‌टी के कण बारीक होते है एवं धूप खिलने पर इस मिट्‌टी में दरारे पड़ जाती है। अत: इसको स्वत: जुताई वाली मिट्‌टी भी कहा जाता है।

(3)  रेतीली बलुई मिट्टी-

–  उपनाम– बालू/प्यासी मिट्‌टी

–  विस्तार– पश्चिमी राजस्थान (मुख्यत: जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ एवं आंशिक शेखावाटी क्षेत्र)

–  इसका निर्माण टेथिस सागर के अवशेष के रूप में हुआ है।

–  इस मृदा के कण मोटे होने से इसकी जलधारण क्षमता न्यूनतम होती है।

–  उत्पादन– बाजरा (सर्वाधिक), मूंग, मोठ, ग्वार, चना

–  इस मृदा में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है।

–  इस मृदा के तीन प्रकार है-         

मिट्‌टी के प्रकारविस्तार
लाल मिट्‌टीनागौर, सीकर, झुंझुनू, चूरू
खारी मिट्‌टीजैसलमेर,बीकानेर,जोधपुर,बाड़मेर,नागौर
पीली-भूरी मिट्‌टीपाली, नागौर
राजस्थान की मृदा

(4)  क्षारीय मृदा/लवणीय मृदा-

–  उपनाम– रेह/ऊसर/कल्लर/चॉपेन-

–  विस्तार– गंगानगर, बीकानेर, जालौर, बाड़मेर, नागौर, फलौदी (जोधपुर), सांभर (जयपुर)

–  इस मिट्‌टी का निर्माण अधिक सिंचाई व शुष्क दशाओं वाली जलवायु मे होता है।

–  इस मृदा का निर्माण मृदा में लवणीय पदार्थों की अधिकता के कारण होता है।

–  यह मृदा सर्वाधिक अनुपजाऊ (उत्पादन क्षमता कम) होती है।

(5)  पर्वतीय मिट्‌टी-

–  उपनाम– वनीय मिट्‌टी/अधुरी निर्माण वाली मिट्‌टी

–  विस्तार– उदयपुर, सिरोही, अजमेर, राजसंमद (अरावली पर्वतीय प्रदेश)

–  उत्पादन की दृष्टि से यह मिट्‌टी अनुपजाऊ है।

–  अधूरी निर्माण वाली मिट्‌टी- क्योंकि इस मृदा का निर्माण पर्वतों के ऊपरी परत के अपक्षरण (टूटने) से होता है।

(6)  लाल चिकनी मिट्‌टी-

–  उपनाम– लोमी मिट्‌टी

–  विस्तार– बांसवाड़ा, चितौड़गढ़, डूँगरपुर, दक्षिणी उदयपुर (माही नदी बेसिन)

–  उत्पादन– गन्ना, चावल, मक्का

–  लाल मृदा में ह्यूमस व नाइट्रोजन की अधिकता पाई जाती है।

–  नोट– लौह ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण इस मिट्‌टी का रंग लाल होता है। 

(7)  लाल काली मिट्‌टी –

–  इस मिट्‌टी का विस्तार मुख्यत: उदयपुर, भीलवाड़ा एवं चितौड़गढ़ में है।

–  उत्पादन-मक्का, चावल, गन्ना, अफिम, सोयाबीन, कपास

(8)  भूरी मिट्‌टी-

–  इसे बजरी मिट्‌टी के नाम से भी जाना जाता है।

–  इसका विस्तार बनास नदी बेसिन (चितौड़गढ़, राजसमंद, टोंक, भीलवाड़ा, अजमेर) तथा लूनी नदी बेसिन (पाली एवं नागौर) में है।

