कंप्यूटर के प्रकार क्या है? Types Of Computer in Hindi (Classification) Prakar

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इस लेख में कंप्यूटर के प्रकार (Types Of Computer in Hindi) के बारे में जानेंगे। पिछले लेख में हमने कंप्यूटर क्या है के विषय में जाना था।
अब हमारे मन में एक प्रश्न होता है की कंप्यूटर के प्रकार (Computer ke Prakar) कितने होते है और कौन-कौन से होते है ?
जैसे जैसे कंप्यूटर की पीढ़ियों का विकास हुआ वैसे वैसे कंप्यूटर के विभिन्न प्रकार भी सामने आये। विभिन्न प्रकार के अलग अलग कंप्यूटर की विशेषता भी अलग अलग प्रकार की होती हैं।
तो आइये चलिए जानते है कंप्यूटर के वर्गीकरण/ प्रकार (Classification of Computer) के बारे में :-

कंप्यूटरों को उनके उपयोग, उपयोग में ली गई तकनीकी व इनके अभिलक्षणों यथा गति, कीमत, क्षमता एवं आकार आधार पर निम्न विभिन्न समूहों में वर्गीकरण किया जाता है।


कंप्यूटर के प्रकार (Types Of Computer in Hindi)

कंप्यूटरों का वर्गीकरण (Classification of Computer in Hindi) उनके उपयोग, उपयोग में ली गई तकनीकी व इनके अभिलक्षणों यथा गति, कीमत, क्षमता एवं आकार आधार पर निम्न विभिन्न समूहों में वर्गीकरण किया जाता है।
कंप्यूटर के प्रकार (Types Of Computer in Hindi) :-

(A) Based on Application (तकनीकी आधार पर)
(B) Based on Purpose (उपयोगिता के आधार पर)
(C) Based On Size ( आकार व क्षमता के आधार पर)

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(A) तकनीकी आधार पर कंप्यूटर के प्रकार (Types Of Computer Based on Application in Hindi) :-

कंप्यूटर का वर्गीकरण उपयोग में ली गयी तकनीकी(Application) या कार्यपद्धति (Working Process) के आधार कंप्यूटर के प्रकार (Types Of Computer) निम्न हैं :-

1. डिजिटल/ अंकीय कंप्यूटर (Digital Computer) :-

डिजीटल कंप्यूटर में सूचनाओं व आँकड़ों को डिस्क्रीट रूप में निश्चित अंकों 0 या 1 के रूप में निरूपित किया जाता है।
1940 के दशक का पहला कंप्यूटर प्रमुख रूप से अंकीय गणनाओं को सम्पन्न करने
हेतु प्रयुक्त किया जाता था।
इसी कारण कंप्यूटर को डिजीटल कंप्यूटर नाम दिया गया।
प्रयोगात्मक रूप से केवल दो अंकों 0 एवं 1 का प्रयोग करने पर डिजीटल कंप्यूटर की क्रियाएँ अधिक परिशुद्ध, सटीक एवं विश्वसनीय होती हैं।
डिजीटल कंप्यूटर डाटा एवं प्रोग्राम को 0 तथा 1 में परिवर्तित करके उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप में ले आता है।

यह कंप्यूटर प्रत्येक क्रिया या गतिविधि को ‘yes’ (अर्थात् 1) एवं ‘No’ (अर्थात् 0) में व्यक्त कर
उसके अनुसार क्रिया करता है।
अतः डिजीटल मशीनों में सर्वथा द्वि-आधारी (Binary) अंकीय प्रणाली काम में ली जाती है
जिसमें केवल दो अंक 0 या 1 ही होते हैं।

डिजीटल कंप्यूटर सभी गणनाएँ व संक्रियाएँ तथा समस्त डेटा (अंकीय, अक्षरीय या अक्षर-अंकीय, Numeric, Alphabetic या Alpha-numeric) इन्हीं द्विआधारी अंकों (Binary Digits या Bits) के रुप में ही समझता है।
अत: सभी संख्याओं या सूचनाओं को बाइनेरी अंकों (0 या 1) में परिवर्तित कर ही गणना करता है।
डिजिटल कंप्यूटर तेज गतिवाले, परिशुद्धता से गणना करने वाली तथा छोटी से छोटी (हथेली Palm, पॉकेट Pocket) से लेकर वृहत् आकार की मशीनें हैं।


