तत्सम और तद्भव शब्द किसे कहते हैं? Tatsam Shabd kise kahate hain (tadbhav)

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नमस्कार पाठको,
इस लेख में हम हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक तत्सम और तद्भव शब्द के विषय में जानेंगे। यहां इस लेख में आपके
tatsam tadbhav Shabd से सम्बंधित विभिन प्रश्नो के जवाब देने का प्रयास किया गया है।
जैसे :-
(1) तत्सम शब्द किसे कहते हैं?
(2) तद्भव शब्द किसे कहते हैं
(3) तत्सम शब्द की परिभाषा :-
(४) तद्भव शब्द की परिभाषा :-

(1) तत्सम शब्द किसे कहते हैं?

‘तत्’ तथा ‘सम’ के मेल से तत्सम शब्द बना है। ‘तत्’ का अर्थ होता है-‘उसके’ तथा ‘सम’ का अर्थ है ‘समान’ ।
अर्थात् उसके समान, ज्यों का त्यों। अतः किसी भाषा में प्रयुक्त उसकी मूल भाषा के शब्द जब ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं।

तत्सम शब्द की परिभाषा :-

“हिन्दी की मूल भाषा संस्कृत है, अतः संस्कृत भाषा के जो शब्द हिन्दी भाषा में अपरिवर्तित रूप में ज्यों के त्यों प्रयुक्त हो रहे हैं,
हिन्दी भाषा के तत्सम शब्द कहलाते हैं।”


जैसे- अग्नि, आम्र, कर्ण, दुग्ध, कर्म, कृष्ण।

  • वे शब्द भी हिन्दी में तत्सम शब्दों की श्रेणी में आते हैं जिन्हें आज की आवश्यकतानुसार संस्कृत शब्दों में
    संस्कृत के ही उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर बना लिए गये हैं,
  • जैसे-क्रय शक्ति, आयुक्त, प्रौद्योगिकी, उत्पादनशील, आकाशवाणी, दूरदर्शन।
  • साथ ही कुछ ऐसे शब्द भी हिन्दी में तत्सम शब्द कहलाते हैं जिन्हें संस्कृत भाषा के प्रचलन काल में ही विदेशी भाषाओं या
    अन्य स्रोतों से लेकर संस्कृत ने अपना लिया फिर संस्कृत से हिन्दी में भी आ गये।
    जैसे-दीनार, सिन्दूर, मुद्रा, मर्कट, रात्रि, केन्द्र, यवन, तांबूल, तीर, असुर, पुष्प, नीर, गण, गंगा, कदली आदि।

(2) तद्भव शब्द किसे कहते हैं?

‘तद्भव’ शब्द ‘तत्’ तथा ‘भव’ के मेल से बना है। ‘तत्’ का अर्थ है ‘उससे’ तथा ‘भव’ का अर्थ है ‘उत्पन्न’।
अर्थात् ‘उससे उत्पन्न।’ यहाँ ‘उससे’ शब्द संस्कृत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है।

हिन्दी भाषा के वे शब्द जो सीधे संस्कृत से ज्यों के त्यों नहीं लिए गये बल्कि वे शब्द जो संस्कृत से पालि, पालि से प्राकृत, प्राकृत से अपभ्रंश तथा अपभ्रंश से पुरानी हिन्दी से होते हुए घिस-पिटकर परिवर्तित रूप में हिन्दी में प्रयुक्त हो रहे हैं, हिन्दी के तद्भव शब्द कहलाते हैं। जैसे संस्कृत के पितृ से पिता, मातृ से माता, अग्नि से आग, आम्र से आम, गोधूम से गेहूँ रूप में परिवर्तित होकर हिन्दी में प्रयुक्त हो रहे हैं।

1. यदि किसी शब्द में अनुनासिक (चन्द्रविन्दु) का प्रयोग होता है तो वह प्रायः तद्भव शब्द माना जाता है। 2. ड़ व ढ़ वर्ण का प्रयोग भी सदैव तद्भव शब्द में ही होता है।


(3)अर्धतत्सम शब्द किसे कहते हैं?

हिन्दी भाषा के वे तद्भव शब्द जो सीधे संस्कृत से पुरानी हिन्दी के समय में आकर परिवर्तित हो गये; हिन्दी के अर्द्ध तत्सम शब्द कहलाते हैं । अर्थात् वे शब्द जो संस्कृत के अपने मूल रूप से थोड़े से विकृत रूप में हिन्दी में अपनाये गये हैं, ध्यान से देखने पर ये संस्कृत (तत्सम) रूप का स्पष्ट आभास कराते हैं। डॉ. ग्रियर्सन एवं डॉ. चटर्जी संस्कृत के उन शब्दों को अर्द्ध तत्सम शब्द मानते हैं जो उच्चारण की अशुद्धता या असावधानी के कारण किंचित परिवर्तित हो गये।

तत्सम और तद्भव शब्दों के उदाहरण

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