–  उत्पादन– तम्बाकू, सरसो, कपास, गेंहू, जौ

–  राजस्थान का कृषि विभाग द्वारा मृदा का वर्गीकरण- 14 प्रकार

मिट्‌टीविस्तार
साई रोजेक्सश्रीगंगानगर
रेवेरिनाश्रीगंगानगर
मरुस्थली मृदाजैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, सीकर, नागौर, चूरू, झुंझुनूँ, श्रीगंगानगर
जिप्सीफेरसबीकानेर
धूसर-भूरी जलोढ़ मृदानागौर, पाली, सिरोही, जालौर, अजमेर
गैर चूना युक्त भूरी मृदानागौर, सीकर, झुंझुनूँ, जयपुर, अजमेर, अलवर
नवीन जलोढ़ मृदाजयपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, अलवर
पीली-भूरी मृदाभीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, टोंक, जयपुर, सवाई माधोपुर
नवीन भूरी मृदाअजमेर एवं भीलवाड़ा
पर्वतीय मृदाकोटा एवं उदयपुर
लाल-लोमी मृदाबाँसवाड़ा एवं डूँगरपुर
काली गहरी मध्यम मृदाभीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, कोटा, बूँदी, भरतपुर
केल्सी ब्राउन मरुस्थली मृदाजैसलमेर एवं बीकानेर
मरुस्थल एवं बालुका-स्तूपबाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर
राजस्थान की मृदा

 नोट:  रेवेरिना मृदा-

–  राजस्थान में घग्घर और सतलु के मध्य के मैदान में रेवेरिना मृदा पाई जाती है जो गेहूँ की फसल हेतु उपयोगी होती है। रेवेरिना मृदा में जब लवणता की मात्रा बढ़ जाती है तो वह साईरोजेक्स कहलाती है।

–  रेवेरिना और साइरोजेक्स दोनों प्रकार की मृदा श्रीगंगानगर में पाई जाती है।

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–  अपरदन– अपरदन में मृदा की ऊपरी परत का कटाव हो जाता है इस कारण अपरदन को ‘मृदा एवं किसान’ की रेंगती हुई मृत्यु कहा जाता है।

राजस्थान की मृदा का अपरदन के कारण-

–  वायु- इससे मृदा का परतदार अपरदन होता है।

–  नदी जल- इससे मृदा का अवनालिका अपरदन होता है।

–  वर्षा जल- इससे मृदा का चादरी अपरदन होता है।

मृदा अपरदन को रोकने का उपाय- वृक्षारोपण

नोट- राजस्थान में मृदा के अपरदन का प्रमुख कारक वायु अपरदन है, जिससे की मृदा की ऊपरी परत का अपरदन हो जाता है तथा चम्बल नदी द्वारा देश में सर्वाधिक अवनालिका अपरदन किया जाता है।

–  सेम– नहरों के पानी के रिसाव के कारण आसपास की जमीन दलदली हो जाना ही सेम की समस्या है।

–  यह आमतौर पर नहरी इलाकों में होती है।

–  प्रभावी क्षेत्र– हनुमानगढ़, गंगानगर, भरतपुर (घना पक्षी विहार)

–  उपाय– सफेदे (यूकेलिप्टिस) के पौधे का रोपण करना।

–  क्षारीयता– इसमें मृदा की pH का मान 8 से अधिक हो जाता है।

–  क्षारीय मृदाओं की जल चालकता बहुत धीमी होती है।

–  सोडियम प्रतिशत में जैसे-जैसे वृद्धि होती है, वैसे-वैसे मृदा के जल संचयन तथा जल चालकता में अभाव होता है। अत: भूमि की अधिक क्षारीयता के कारण घुला हुआ जैविक पदार्थ मृदा के कणों की सतह पर जमा हो जाता है और उसका रंग काला हो जाता है।

–  उपाय– जिप्सम उर्वरकों का उपयोग किया जाता है।

–  लवणीयता– इसमें अधिक सिंचाई व शुष्क दशाओं की स्थिति में पश्चिमी राजस्थान की मिट्‌टी में लवणीयता की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

–  प्रभावित क्षेत्र – इंदिरा गांधी नहर कमांड क्षेत्र (मुख्यत: गंगानगर, बीकानेर)

–  उपाय– ड्रीप सिस्टम सिंचाई प्रणाली एवं रॉक फास्फेट का उपयोग।

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Faq

राजस्थान में कौन कौन सी मृदा के प्रकार पाए जाते हैं?

रेतीली मिट्टी
दोमट मिट्टी
लाल-काली मिट्टी
पीली-लाल मिट्टी
काली मिट्टी
लेटेराइट मिट्टी 
जलोढ़ मिट्टी

राजस्थान में कौन सी मृदा का सर्वाधिक विस्तार है

लाल व पीली मृदा 

राजस्थान की सबसे उपजाऊ मिट्टी कौन सी है?