2. एनालॉग (Analog Computers ):-

एनालॉग कंप्यूटर वे कंप्यूटर होते हैं जिनमें विभिन्न भौतिक राशियों यथा दाप, तापमान, लम्बाई आदि (गुणात्मक राशियों) जो सतत् रूप से परिवर्तित होती रहती हैं, को इलेक्ट्रॉनिक परिपथों की सहायता से विद्युत संकेतों में परिवर्तित किया जाता है।

ये कंप्यूटर किसी राशि क परिमाप परस्पर तुलना के आधार पर करते हैं।
एनॉलॉग कंप्यूटर मुख्य रूप से विज्ञान एवं इंजिनियरिंग के क्षेत्र में प्रयोग किये जाते हैं,
क्योंकि इन क्षेत्रों में मात्राओं का उपयोग अधिक होता है।
सतत (लगातार हो रहे) परिवर्तन को नापने या सतत रूप से नापने हेतु एनालॉग कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है ।
इन मशीनों में इलेक्ट्रॉनिक परिप (Circuits) या सेन्सर (Sensors) लगे होते हैं जो नापने वाली
राशियों का संख्यात्मक परिवर्तन करके गणना करत है।
एनालॉग सूचना (सतत सूचना) को अंकीय सूचना में परिवर्तित करने के लिए संकेत की चोपिंग (Chopping) या पल्स मोडुलेशन किया जाता है।


3. संकर या हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer ):-

हाइब्रिड कंप्यूटर में एनालॉग तथा डिजीटल कंप्यूटरों में प्रयोजित दोनों विधियों का उपयोग किया जाता है।
इसके अन्तर्गत गणना करते वक्त कुछ हिस्से को एनालॉग कंप्यूटर पर तथा
शेष हिस्से की डिजिटल कंप्यूटर पर गणना करते हैं।
अस्पताल में ICU (Intensive care Unit) में तथा मिटियोरोलोजिकल (Metorologieal) विभाग में मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणियों में इनका उपयोग किया जाता है।


4. प्रकाशीय कंप्यूटर (Optical Computer):-

आधुनिक युग के कंप्यूटरों के रूप में इस प्रकार के कंप्यूटर बनाए जा रहे हैं,
जिनमें एक पुर्जे (अवयव) को दूसरे से जोड़ने का कार्य ऑप्टीकल फाइबर के तारों से किया जाता है।
इनके गणना करने वाले अवयव या डिवाइस प्रकाशीय पद्धति पर आधारित बनाए गए हैं।
विद्युत संकेतों की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड की कोटि की होती है
लेकिन इतनी गति से भी 1 मीटर के तार में विद्युत संकेत को 3.3 नैनो सेकण्ड का समय लगता है।
प्रकाश के संवहन के लिए तार जैसे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है जिससे प्रकाश की गति,
विद्युत से अधिक होती है इसलिए बिना तार के प्रकाशीय पद्धति आधारित कंप्यूटर विकसित किये जा रहे हैं।


5. परमाणविक या एटॉमिक कंप्यूटर (Atomic Computer):-

ये ऐसा विकासशील कंप्यूटर है जिनमें कुछ विशेष प्रोटीन अणुओं को एकीकृत परिपथ में बदला जाए और
इसमें इतनी अधिक स्मृति-क्षमता आ जाए कि
यह आज के कंप्यूटरों से 10,000 गुना अधिक क्षमता वाला हो।


(B) उपयोगिता के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार (Based on Purpose)