 जलोढ़ मिट्टी

MCQ

Q.1
निम्नलिखित में से मृदा संरक्षण का उपाय नहीं है–

1
मेड़बंदी

2
समोच्च कृषि

3
नियंत्रित पशुचारण

4
जल प्लावन

Q.2
निम्नलिखित में से किस मृदा में जलधारण क्षमता सर्वाधिक होती है?

1
लैटेराइट मृदा

2
पीट मृदा

3
जलोढ़ मृदा

4
काली मृदा

Q.3
‘राजस्थान काश्तकारी अधिनियम’ कब लागू हुआ?

1
1959

2
1952

3
1949

4
1955

Q.4
मिट्‌टी की सर्वाधिक विषमताएँ कौन-से स्थान पर है?

1
बालोतरा

2
सुमेरपुर

3
कांकरोली

4
फलोदी

Q.5
राजस्थान में मृदा की उर्वरता किस ओर बढ़ती है?

1
पश्चिम से पूर्व

2
पूर्व से पश्चिम

3
उत्तर से दक्षिण

4
दक्षिण से उत्तर

Q.6
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ राजस्थान में कहाँ से किया गया?

1
हनुमानगढ़

2
बीकानेर

3
नोखा

4
सूरतगढ़

Q.7
राजस्थान की मिट्‌टी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए–
(1) थार मरुस्थल में ग्रेनाइट और बलुआ-पत्थर शैलों से बलुई मिट्‌टी का निर्माण हुआ है।
(2) दक्षिणी भाग में ग्रेनाइट, नीस और क्वार्ट्जाइट शैलों से लाल लोमी मिट्‌टी का निर्माण हुआ है।
(3) दक्षिणी-पूर्वी भाग में बेसाल्ट लावा के क्षरण से काली मिट्‌टी का निर्माण हुआ है।
(4) दक्षिणी भाग में फास्फेटिक शैलों के क्षरण से मिश्रित लाल मिट्‌टी का निर्माण हुआ है।

1
1, 2, 3 व 4

2
1, 3 व 4

3
1, 2 व 3

4
1 व 3

Q.8
राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाने वाली मृदा है-

1
एरिडीसोल

2
एण्टीसोल

3
वर्टीसोल

4
एल्फीसोल

Q.9
साइरोजेक्स और रेवेरिना मृदा का संबंध है-

1
बाड़मेर

2
उदयपुर

3
कोटा

4
श्रीगंगानगर

Q.10
कपास की खेती के लिए काली मृदा को उपयोगी क्यों माना जाता है?

1
लावा निर्मित

2
पठारी भाग में

3
अधिक आर्द्रता ग्राही

4
कम आर्द्रता ग्राही

Q.11
कथन (A) राजस्थान में पाई जाने वाली सीरोजम मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति अपेक्षाकृत कम होती है।
कारण (R) सीरोजम मिट्‌टी में नाइट्रोजन तथा कार्बनिक पदार्थों की कमी होती है।

1
A सही है परन्तु R गलत है।

2
A तथा R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या करता है।

3
A तथा R दोनों सही है तथा R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।

4
A गलत है, परन्तु R सही है।

Q.12
निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म छाँटिए –

1
साइरोजेक्स – नागौर

2
रेवेरिना – श्रीगंगानगर

3
जिप्सीफेरम – बीकानेर

4
केल्सी ब्राउन – जैसलमेर, बीकानेर

Q.13
राजस्थान में बनास बेसिन में किस मृदा का विस्तार पाया जाता है?

1
लाल लोमी मृदा

2
काली मृदा

3
भूरी मृदा

4
पर्वतीय मृदा

Q.14
किस खनिज द्वारा मिट्टी की अम्लीयता को समाप्त किया जा सकता है?

1
जिप्सम

2
चूना

3
मैग्नीशियम

4
सोडियम

Q.15
निम्नलिखित में से किस स्थान पर इन्सेप्टीसोल्स मृदा पाई जाती है?

1
कोटा

2
बूँदी

3
सिरोही

4
बाड़मेर

Q.16
राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाने वाली मृदा है-

1
काली मृदा

2
दोमट मृदा

3
लाल – लोमी मृदा

4
रेतीली मृदा

Q.17
मिट्टी की लवणता व क्षारीयता को कम करने के लिए निम्नलिखित में से किसका उपयोग किया जाता है?

1
जिप्सम

2
खाद

3
समोच्च रेखाओं के अनुसार कृषि

4
वृक्षारोपण

Q.18
राज्य के किस भाग में एण्टीसोल मृदा पाई जाती है?

1
उत्तरी

2
दक्षिणी

3
पश्चिमी

4
उत्तर

Q.19
राजस्थान की सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी कौन-सी है?

1
लाल मिट्टी

2
दोमट मिट्टी

3
जलोढ़ मिट्टी

4
लाल – पीली मिट्टी

Q.20
निम्नलिखित में से कौन–सा एक कारण मृदा अपरदन का कारण नहीं है?

1
वायु अपरदन

2
जलीय अपरदन

3
जंगल काटना

4
वृक्षा रोपण

Q.21
राजस्थान में पाई जाने वाली वह मिट्टी जिसमें नमी को रोकने का गुण निहित हो-

1
काली मृदा

2
लाल – पीली मृदा

3
भूरी रेतीली मृदा

4
रेतीली – बलुई मृदा

Q.22
राजस्थान में मृदा का सर्वाधिक अपरदन किस क्षेत्र में होता है?

1
उत्तर – पूर्वी भाग में

2
दक्षिण – पूर्वी भाग में

3
पूर्वी भाग में

4
उत्तर – पश्चिमी भाग में

Q.23
राजस्थान में बालुका स्तूप वाले क्षेत्रों में कौन-सी मृदा पाई जाती है?

1
लवणीय मृदा

2
पर्वतीय मृदा

3
पीली – भूरी बलुई मृदा

4
काली मृदा

Q.24
वर्टीसोल्स मृदा किन जिलों में पाई जाती है?

1
झालावाड़, कोटा और बूँदी

2
उदयपुर, राजसमंद और अजमेर

3
अलवर, जयपुर और दौसा

4
जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर

Q.25
राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र सतही जल द्वारा मृदा-अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित है?

1
चम्बल प्रदेश

2
गौडवाड़ प्रदेश

3
मारवाड़ प्रदेश

4
शेखावाटी प्रदेश

Q.26
राजस्थान में पीली-भूरी मिट्टी कौन-से जिलों में पाई जाती है?

1
जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर

2
चूरू, अजमेर, नागौर व सीकर

3
सीकर, जालोर, बाराँ व झुंझुनूँ

4
जोधपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ व उदयपुर

Q.27
राजस्थान में निम्नलिखित में से किन जिलों में ‘लाल लोमी’ मृदा पाई जाती है?

1
बाराँ-कोटा

2
भीलवाड़ा-अजमेर

3
उदयपुर-डूँगरपुर

4
जयपुर-दौसा

Q.28
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए–

सूची-I (मिट्टी के प्रकार)

सूची-II (जलवायु प्रदेश)

A.

एरिडीसोल्स

1.

शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क

B.

इन्सेप्टीसोल्स

2.

अर्द्ध-शुष्क एवं आर्द्र

C.

एल्फीसोल्स

3.

उप आर्द्र एवं आर्द्र

D.

वर्टीसोल्स

4.

आर्द्र एवं अति आर्द्र

कूट:

1
A-1 B-3 C-2 D-4

2
A-4 B-1 C-2 D-3

3
A-1 B-3 C-4 D-2

4
A-1 B-2 C-3 D-4

नमस्ते- मेरा नाम कुलदीप सिंह चारण है। मैं ऑटोमोबाइल जगत का शौकीन लेखक हूं। ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में काम करने का शौक रखते हुए, मैंने अपना करियर उन खबरों को कवर करने और लेखों के माध्यम से दुनिया भर के दर्शकों तक अपनी राय पहुंचाने के लिए समर्पित किया है। मैं अपने दर्शकों तक ऑटोमोबाइल की दुनिया से नवीनतम समाचार और विशेष जानकारी लाने के लिए अथक प्रयास करता हूं। और अब से मैं AarambhTV.com में काम कर रहा हूं।

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