कंप्यूटरों का वर्गीकरण उनके उपयोग के आधार पर भी किया जा सकता है।
प्रारंभिक कंप्यूटर केवल विज्ञान सम्बन तथा व्यवसाय सम्बन्धी थे।
अतः कंप्यूटर की प्रथम एवं द्वितीय पीढ़ी वैज्ञानिक सम्बन्धी गणना के लिए ही थी।
कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी आने के बाद वैज्ञानिक से व्यावसायिक कंप्यूटरों में परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे क्योंकि आँकड़ा संसाधनों (data processing) में काफी तेजी आ गई।


(C) Computer ke Prakar आकार व क्षमता के आधार पर (Types Of Computer in Hindi)

कार्य करने की गतिशीलता, कीमत, एवं आकार के आधार पर भी कंप्यूटर वर्गीकरण (Types Of Computer in Hindi) कर सकते हैं। इस आधार पर कंप्यूटर के प्रकार (Computer ke Prakar) के होते हैं।

1. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers)-

यह कंप्यूटर _1950 के दशक में बनाया गया था। यह कमरे के आकार जैसे विशालकाय था।
इससे विज्ञान एवं व्यवसाय के आँकड़े संसाधित (Process) किए जाते थे।
इसकी विशेषता यह थी कि इसको अनेक लोग एक साथ उपयोग में ले सकते थे।

इसकी सूचना भण्डारण क्षमता (Storing Capacityक्षमता) अत्यधिक है। मुख्य-स्मृति (Main Memory) साधारणतः 256 किलो बाइट से लेकर 2GB तक होती है।
इस कंप्यूटर में प्रायः 100 से अधिक आदमी एक साथ काम कर सकते । इसकी कीमत करोड़ों रुपयों में होती है।

इन कंप्यूटरों का उपयोग मुख्यत: बड़े संगठनों जैसे- रेलवे, एयर लाईन तथा वैज्ञानिक संस्थाओं इत्यादि में होता है।


2. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)-

मेन फ्रेम कंप्यूटर की तुलना में मिनी कंप्यूटर सस्ता, कम शक्तिशाली व मध्यम आकार का होता है।
इस कंप्यूटर का विकास 60 के दशक में हुआ था।
मिनी कंप्यूटर को भी एक ही समय में अनेक लोग प्रयोग कर सकते हैं।
इनका प्रयोग प्रायः प्रयोशालाओं व व्यावसायिक संगठनों में किया जाता है।

सभी कंप्यूटर के वर्गों में से मिनी कंप्यूटर मध्यम आकार के कंप्यूटर होते हैं।
इनमें एक से अधिक सी.पी.यू. होत हैं और इनकी स्मृति (Memory), कार्य क्षमता और गति (speed) माइक्रोकंप्यूटर की अपेक्षा अधिक और मेनफ्रेम कंप्यूटर से कम होती है।
मध्यम स्तर की कम्पनियों में मिनी कंप्यूटर ही उपयोगी माने जाते हैं।

मिनी कंप्यूटरों के उपयोग, यातायात में यात्रियों के लिए आरक्षण-प्रणाली का
संचालन और बैंकों में बैंकिंग (Banking) के कार्य हैं।

सन् 1965 में सबसे पहला मिनी कंप्यूटर PDP-8 था जिसे डी.ई.सी. (DEC- Digital Equipment Corporation) ने तैयार किया था। यह एक रेफ्रिजरेटर के आकार का था।


3. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)-

इन कंप्यूटरों का विकास 1970 के दशक में हुआ। 1970 के दशक के प्रारम्भ में
एक क्रांतिकारी आविष्कार से सम्पूर्ण केन्द्रीय संसाधन इकाई (सी.पी.यू.) का परिपथ
एक छोटी-सी सिलीकॉन चिप पर तैयार करना सम्भव हो गया।
यह आविष्कार था माइक्रोप्रोसेसर का जिसके उपयोग से सस्ती कंप्यूटर-प्रणाली बनाना सम्भव हुआ।
ये कंप्यूटर एक डेस्क पर अथवा एक ब्रीफकेस में भी रखे जा सकते हैं ।
ये छोटे कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर कहलाते हैं।

माइक्रो कंप्यूटर कीमत में सस्ते और आकार में छोटे होते हैं इसलिए ये व्यक्तिगत उपयोग के
लिए घर या बाह र किसी भी कार्यक्षेत्र में लगाये जा सकते हैं,
अत: इन्हें पर्सनल कंप्यूटर या पी.सी. भी कहते हैं।
माइक्रो कंप्यूटर में एक ही सी.पी.यू. लगा होता है।
वर्तमान समय में माइक्रो कंप्यूटर का विकास तेजी से हो रहा है।
परिणामस्वरूप माइक्रो कंप्यूटर एक पुस्तक के आकार, फोन के आकार और
यहाँ तक कि घड़ी के आकार में भी आ रहे हैं।
माइक्रो कंप्यूटर 20-25 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक की कीमत के उपलब्ध हैं। माइक्रो कंप्यूटर घरों में, विद्यालयों की कक्षाओं में और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों आदि में लगाये जाते हैं।
इन कम्प्यटरों में छोटी केन्द्रीय संसाधन इकाइयों (CPU) का उपयोग किया जाता है।
इन कंप्यूटरों पर कंप्यूटर गेम्स का भी विकास हुआ है। इन मशीनों से अधिगम व शिक्षण विधियों में भी काफी परिवर्तन व सुधार हुआ है।

माइक्रो कंप्यूटरों की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं

  • इनका आकार इतना छोटा होता है कि इन्हें एक मेज पर भी रखा जा सकता है।
    अब तो पाम कंप्यूटर (हथेली में रखने योग्य) टेबलेट PC आदि भी आते हैं।
  • माइक्रो कंप्यूटर उपयोगकर्ता के लिए मित्रवत् (User-Friendly) होते हैं।
    ये सस्ते और उपयोग करने में आसान होते हैं। इनमें भंडारण की क्षमता कम लेकिन पर्याप्त होती है।
  • इन पर एक बार में एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है।

4. लैपटॉप कंप्यूटर (Laptop Computer)-

लैपटॉप ऐसा माइक्रो कंप्यूटर है जो कि बैटरी (Battery) के साथ भी चलता हैं। डेस्कटॉप कंप्यूटर्स के विपरीत, एक लैपटॉप में कीबोर्ड (Keyboard), माउस (Mouse), और मॉनिटर (Monitor) इसके अभिन्न हिस्से होते हैं।
बाहर से लैपटॉप कंप्यूटर के दो भाग, स्क्रीन और की-बोर्ड होते हैं।
ये दोनों भाग इस तरह से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं कि स्क्रीन मुड़ कर की-बोर्ड के ऊपर आ जाता है। इन्हें बैग में रखकर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।


5. स्टाइलस वाले टेबलेट पीसी (Tablet PC with Stylus):-

टेबलैट (Tablet) एक पर्सनल कंप्यूटर है, जो कि एक टच स्क्रीन फोन (Touch Screen Phone) के समान दिखता है।
यह एक सामान्य पीसी की तरह काम करता है किन्तु इसका इंटरफेस (Interface) टच स्क्रीन होता है।
आप इन टच स्क्रीन पर एक स्टाइलस (Stylus) या उंगली की मदद से काम कर सकते हैं।
स्टाइलस एक विशेष किस्म का पेन होता जिससे उपयोगकर्ता टेबलेट के स्क्रीन पर दिखने वाले आइकॉन (Icon) को सलेक्ट कर सकता है और कमाण्ड (Command) दे सकता है।


6. सुपर कंप्यूटर (Super Computer)-

यह अन्य सभी प्रकार के कंप्यूटरों से बहुत अधिक शक्तिशाली होता है।
इसकी गतिशीलता तथा मेमोरी क्षमता भी अत्यधिक होती है।
सुपर कंप्यूटर की कार्य करने की क्षमता 500 मेगाफ्लाप से भी अधिक होती है।
इन कंप्यूटर्स में मल्टीप्रोसेसिंग एवं समान्तर प्रोसेसिंग तकनीकी का उपयोग किया जाता है नवीनतम विकसित सुपर कंप्यूटर्स की कार्यक्षमता गीगाफ्लॉप एवं टेराफ्लॉप्स तक हो गई है।

इसका प्रयोग प्रायः मौसम की भविष्यवाणियों, वैज्ञानिक व अन्तरिक्ष संबंधित शोध, सघन गणना कार्यों, आण्विक मॉड्यूलिंग, भौतिक सिमुलेशन, सैन्य एजेंसियों इत्यादि में किया जाता है।
सुपर कम्प्यूटर में अनेक सीपीयू (CPU) समान्तर क्रम में कार्य करते हैं। सुपर कम्प्यूटर नॉन-वॉन न्यूमैन सिद्धान्त के आधार पर तैयार किया जाता है।
इस कम्प्यूटर में अनेक ALU सीपीयू का एक भाग होते हैं जो सभी एक साथ समान्तर प्रक्रिया करते हैं।
इनमें से प्रत्येक निश्चित क्रिया के लिए होता सुपर कम्प्यूटर का उपयोग निम्न कार्यों में होता है

  • आई.आई.टी. संस्थानों एवं अभियांत्रिकी, वैज्ञानिक एवं शोध प्रयोग शालाओं में।
  • खगोलशास्त्र में।
  • मौसम विज्ञान में ।
  • मल्टीमीडिया व फिल्म निर्माण में।

विश्व का पहला सुपर कम्प्यूटर के रिसर्च कंपनी ने 1979 में ‘CRAY K.I.S’ बनाया था।
सूपर कम्प्यूटरों की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार हैंये कम्प्यूटर आकार में बड़े होते हैं और इनकी प्रोसेसिंग स्पीड बहुत अधिक होती है। “ये दुनिया में सबसे महँगे और खर्चीले कम्प्यूटर हैं।
ये कम्प्यूटर विराट वैज्ञानिक गणनाएँ करने में समर्थ हैं। इन कम्प्यूटरों द्वारा एक सेकण्ड में 10 से 100 अरब गणनाएँ की जा सकती हैं।

सुपर कम्प्यूटर के उदाहरण- CRAY-1, CRAY-2, परम्, परम-1000, CRAY-XMP-24, NEC-500 कम्प्यता के अन


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What is Computer classification of computer?

(A) Based on Application (तकनीकी आधार पर)
(B) Based on Purpose (उपयोगिता के आधार पर)
(C) Based On Size ( आकार व क्षमता के आधार पर)

कंप्यूटर क्या है कंप्यूटर का वर्गीकरण?

(A) Based on Application (तकनीकी आधार पर)
(B) Based on Purpose (उपयोगिता के आधार पर)
(C) Based On Size ( आकार व क्षमता के आधार पर)

कंप्यूटर के कितने प्रकार होते हैं?

डिजिटल/ अंकीय कंप्यूटर (Digital Computer)
एनालॉग (Analog Computers )
संकर या हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer )
प्रकाशीय कंप्यूटर (Optical Computer)
परमाणविक या एटॉमिक कंप्यूटर (Atomic Computer)
मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers)
मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
लैपटॉप कंप्यूटर (Laptop Computer)

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं नाम बताइए?

डिजिटल/ अंकीय कंप्यूटर (Digital Computer)
एनालॉग (Analog Computers )
संकर या हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer )
प्रकाशीय कंप्यूटर (Optical Computer)
परमाणविक या एटॉमिक कंप्यूटर (Atomic Computer)
मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers)
मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
लैपटॉप कंप्यूटर (Laptop Computer)

कंप्यूटर को कितने भागों में बांटा गया है?

(A) Based on Application (तकनीकी आधार पर)
(B) Based on Purpose (उपयोगिता के आधार पर)
(C) Based On Size ( आकार व क्षमता के आधार पर)

आकार के आधार पर कंप्यूटर कितने प्रकार का होता है?

मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers)
मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
लैपटॉप कंप्यूटर (Laptop Computer)

डिजिटल कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं?

3 Types Of Computer in Hindi